By Malay Ojha | Published: 04 July 2026 at 11:39 AM
राम मंदिर दान चोरी मामले की जांच में पुलिस को एक और बड़ी सफलता मिली है। गिरफ्तार आरोपी अविनाश शुक्ला की पुलिस रिमांड के दौरान उसकी निशानदेही पर एक कार बरामद की गई है। सूत्रों के अनुसार, इसी वाहन से ज्वेलरी भी मिली है। पूछताछ में आरोपी ने कई अहम जानकारियां दी हैं, जिसके बाद अब जांच का दायरा और बढ़ गया है। पुलिस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है और जल्द ही अन्य आरोपियों को भी रिमांड पर लेने की तैयारी कर सकती है।
करीब 13 घंटे की पुलिस रिमांड के दौरान अविनाश शुक्ला की निशानदेही पर एक सुजुकी ब्रेजा कार बरामद की गई। पुलिस अब इस वाहन से जुड़े हर पहलू की जांच कर रही है। सूत्रों का दावा है कि कार से ज्वेलरी का बड़ा जखीरा भी मिला है। हालांकि पुलिस ने अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और बरामद सामान की जांच जारी है।
वाहन किसके नाम, पुलिस कर रही पड़ताल
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक यह वाहन अविनाश के भाई अभिषेक शुक्ला के नाम पर दर्ज बताया जा रहा है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि कार की खरीद में चोरी के पैसों का इस्तेमाल हुआ था या नहीं। साथ ही वाहन के इस्तेमाल और उसके मालिकाना हक से जुड़े सभी दस्तावेज भी खंगाले जा रहे हैं।
कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी
कार बरामद होने के बाद जांच टीम ने अयोध्या स्थित अविनाश के घर समेत उन कई ठिकानों पर भी छापेमारी की, जहां चोरी की रकम बांटे जाने की आशंका है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि चोरी के पैसों का इस्तेमाल किन-किन जगहों पर किया गया और उससे कौन-कौन लाभान्वित हुआ।
पूछताछ में कई अहम राज खुले
सूत्रों के अनुसार पूछताछ के दौरान अविनाश ने कई ऐसे खुलासे किए हैं, जिनसे जांच को नई दिशा मिली है। उसने कथित तौर पर टिन्नू और सुभाष की भूमिका का भी जिक्र किया और बताया कि चोरी की पूरी योजना मिलकर बनाई जाती थी। आरोपी का कहना है कि हर बार लाखों रुपये निकाले जाते थे और यह सिलसिला काफी समय से चल रहा था।
नौकरी के बाद बना नेटवर्क का हिस्सा
पूछताछ में अविनाश ने बताया कि करीब एक वर्ष पहले नौकरी मिलने के बाद वह भी इस पूरे खेल में शामिल हो गया था। उसके मुताबिक पहले से जुड़े लोग उसे भरोसा दिलाते थे कि पकड़े जाने का कोई खतरा नहीं है। इसी भरोसे के कारण वह लंबे समय तक चोरी की वारदातों में शामिल रहा।
फुटेज मिटाने का भी किया दावा
सूत्रों के अनुसार आरोपी ने पूछताछ में यह भी कहा कि टिन्नू निगरानी की जिम्मेदारी संभालता था और वह भरोसा दिलाता था कि अगर कोई घटना सामने भी आई तो निगरानी वाले कैमरों की रिकॉर्डिंग हटा दी जाएगी। इसी वजह से किसी तरह की कार्रवाई का डर नहीं था। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठे सवाल
आरोपी ने यह भी दावा किया कि चोरी के दौरान कभी किसी सुरक्षाकर्मी या अन्य कर्मचारी ने उसे नहीं रोका। अगर पूछताछ में कही गई बातें सही साबित होती हैं तो मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी प्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं। पुलिस इस पहलू की भी अलग से जांच कर रही है।
चोरी के पैसों से खरीदी कार और बनाया घर
सूत्रों के मुताबिक अविनाश ने पूछताछ में बताया कि चोरी से मिली रकम सभी आरोपियों के बीच बांटी जाती थी। कई बार बराबर हिस्सेदारी होती थी, जबकि कुछ मौकों पर किसी एक व्यक्ति को ज्यादा रकम भी मिलती थी। आरोपी का दावा है कि उसी पैसे से उसने कार खरीदी, गांव में मकान बनवाया और अपने भाई को भी आर्थिक मदद दी।
जेल भेजा गया आरोपी, आगे और हो सकती है कार्रवाई
रिमांड की अवधि पूरी होने के बाद पुलिस ने देर रात अविनाश को जेल भेज दिया। अब जांच एजेंसियां उसके बयान और बरामद साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही हैं। सूत्रों का कहना है कि अभी और नकदी या अन्य सामान बरामद हो सकता है। ऐसे में पुलिस जल्द ही बाकी आरोपियों की रिमांड के लिए अदालत में नई अर्जी दाखिल कर सकती है।
जांच अभी जारी
राम मंदिर दान चोरी मामले में पुलिस लगातार साक्ष्य जुटा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने से पहले किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। फिलहाल बरामद कार, कथित ज्वेलरी, आरोपियों के बयान और आर्थिक लेनदेन से जुड़े सभी पहलुओं की गहराई से जांच की जा रही है। जैसे-जैसे नए तथ्य सामने आएंगे, वैसे-वैसे इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
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