बिजली खपत में बिहार ने रचा इतिहास, पहली बार 9155 मेगावाट पीक डिमांड पूरी; बिना कटौती सप्लाई से सरकार का बड़ा दावा

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बिहार ने पहली बार 9155 मेगावाट की रिकॉर्ड बिजली मांग पूरी की
बिहार ने पहली बार 9155 मेगावाट की रिकॉर्ड बिजली मांग पूरी की

By Malay Ojha | Published: 04 July 2026 at 06:50 PM

बिहार ने बिजली क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है। तीन जुलाई की रात राज्य में पहली बार 9155 मेगावाट की रिकॉर्ड पीक डिमांड दर्ज की गई और खास बात यह रही कि इतनी बड़ी मांग के बावजूद कहीं भी बड़े स्तर पर बिजली आपूर्ति प्रभावित नहीं हुई। ऊर्जा विभाग ने इसे राज्य की बिजली व्यवस्था की बड़ी सफलता बताया है। यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है जब राज्य में बिजली की खपत लगातार तेजी से बढ़ रही है।

ऊर्जा विभाग के मुताबिक रात 10 बजकर 58 मिनट पर यह रिकॉर्ड दर्ज हुआ। इतनी बड़ी मांग के दौरान पूरे सिस्टम को स्थिर बनाए रखना बड़ी चुनौती होती है, लेकिन विभाग ने दावा किया कि उपभोक्ताओं को बिना किसी कटौती के लगातार बिजली मिलती रही। यही इस उपलब्धि को और खास बनाता है। विभाग का कहना है कि मजबूत ग्रिड व्यवस्था और बेहतर लोड मैनेजमेंट के कारण यह संभव हो सका।

तेजी से बढ़ रही है बिजली की खपत
राज्य में पिछले कुछ वर्षों में बिजली की मांग में बड़ा उछाल देखा गया है। एक दशक पहले जहां अधिकतम मांग करीब 1800 मेगावाट के आसपास रहती थी, वहीं अब यह आंकड़ा 9100 मेगावाट से भी ऊपर पहुंच गया है। पहले जो रिकॉर्ड साल में एक बार बनता था, अब वही कई बार टूट रहा है। इससे साफ है कि राज्य में बिजली पर निर्भरता लगातार बढ़ रही है।

घर से लेकर उद्योग तक बढ़ी खपत
ऊर्जा विभाग के अनुसार घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ उद्योग, बाजार, खेती और शहरों में तेजी से बढ़ रही गतिविधियों ने बिजली की मांग को नई ऊंचाई दी है। सिंचाई के लिए बिजली आधारित संसाधनों का उपयोग बढ़ा है, वहीं गांवों में भी अब पहले की तुलना में बिजली खपत में भारी इजाफा हुआ है। जीवन स्तर में सुधार और नई सुविधाओं के इस्तेमाल ने भी मांग को बढ़ाया है।

मजबूत हुआ ट्रांसमिशन और वितरण नेटवर्क
सरकार का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में ट्रांसमिशन लाइन, ग्रिड उपकेंद्र, पावर ट्रांसफॉर्मर और वितरण नेटवर्क की क्षमता लगातार बढ़ाई गई है। इसी का असर है कि रिकॉर्ड मांग के समय भी सिस्टम पर दबाव नहीं बना। आधुनिक तकनीक और रियल टाइम निगरानी की वजह से बिजली व्यवस्था को अधिक स्थिर बनाया गया है।

चौबीस घंटे हो रही निगरानी
ऊर्जा विभाग और बिजली कंपनियां लगातार पूरे सिस्टम की निगरानी कर रही हैं। संभावित तकनीकी दिक्कतों को पहले ही पहचानकर जरूरी इंतजाम किए जा रहे हैं। उपभोक्ताओं की शिकायतों के समाधान के लिए 1912 हेल्पलाइन और फ्यूज कॉल सेंटर भी लगातार सक्रिय हैं। विभाग का दावा है कि शिकायतों का तेजी से समाधान किया जा रहा है।

ऊर्जा मंत्री ने क्या कहा
ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल ने कहा कि बिजली की बढ़ती मांग राज्य में तेज विकास का संकेत है। उन्होंने कहा कि यह दिखाता है कि राज्य के हर क्षेत्र में विकास की रफ्तार बढ़ी है। सरकार का लक्ष्य है कि हर उपभोक्ता को निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली मिलती रहे। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए पूरे ऊर्जा विभाग और कर्मचारियों को बधाई दी।

अधिकारियों ने बताया आगे क्या है योजना
ऊर्जा विभाग के सचिव सह बीएसपीएचसीएल के अध्यक्ष अजय यादव ने कहा कि आने वाले समय में बिजली की मांग और बढ़ने की संभावना है। इसे देखते हुए ट्रांसमिशन और वितरण नेटवर्क का विस्तार और तेजी से किया जाएगा। उन्होंने कहा कि नई तकनीकों और आधुनिक ग्रिड सिस्टम के जरिए राज्य भविष्य की बड़ी चुनौतियों के लिए तैयार हो रहा है।

बिहार की बिजली व्यवस्था अब नई दिशा में
लगातार बनते रिकॉर्ड यह संकेत दे रहे हैं कि बिहार अब बिजली के मामले में पिछड़े राज्यों की सूची से निकलकर मजबूत राज्यों की कतार में खड़ा हो रहा है। बढ़ती मांग को संभालना आसान नहीं होता, लेकिन मौजूदा आंकड़े बताते हैं कि बिजली ढांचे में सुधार का असर अब जमीन पर दिखने लगा है।

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