By aryavartalive | Published: 05 July 2026 at 01:39 PM
जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन के बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की लगातार बिगड़ती सेहत को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसी बीच सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) ने एक पोस्टर जारी कर उनसे अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल खत्म करने की भावुक अपील की है। पार्टी का कहना है कि सरकार के खिलाफ राजनीतिक लड़ाई दूसरे तरीकों से भी लड़ी जा सकती है, लेकिन यदि सोनम वांगचुक को कोई नुकसान पहुंचता है तो यह पूरे देश और प्रकृति के लिए दुखद होगा।
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के बिहार प्रदेश अध्यक्ष धनंजय कुमार सिन्हा ने कहा कि केन्द्र सरकार की नीतियों का लोकतांत्रिक और राजनीतिक तरीके से विरोध किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि किसी भी आंदोलन का उद्देश्य जनहित होना चाहिए, लेकिन यदि किसी आंदोलन में किसी व्यक्ति के जीवन पर संकट आ जाए तो उस स्थिति पर गंभीरता से विचार करना जरूरी हो जाता है।
‘जीवन प्रकृति का सबसे बड़ा उपहार’
पार्टी की ओर से जारी बयान में कहा गया कि सोनम वांगचुक का जीवन केवल उनका व्यक्तिगत जीवन नहीं, बल्कि समाज और पर्यावरण के लिए प्रेरणा है। इसलिए उनसे आग्रह किया गया है कि वह अपना अनशन समाप्त करें और स्वस्थ रहकर अपनी लड़ाई आगे बढ़ाएं। पार्टी का कहना है कि जीवन प्रकृति का सबसे बड़ा उपहार है और उसकी रक्षा सबसे पहली जिम्मेदारी होनी चाहिए।
16वें दिन भी जारी है आंदोलन
जंतर-मंतर पर चल रहा आंदोलन रविवार को 16वें दिन में पहुंच गया। प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर लगातार डटे हुए हैं। आंदोलन में देश के अलग-अलग हिस्सों से छात्र, युवा और सामाजिक संगठनों के लोग पहुंच रहे हैं। प्रदर्शन स्थल पर समर्थन देने वालों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है।
8 दिन से भूख हड़ताल पर हैं सोनम वांगचुक
आंदोलन के समर्थन में सोनम वांगचुक पिछले आठ दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। लंबे समय से भोजन नहीं लेने के कारण उनकी तबीयत लगातार खराब होती जा रही है। चिकित्सकों के अनुसार उनका वजन पांच किलोग्राम से अधिक कम हो चुका है। साथ ही उनका रक्तचाप सामान्य से नीचे बना हुआ है और रक्त में शर्करा का स्तर भी लगातार गिर रहा है।
डॉक्टरों की निगरानी में चल रहा इलाज
चिकित्सकों की टीम लगातार उनकी स्वास्थ्य जांच कर रही है। नियमित अंतराल पर जरूरी परीक्षण किए जा रहे हैं ताकि किसी भी तरह की गंभीर स्थिति से समय रहते निपटा जा सके। डॉक्टरों ने फिलहाल उनकी हालत पर लगातार नजर बनाए रखने की बात कही है।
आंदोलन खत्म करने के कोई संकेत नहीं
आंदोलन से जुड़े अभिजीत दीपके ने साफ कहा कि जब तक सरकार उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाती, तब तक भूख हड़ताल और आंदोलन जारी रहेगा। उनका कहना है कि यह लड़ाई केवल किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि उन लाखों युवाओं और छात्रों की आवाज है जो लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं।
छात्रों और सामाजिक संगठनों का बढ़ता समर्थन
प्रदर्शन स्थल पर हर दिन अलग-अलग राज्यों से छात्र संगठन, युवा समूह और सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि पहुंच रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचाना है। आंदोलन के दौरान संवाद कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें युवाओं के साथ विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की जा रही है।
सोशल मीडिया पर भी बढ़ी हलचल
जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन को लेकर सोशल मीडिया पर भी लगातार चर्चा हो रही है। बड़ी संख्या में लोग आंदोलन के समर्थन में अपनी राय रख रहे हैं। आयोजकों का कहना है कि आने वाले दिनों में छात्रों, शिक्षकों, विशेषज्ञों और समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों के साथ भी संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे ताकि आंदोलन को और व्यापक बनाया जा सके।
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