पटना।जनता दल (यूनाइटेड) के प्रदेश सचिव एवं सोनपुर विधानसभा के पूर्व प्रभारी आचार्य डॉ. राहुल परमार आज बिहार की राजनीति में एक ऐसे नाम के रूप में तेजी से स्थापित हो रहे हैं, जिनकी पहचान केवल संगठनात्मक पदों तक सीमित नहीं है, बल्कि वैचारिक गहराई, बौद्धिक क्षमता और सामाजिक सक्रियता तक फैली हुई है। विगत तीन वर्षों के भीतर पार्टी और संगठन में उन्होंने जिस तरह से अपनी अलग पहचान बनाई है, वह उन्हें जदयू के उभरते हुए बड़े चेहरों की कतार में खड़ा करता है।
आचार्य डॉ. राहुल परमार का राजनीतिक व्यक्तित्व उनके अकादमिक और साहित्यिक योगदान से गहराई से जुड़ा हुआ है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर केंद्रित दर्जन भर से अधिक चर्चित पुस्तकों की रचना कर चुके डॉ. परमार न केवल मुख्यमंत्री के शासन मॉडल और सामाजिक न्याय की अवधारणा को गहराई से समझते हैं, बल्कि उसे वैचारिक रूप से प्रस्तुत करने की क्षमता भी रखते हैं। यही कारण है कि पार्टी के भीतर उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में देखा जा रहा है, जो संगठन और विचार—दोनों स्तरों पर मजबूती प्रदान करता है।
नीतीश कुमार को अपना राजनीतिक आदर्श मानने वाले आचार्य डॉ. राहुल परमार ने सुशासन, समाज सुधार और समावेशी विकास की राजनीति को अपने सार्वजनिक जीवन का मूल मंत्र बनाया है। सोनपुर विधानसभा के पूर्व प्रभारी के रूप में उन्होंने जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं से संवाद स्थापित करने और जनता की समस्याओं को पार्टी मंच तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाई। संगठनात्मक कार्यशैली और वैचारिक स्पष्टता ने उन्हें पार्टी नेतृत्व के भरोसेमंद नेताओं में शामिल किया है।
राजनीति के साथ-साथ सामाजिक जीवन में भी आचार्य डॉ. राहुल परमार की सक्रियता उल्लेखनीय रही है। शिक्षा, सामाजिक चेतना, युवाओं के मार्गदर्शन और वैचारिक विमर्श के माध्यम से वे लगातार समाज से जुड़े हुए हैं। उनका मानना है कि राजनीति केवल सत्ता का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने का सशक्त उपकरण है। इसी सोच के कारण वे सामाजिक मुद्दों पर भी निरंतर मुखर रहते हैं।
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा आम है कि जदयू के भीतर आचार्य डॉ. राहुल परमार एक ऐसे बौद्धिक नेता के रूप में उभर रहे हैं, जो आने वाले समय में पार्टी को वैचारिक रूप से और अधिक समृद्ध करने की क्षमता रखते हैं। संगठन, साहित्य और समाज—तीनों मोर्चों पर उनकी सक्रियता यह संकेत देती है कि बिहार की राजनीति में उनका कद आने वाले वर्षों में और ऊंचा हो सकता है।
संक्षेप में कहा जाए तो आचार्य डॉ. राहुल परमार आज उस नई पीढ़ी के नेताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो विचार और व्यवहार—दोनों को साथ लेकर चलने में विश्वास रखते हैं। यही वजह है कि वे बिहार की राजनीति में एक बड़े और स्थायी चेहरे के रूप में उभरते नजर आ रहे हैं।

