Thursday, March 12, 2026

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भाई राम–पवन का साधना–सेवा संकल्प, अध्यात्म और जनकल्याण के क्षेत्र में नई ऊर्जा का संचार

पटना।भारतीय सनातन सभ्यता, परम यथार्थ अध्यात्म और विश्वकल्याण के पुनरुत्थान के लिए समर्पित युगल युगपुरुष भाई राम–पवन (राम राष्ट्रीय–पवन पुरुषार्थी) बिना किसी तामझाम के दशकों से साधना, सेवा और शोध के पथ पर निरंतर अग्रसर हैं। मेडिकल और स्पिरिचुअल क्षेत्र से जुड़े रिसर्च स्कॉलर, आविष्कारक, आरोग्य एवं जनसेवा मिशन हॉस्पिटल के सफल संचालक, युवाशक्ति पत्र के संपादक तथा बॉम्बे फिल्म क्रिएशन से जुड़े भाई राम–पवन का जीवन अध्यात्म महाविज्ञान की साधना से निरंतर संवरता और संरक्षित होता रहा है। यही कारण है कि जनजीवन से जुड़े उनके दिव्य, अनुभूत और सन्दर्भित कार्य विराट स्वरूप में आकार ले सके हैं।

मानवता और विश्वकल्याण के उद्देश्य से वर्ष 2007 में ‘अध्यात्मा’ संस्थान की स्थापना कर उन्होंने क्रांतिकारी आध्यात्मिक ऑडियो–वीडियो प्रस्तुतियों के माध्यम से अध्यात्म के क्षेत्र में सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई। उनके संगीतमय सामाजिक संदेश को विख्यात टी-सीरीज ने लाखों लोगों तक पहुँचाया, वहीं आध्यात्मिक संदेशों को आस्था टीवी चैनल ने करोड़ों दर्शकों तक प्रसारित किया। इसी क्रम में अस्पताल परिसर में दोष प्रकोप जनित परेशानियों से राहत के लिए दुखहर्ता केंद्र के रूप में दोष प्रकोप उपचार एवं कल्याण संस्थान की शुरुआत हुई तथा परम कल्याणकारी ‘डिवाइन सॉल्वर किट’ का विशेष अन्वेषण किया गया। लोककल्याण के लिए उपयोगी जीवनग्रंथ ‘दर्शन’ की रचना भी इसी साधना–सेवा यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव रही, जिससे लाखों लोग लाभान्वित हुए। बाद में दिल्ली में ‘IMAGE’ नामक विश्वविद्यालयीय शिक्षण संस्थान की स्थापना कर शैक्षणिक क्षेत्र में भी योगदान दिया गया।

अब एक लंबे अंतराल के बाद भाई राम–पवन पुनः आध्यात्मिक मोटिवेशनल प्रस्तुतियों के साथ सक्रिय हुए हैं। ‘सम्पूट हनुमान चालीसा रामधुन’ के ऑडियो रूप ने अल्प समय में ही व्यापक प्रभाव डाला है। उनका अनुभव है कि इस धुन को कहीं भी, कभी भी सुनते या हृदय से गुनगुनाते हुए दोहराने से दुर्घटनाओं, अकालमृत्यु, आपदाओं, विघ्नों, संकटों, दुख, ऋण, रोग, शोक, भय और दरिद्रता का नाश होता है तथा सद्बुद्धि, विवेक, निर्भयता, आरोग्य, सुख, समृद्धि और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है। बीते तीन दिनों में दस हजार से अधिक लोगों द्वारा इससे लाभ लिए जाने का दावा किया गया है, जिससे उनका मनोबल और अधिक सुदृढ़ हुआ है। शीघ्र ही इसका वीडियो संस्करण भी आने वाला है। अध्यात्म, सेवा, शिक्षा और समाज के समन्वय से भाई राम–पवन की यह सतत यात्रा जनकल्याण के कारवां को निरंतर आगे बढ़ा रही है।

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भाई राम–पवन का साधना–सेवा संकल्प, अध्यात्म और जनकल्याण के क्षेत्र में नई ऊर्जा का संचार

पटना।भारतीय सनातन सभ्यता, परम यथार्थ अध्यात्म और विश्वकल्याण के पुनरुत्थान के लिए समर्पित युगल युगपुरुष भाई राम–पवन (राम राष्ट्रीय–पवन पुरुषार्थी) बिना किसी तामझाम के दशकों से साधना, सेवा और शोध के पथ पर निरंतर अग्रसर हैं। मेडिकल और स्पिरिचुअल क्षेत्र से जुड़े रिसर्च स्कॉलर, आविष्कारक, आरोग्य एवं जनसेवा मिशन हॉस्पिटल के सफल संचालक, युवाशक्ति पत्र के संपादक तथा बॉम्बे फिल्म क्रिएशन से जुड़े भाई राम–पवन का जीवन अध्यात्म महाविज्ञान की साधना से निरंतर संवरता और संरक्षित होता रहा है। यही कारण है कि जनजीवन से जुड़े उनके दिव्य, अनुभूत और सन्दर्भित कार्य विराट स्वरूप में आकार ले सके हैं।

मानवता और विश्वकल्याण के उद्देश्य से वर्ष 2007 में ‘अध्यात्मा’ संस्थान की स्थापना कर उन्होंने क्रांतिकारी आध्यात्मिक ऑडियो–वीडियो प्रस्तुतियों के माध्यम से अध्यात्म के क्षेत्र में सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई। उनके संगीतमय सामाजिक संदेश को विख्यात टी-सीरीज ने लाखों लोगों तक पहुँचाया, वहीं आध्यात्मिक संदेशों को आस्था टीवी चैनल ने करोड़ों दर्शकों तक प्रसारित किया। इसी क्रम में अस्पताल परिसर में दोष प्रकोप जनित परेशानियों से राहत के लिए दुखहर्ता केंद्र के रूप में दोष प्रकोप उपचार एवं कल्याण संस्थान की शुरुआत हुई तथा परम कल्याणकारी ‘डिवाइन सॉल्वर किट’ का विशेष अन्वेषण किया गया। लोककल्याण के लिए उपयोगी जीवनग्रंथ ‘दर्शन’ की रचना भी इसी साधना–सेवा यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव रही, जिससे लाखों लोग लाभान्वित हुए। बाद में दिल्ली में ‘IMAGE’ नामक विश्वविद्यालयीय शिक्षण संस्थान की स्थापना कर शैक्षणिक क्षेत्र में भी योगदान दिया गया।

अब एक लंबे अंतराल के बाद भाई राम–पवन पुनः आध्यात्मिक मोटिवेशनल प्रस्तुतियों के साथ सक्रिय हुए हैं। ‘सम्पूट हनुमान चालीसा रामधुन’ के ऑडियो रूप ने अल्प समय में ही व्यापक प्रभाव डाला है। उनका अनुभव है कि इस धुन को कहीं भी, कभी भी सुनते या हृदय से गुनगुनाते हुए दोहराने से दुर्घटनाओं, अकालमृत्यु, आपदाओं, विघ्नों, संकटों, दुख, ऋण, रोग, शोक, भय और दरिद्रता का नाश होता है तथा सद्बुद्धि, विवेक, निर्भयता, आरोग्य, सुख, समृद्धि और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है। बीते तीन दिनों में दस हजार से अधिक लोगों द्वारा इससे लाभ लिए जाने का दावा किया गया है, जिससे उनका मनोबल और अधिक सुदृढ़ हुआ है। शीघ्र ही इसका वीडियो संस्करण भी आने वाला है। अध्यात्म, सेवा, शिक्षा और समाज के समन्वय से भाई राम–पवन की यह सतत यात्रा जनकल्याण के कारवां को निरंतर आगे बढ़ा रही है।

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