बोधगया। पटना ।बिहार लोक भवन के दरबार हॉल में आज मगध विश्वविद्यालय, बोध गया की कॉफी टेबल बुक ‘सुनहरे कल की ओर’ का भव्य लोकार्पण समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता बिहार के राज्यपाल एवं विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति श्री आरिफ मोहम्मद खान ने की।
मंच पर मगध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. शशि प्रताप शाही के साथ दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. के. एन. सिंह, पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. उपेंद्र प्रसाद सिंह, राज्यपाल के प्रधान सचिव श्री रॉबर्ट एल. चोंगथू और पद्मश्री विमल कुमार जैन प्रमुख अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
बिहार सरकार के ग्रामीण कार्य विभाग के मंत्री डॉ. अशोक चौधरी और उद्योग एवं पथ निर्माण विभाग के मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जयसवाल भी अति विशिष्ट अतिथि के रूप में आमंत्रित थे, किंतु विधानसभा के विशेष कार्यों के कारण वे कार्यक्रम से पूर्व ही राज्यपाल से मिलकर शुभकामनाएं दे चुके थे, जिसकी जानकारी राज्यपाल ने सभी को दी।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुई। कुलपति प्रो. शशि प्रताप शाही ने माननीय राज्यपाल एवं अन्य अतिथियों का अंगवस्त्र, पौधा और चित्रकारी का स्मृति चिह्न प्रदान कर स्वागत किया। अपने स्वागत भाषण में उन्होंने बताया कि यह पुस्तक फरवरी 2023 से जनवरी 2026 तक मगध विश्वविद्यालय के ऐतिहासिक परिवर्तन और पुनर्जागरण की प्रेरक यात्रा को चित्रित करती है। लंबित शैक्षणिक सत्र, विलंबित परीक्षाएं, डिग्री-पेंशन समस्याएं, शोध एवं आधारभूत संरचना की कमी जैसी चुनौतियों को सशक्त नेतृत्व, राज्य सरकार के सहयोग और टीमवर्क से दूर किया गया।
समयबद्ध परीक्षाएं, दीक्षांत समारोह, लाखों डिग्रियों का डिजिटलीकरण, AI केंद्र की स्थापना, शोध-पेटेंट, अंतरराष्ट्रीय सहभागिता और व्यापक प्लेसमेंट जैसी उपलब्धियों ने विश्वविद्यालय को नई पहचान दी। डिजिटल सुविधाएं, पारदर्शी प्रशासन और सकारात्मक शैक्षणिक संस्कृति का विकास हुआ, जो इसे ‘विकसित भारत@2047’ के लक्ष्य की ओर अग्रसर आदर्श संस्थान बनाता है।
अपने उद्बोधन में राज्यपाल श्री आरिफ मोहम्मद खां ने प्रो. शाही एवं विश्वविद्यालय परिवार को बधाई दी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता शिक्षा और ज्ञान के महत्व को रेखांकित करती है। संस्थान इतना सशक्त होना चाहिए कि व्यक्ति को अनावश्यक मसीहाई महत्त्व न दिया जाए। गलत व्यक्ति के आने पर भी संस्थान मजबूत बना रहे। असली शिक्षा वही है जो मनुष्य को बंधनमुक्त करती है और जिज्ञासु बनाती है।
पुस्तक के संयोजक डॉ. परम प्रकाश राय ने संयोजकीय वक्तव्य में पुस्तक के चार अध्यायों की जानकारी दी और विश्वविद्यालय की चुनौतियों से शुरू हुई यात्रा के सुनहरे कल की ओर जाने की पीठिका पर प्रकाश डाला। कुलसचिव प्रो. बी. के. मंगलम ने बीज वक्तव्य में कुलपति के कुशल नेतृत्व और युवा टीम की सराहना की। उन्होंने गीता और कवि अज्ञेय का उद्धरण देते हुए कहा कि संघर्ष में ही व्यक्ति मोती की तरह निखरता है। उसे अपने कर्तव्य का निर्वाह युद्धक्षेत्र में खड़े अर्जुन से सीखना चाहिए।
प्रो. के. एन. सिंह ने कहा कि प्रो. शाही ने साबित किया है कि कार्य के लिए धन से अधिक ढंग की जरूरत होती है। पद्मश्री विमल कुमार जैन और प्रो. उपेंद्र प्रसाद सिंह ने भी कुलपति की उपलब्धियों की भूरि भूरि प्रशंसा की।
कार्यक्रम का मंच संचालन गृहविज्ञान विभाग की प्रभारी डॉ. दीपशिखा पांडेय ने किया। समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। इस अवसर पर मगध विश्वविद्यालय के मानविकी संकायाध्यक्ष प्रो. निभा सिंह, विज्ञान संकायाध्यक्ष प्रो. दिलीप केसरी, शिक्षा विभाग के निदेशक प्रो. सुशील कुमार सिंह, हिन्दी मगही विभागाध्यक्ष प्रो. आनन्द कुमार सिंह, वित्त पदाधिकारी, वित्त परामर्शी, परीक्षा नियंत्रक, पूर्व कुलपति प्रो. कुसुम कुमारी, जे.डी. विमेंस कॉलेज की प्राचार्या प्रो. आशा, ए. एन. कॉलेज से आए डॉ. अरुण कुमार, कॉफ़ी टेबल बुक की सह संयोजक डॉ. ममता मेहरा, डॉ. पूनम सिंह, सदस्य डॉ. शंकर शर्मा, डॉ. चंद्र प्रकाश, डॉ. वंदना कुमारी, डॉ. दिव्या मिश्रा, डॉ. राकेश कुमार रंजन, डॉ. धर्मेंद्र कुमार, शिक्षक डॉ. कुणाल किशोर सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, प्राचार्य, कर्मचारी, मीडियाकर्मी और छात्र उपस्थित रहे।

