By Malay Ojha | Published: 29 April 2026 at 08:08 AM
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बीच चुनावी माहौल में नया मोड़ आ गया है। सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर यूपी कैडर के चर्चित आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा को तत्काल चुनाव पर्यवेक्षक पद से हटाने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव कराने के अधिकार की रक्षा की मांग उठाई है।
मंगलवार देर रात दाखिल इस याचिका में संविधान के अनुच्छेद 32 का हवाला दिया गया है। याचिका में कहा गया है कि मतदाताओं को स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव मिलना उनका संवैधानिक अधिकार है, जिसकी रक्षा जरूरी है।
पर्यवेक्षक की भूमिका पर गंभीर सवाल
याचिका में आरोप लगाया गया है कि अजय पाल शर्मा ने चुनाव आयोग के पर्यवेक्षक के रूप में अपेक्षित निष्पक्षता नहीं बरती। दावा किया गया कि दक्षिण 24 परगना में तैनाती के दौरान उन्होंने कुछ राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों पर दबाव बनाया और डराने-धमकाने जैसी गतिविधियों में भूमिका निभाई।
चुनावी माहौल पर असर का आरोप
अर्जी में कहा गया है कि उनकी मौजूदगी से पश्चिम बंगाल का चुनावी माहौल प्रभावित हो रहा है। इससे विधानसभा चुनाव 2026 की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
बराबरी के अवसर पर चिंता
याचिकाकर्ता ने कहा कि लोकतंत्र में सभी दलों को बराबरी का अवसर मिलना जरूरी है। यदि चुनाव प्रक्रिया में किसी प्रकार का अनुचित प्रभाव पड़ता है तो लेवल प्लेइंग फील्ड खत्म हो जाती है, जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर होती है।
जनप्रतिनिधित्व कानून का भी जिक्र
याचिका में जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 का भी हवाला दिया गया है। इसमें कहा गया कि चुनाव पर्यवेक्षक की नियुक्ति इसलिए होती है ताकि मतदान प्रक्रिया पर स्वतंत्र निगरानी रखी जा सके। अगर पर्यवेक्षक ही विवादों में घिर जाए तो जनता का भरोसा कमजोर होता है।
अदालत से त्वरित सुनवाई की मांग
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से मामले का संज्ञान लेने और जरूरी निर्देश जारी करने की मांग की है। साथ ही पश्चिम बंगाल में जारी चुनाव प्रक्रिया को पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी बनाए रखने की अपील की गई है।
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