By Malay Ojha | Published: 12 July 2026 at 05:46 PM
देश में लोग सबसे ज्यादा किस सामान पर पैसा खर्च करते हैं, कौन-सी चीजें सबसे अधिक खरीदी जाती हैं और अलग-अलग राज्यों में खरीदारी का ट्रेंड कैसा है, इसका विस्तृत और आधिकारिक रिकॉर्ड तैयार करने की दिशा में केंद्र सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। सरकार देश का पहला रिटेल कंजम्प्शन सर्वे शुरू करने की तैयारी कर रही है। इस सर्वे के जरिए दुकानों से होने वाली वास्तविक बिक्री का डेटा जुटाया जाएगा, जिससे बाजार की मांग, महंगाई और उपभोक्ताओं की खरीदारी की आदतों की सटीक तस्वीर सामने आ सकेगी।
जानकारी के अनुसार, इस प्रस्तावित सर्वे को सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय कराने पर विचार कर रहा है। हालांकि सर्वे कब से शुरू होगा, इस पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। फिलहाल मंत्रालय इसके दायरे, प्रक्रिया और समय-सीमा को अंतिम रूप देने में जुटा है। सरकार का मानना है कि इससे देश के खुदरा बाजार की वास्तविक स्थिति समझने में बड़ी मदद मिलेगी।
किन दुकानों को किया जाएगा शामिल?
प्रस्तावित सर्वे में नेशनल इंडस्ट्रियल क्लासिफिकेशन के तहत आने वाले लगभग सभी प्रकार के खुदरा कारोबार शामिल किए जाएंगे। इसमें किराना दुकान, सुपरमार्केट, मेडिकल स्टोर, कपड़ों की दुकान, इलेक्ट्रॉनिक्स शोरूम, बर्तन की दुकान, मशीनरी स्टोर और अन्य रिटेल प्रतिष्ठानों से बिक्री का विवरण लिया जाएगा। इसका उद्देश्य यह जानना है कि किस इलाके में किस प्रकार के उत्पादों की मांग सबसे अधिक है।
कौन-कौन से सामान पर रहेगी नजर?
सर्वे में महंगे और टिकाऊ सामान जैसे टेलीविजन, फ्रिज, वॉशिंग मशीन जैसी वस्तुओं के साथ-साथ रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले खाद्यान्न, दवाइयां, कपड़े और अन्य जरूरी उत्पादों की बिक्री का भी रिकॉर्ड रखा जाएगा। इससे सरकार को यह समझने में आसानी होगी कि लोगों की खरीदारी की प्राथमिकताएं समय के साथ किस तरह बदल रही हैं।
मौजूदा सर्वे से कैसे अलग होगा?
यह सर्वे मौजूदा हाउसहोल्ड कंजम्प्शन एक्सपेंडिचर सर्वे से पूरी तरह अलग होगा। अभी होने वाले सर्वे में परिवारों द्वारा किसी अवधि के दौरान इस्तेमाल किए गए सामान का आकलन किया जाता है, जबकि नया रिटेल कंजम्प्शन सर्वे दुकानों से वास्तव में कितनी बिक्री हुई, उसका रिकॉर्ड तैयार करेगा।
आसान उदाहरण से समझिए
मान लीजिए किसी परिवार ने एक किलो चावल खरीदा, लेकिन महीने भर में केवल आधा किलो ही इस्तेमाल किया। मौजूदा सर्वे में आधा किलो की खपत दर्ज होगी, जबकि नए सर्वे में दुकान से बिके पूरे एक किलो चावल का रिकॉर्ड रखा जाएगा। इससे बाजार की वास्तविक मांग का अधिक सटीक अनुमान लगाया जा सकेगा और उत्पादन से लेकर सप्लाई तक की बेहतर योजना बनाई जा सकेगी।
डिजिटल भुगतान से भी मिले हैं बड़े संकेत
देश में डिजिटल भुगतान तेजी से बढ़ा है और इससे उपभोक्ताओं की खरीदारी का रुझान भी साफ दिखाई देता है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जून महीने में केवल किराना और सुपरमार्केट में ही करीब 79 हजार करोड़ रुपये से अधिक के डिजिटल लेनदेन दर्ज किए गए।
इसी अवधि में मेडिकल स्टोर और फार्मेसी में लगभग 12 हजार करोड़ रुपये, पुरुष और महिलाओं के कपड़ों की दुकानों में करीब 11 हजार करोड़ रुपये तथा फैमिली क्लोदिंग स्टोर में सात हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के डिजिटल भुगतान हुए। ये आंकड़े बताते हैं कि देश का खुदरा बाजार लगातार मजबूत बना हुआ है और उपभोक्ता खर्च में स्थिरता बनी हुई है।
सरकार और कारोबारियों को क्या होगा फायदा?
विशेषज्ञों का कहना है कि इस सर्वे से सरकार को उपभोक्ता मांग, महंगाई, उत्पादन और सप्लाई चेन से जुड़े फैसले लेने में अधिक सटीक जानकारी मिलेगी। वहीं उद्योग जगत और कारोबारियों को भी यह समझने में आसानी होगी कि किस क्षेत्र में कौन-से उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है। इससे निवेश, उत्पादन और कारोबार की रणनीति तैयार करने में मदद मिलेगी।
भविष्य की नीतियों में भी होगा इस्तेमाल
मंत्रालय की योजना है कि सर्वे से प्राप्त आंकड़ों को सरकारी रिकॉर्ड, प्रशासनिक डेटा और नई तकनीकों के साथ जोड़कर अधिक भरोसेमंद आधिकारिक आंकड़े तैयार किए जाएं। इन आंकड़ों के आधार पर भविष्य की आर्थिक नीतियां, विकास योजनाएं और कल्याणकारी कार्यक्रम अधिक प्रभावी ढंग से तैयार किए जा सकेंगे।
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