एक ही झटके में 6 करोड़ नाम वोटर लिस्ट से बाहर! चुनाव आयोग ने जारी की ड्राफ्ट सूची, अब मिलेगा आखिरी मौका

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मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान के तहत चुनाव आयोग की नई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट
विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के तहत कई राज्यों में लाखों नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची से बाहर हुए।

By Malay Ojha | Published: 06 July 2026 at 03:07 PM

देशभर में चल रहे मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान के बीच चुनाव आयोग ने बड़ा कदम उठाया है। अब तक 13 राज्यों में करीब 6 करोड़ लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा चुके हैं। वहीं ओडिशा, मणिपुर, मिजोरम और सिक्किम की ड्राफ्ट मतदाता सूची भी जारी कर दी गई है, जिसमें 22 लाख से ज्यादा नाम नहीं हैं। हालांकि आयोग ने साफ किया है कि जिन लोगों के नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं हैं, उन्हें दोबारा अपना नाम जुड़वाने का एक और मौका मिलेगा।

चुनाव आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के तहत ओडिशा, मणिपुर, मिजोरम और सिक्किम की ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी कर दी है। आयोग के मुताबिक इन चारों राज्यों में 22 लाख से अधिक लोगों के नाम फिलहाल सूची में शामिल नहीं हैं। यह अंतिम सूची नहीं है, इसलिए जिन लोगों के नाम हटे हैं, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत दावा और आपत्ति दाखिल कर अपना नाम फिर से जुड़वा सकते हैं।

13 राज्यों में करीब 6 करोड़ नाम हटाए जा चुके
मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण अभियान के दौरान कई राज्यों में बड़ी संख्या में नाम हटाए गए हैं। सबसे ज्यादा चर्चा बिहार की रही, जहां करीब 65 लाख मतदाताओं के नाम सूची से बाहर किए गए। इसके बाद पश्चिम बंगाल में लगभग 37 लाख और उत्तर प्रदेश में करीब 25 लाख नाम हटाए गए। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार अब तक 13 राज्यों में कुल मिलाकर लगभग 6 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा चुके हैं।

16 राज्य और 4 केंद्र शासित प्रदेशों में अभी भी चल रहा अभियान
मतदाता सूची को अपडेट करने का अभियान अभी खत्म नहीं हुआ है। चुनाव आयोग इस समय 16 राज्यों और चार केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष गहन पुनरीक्षण चला रहा है।
इन राज्यों में आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, ओडिशा, पंजाब, सिक्किम, त्रिपुरा, तेलंगाना और उत्तराखंड शामिल हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली, चंडीगढ़, दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव में भी यह प्रक्रिया जारी है।

क्या है विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान?
विशेष गहन पुनरीक्षण का मकसद मतदाता सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाना है। इसके तहत यह जांच की जाती है कि सूची में दर्ज मतदाता वास्तव में पात्र हैं या नहीं। यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु हो चुकी है, वह दूसरे स्थान पर स्थानांतरित हो गया है या अन्य कारणों से पात्र नहीं है, तो उसका नाम सूची से हटाया जा सकता है। आयोग का कहना है कि पूरी प्रक्रिया तय नियमों के तहत की जा रही है और अंतिम सूची जारी होने से पहले सभी पात्र लोगों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा।

पिछले साल शुरू हुआ था अभियान
यह विशेष अभियान पिछले वर्ष जून में शुरू किया गया था। इसके तहत पहले बिहार, पश्चिम बंगाल, असम और उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों में मतदाता सूची का व्यापक सत्यापन किया गया। अब अभियान दूसरे राज्यों में भी जारी है और चरणबद्ध तरीके से नई मतदाता सूची तैयार की जा रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने आयोग के अधिकार को माना वैध
मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए मई 2026 में सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने चुनाव आयोग की इस प्रक्रिया को वैध माना था। अदालत ने कहा था कि चुनाव आयोग को मतदाता सूची का पुनरीक्षण करने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है और वह आवश्यक होने पर इस तरह का अभियान चला सकता है।

विपक्ष ने उठाए पारदर्शिता पर सवाल
हालांकि इस अभियान को लेकर राजनीतिक विवाद भी जारी है। हाल ही में विपक्षी दलों के गठबंधन में शामिल 23 राजनीतिक दलों ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का आरोप है कि विशेष गहन पुनरीक्षण पूरी तरह पारदर्शी तरीके से नहीं किया जा रहा और कई जगह मनमाने ढंग से नाम हटाए जा रहे हैं। दूसरी ओर चुनाव आयोग का कहना है कि सभी दावों और आपत्तियों का नियमानुसार निपटारा किया जाएगा और पात्र मतदाताओं के अधिकार सुरक्षित रहेंगे।

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