बिहार में सम्राट चौधरी सरकार ने गुरुवार को मंत्रिमंडल का विस्तार कर राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी। इस विस्तार में सामाजिक और जातीय संतुलन का खास ध्यान रखा गया है। सरकार ने अलग-अलग वर्गों को प्रतिनिधित्व देकर बड़ा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है।
नई कैबिनेट में पिछड़ा वर्ग, अगड़ा वर्ग, दलित और अल्पसंख्यक समाज के नेताओं को शामिल किया गया है। मुख्यमंत्री समेत कई मंत्री पिछड़ा वर्ग से बनाए गए हैं, जबकि अगड़ा समाज को भी बड़ी हिस्सेदारी दी गई है। अल्पसंख्यक समाज से जमा खान को मंत्री पद मिला है।
22 दिन बाद हुआ मंत्रिमंडल विस्तार
मुख्यमंत्री बनने के करीब 22 दिन बाद सम्राट चौधरी ने अपनी कैबिनेट का विस्तार किया। शपथ ग्रहण समारोह काफी भव्य रहा, जिसमें देश के कई बड़े नेता शामिल हुए। राजनीतिक दृष्टि से इसे बिहार की नई सत्ता संरचना का अहम कदम माना जा रहा है।
निशांत कुमार की एंट्री बनी चर्चा का केंद्र
पूर्व मुख्यमंत्री Nitish Kumar के बेटे Nishant Kumar को मंत्री बनाए जाने की सबसे ज्यादा चर्चा रही। कुछ महीने पहले ही सक्रिय राजनीति में आए निशांत कुमार ने मंत्री पद की शपथ लेने के बाद मंच पर अपने पिता का आशीर्वाद लिया।
कई पुराने नेताओं का कटा पत्ता
कैबिनेट विस्तार में कई मौजूदा मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखाया गया है। सबसे ज्यादा चर्चा वरिष्ठ नेता Mangal Pandey को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने को लेकर हो रही है। इससे राज्य की राजनीति में नए समीकरण बनने के संकेत मिल रहे हैं।
किन दलों को मिला कितना प्रतिनिधित्व
मंत्रिमंडल विस्तार में भारतीय जनता पार्टी के सबसे ज्यादा नेताओं को जगह मिली है। वहीं जनता दल यूनाइटेड के कई नेताओं ने भी मंत्री पद की शपथ ली। इसके अलावा लोक जनशक्ति पार्टी और हम पार्टी के नेताओं को भी कैबिनेट में शामिल किया गया है।
बिहार की राजनीति में नए संकेत
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कैबिनेट विस्तार आने वाले चुनावों को ध्यान में रखकर किया गया है। सरकार ने युवा चेहरों और सामाजिक संतुलन के जरिए अलग-अलग वर्गों को साधने की कोशिश की है।

