
By Malay Ojha | Published: 06 July 2026 at 05:16 PM
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित गड़बड़ी के मामले में बड़ा फैसला सामने आया है। राम मंदिर ट्रस्ट की अहम बैठक में महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा का इस्तीफा मंजूर कर लिया गया। दोनों ने पहले ही जांच शुरू होने के बाद अपने पद छोड़ दिए थे। अब ट्रस्ट ने आधिकारिक तौर पर उनके इस्तीफे स्वीकार कर लिए हैं। इस फैसले को श्रद्धालुओं का भरोसा बनाए रखने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
सोमवार को दोपहर तीन बजे महंत नृत्य गोपाल दास की अध्यक्षता में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक शुरू हुई। बैठक का सबसे अहम एजेंडा चढ़ावा चोरी मामले के बाद पैदा हुई स्थिति और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर चर्चा था। विचार-विमर्श के बाद महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा का इस्तीफा सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया।
आस्था पर उठे सवाल, भरोसा लौटाने की कोशिश
ट्रस्ट से जुड़े सदस्यों का मानना है कि इस पूरे घटनाक्रम से करोड़ों राम भक्तों की भावनाएं आहत हुई हैं। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि मंदिर जैसी आस्था से जुड़ी संस्था में पारदर्शिता सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। इसी वजह से संगठन में बदलाव कर लोगों का विश्वास दोबारा मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।
महंत नृत्य गोपाल दास ने जताया दुख
बैठक की शुरुआत में ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने पूरे मामले पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि यह केवल प्रशासनिक मामला नहीं बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा विषय है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए और किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
कोषाध्यक्ष ने माना, व्यवस्था में रह गई थीं कमियां
बैठक के दौरान कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी ने इस्तीफों पर विचार रखने के साथ-साथ यह भी स्वीकार किया कि व्यवस्था में कुछ कमियां रह गई थीं, जिन पर समय रहते पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए निगरानी व्यवस्था और मजबूत की जाएगी।
एफआईआर क्यों कराई गई, ट्रस्ट ने दिया जवाब
ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन ने बताया कि शुरुआती जांच में अनियमितताओं के संकेत मिलने के बाद ही प्राथमिकी दर्ज कराने का फैसला लिया गया। उनके अनुसार, उपलब्ध तथ्यों के आधार पर कानूनी कार्रवाई जरूरी थी ताकि जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ सके। उन्होंने कहा कि जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए पारदर्शी कार्रवाई सबसे जरूरी है।
संतों ने कहा- आस्था से जुड़े मामलों में कोई समझौता नहीं
बैठक में मौजूद स्वामी परमानंद गिरी समेत अन्य संतों ने कहा कि धार्मिक संस्थाओं की सबसे बड़ी पूंजी लोगों का विश्वास होता है। जब श्रद्धालु अपनी आस्था और मेहनत की कमाई मंदिर में अर्पित करते हैं तो उसकी सुरक्षा और पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करना ट्रस्ट की पहली जिम्मेदारी है। उन्होंने भविष्य में अधिक सतर्कता बरतने की जरूरत पर जोर दिया।
अब कौन संभालेगा जिम्मेदारी?
ट्रस्ट से जुड़े सूत्रों के मुताबिक महासचिव पद के लिए विश्व हिंदू परिषद से जुड़े बजरंग बागड़ा का नाम सबसे आगे माना जा रहा है। वहीं ट्रस्टी के खाली हुए पद पर नीरज दौनेरिया को जिम्मेदारी मिलने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि इन नियुक्तियों पर अंतिम फैसला अभी बाकी है।
ट्रस्ट की मौजूदा स्थिति क्या है?
राम मंदिर ट्रस्ट में नियमित रूप से 11 सदस्य शामिल हैं। इनमें महंत नृत्य गोपाल दास, वासुदेवानंद सरस्वती, विश्वप्रसन्न तीर्थ, स्वामी परमानंद गिरी, गोविंद देव गिरी, कृष्ण मोहन, दिनेन्द्र दास और के. परासरन प्रमुख हैं। चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार होने तथा बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्रा के निधन के बाद ट्रस्ट में रिक्तियां बढ़ गई हैं। फिलहाल उपाध्यक्ष का पद भी खाली है, जिससे अध्यक्ष की अनुपस्थिति में बैठकों के संचालन को लेकर भी नए फैसले की जरूरत महसूस की जा रही है।
आगे की जांच पर रहेगी सबकी नजर
चढ़ावा चोरी मामले की जांच अभी जारी है। जांच एजेंसियों की रिपोर्ट आने के बाद यह साफ होगा कि कथित गड़बड़ी के लिए कौन जिम्मेदार था और आगे क्या कार्रवाई होगी। फिलहाल ट्रस्ट ने साफ संदेश देने की कोशिश की है कि आस्था से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
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