बिहार की राजनीति में नए समीकरण बनने के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी लगातार चर्चा के केंद्र में बने हुए हैं। इसी बीच राष्ट्रीय स्तर पर पहचान रखने वाले लेखक, ज्योतिषाचार्य और शिक्षाविद आचार्य डॉ. राहुल परमार की पुस्तक “सनातनीय सम्राट का युगारंभ” को लेकर राजनीतिक और बौद्धिक जगत में नई बहस शुरू हो गई है।
इस पुस्तक में बिहार की सांस्कृतिक विरासत, विकास की नई सोच और सम्राट चौधरी के राजनीतिक व्यक्तित्व को विस्तार से प्रस्तुत किया गया है। लेखक ने “संस्कृति से समृद्धि और संकल्प से विकास” को पुस्तक का मूल संदेश बताया है। माना जा रहा है कि किताब के जरिए बिहार की बदलती राजनीतिक दिशा को नए नजरिए से समझाने की कोशिश की गई है।
भविष्यवाणी को लेकर फिर तेज हुई चर्चा
आचार्य राहुल परमार उस समय भी चर्चा में आए थे, जब उन्होंने ज्योतिषीय गणना के आधार पर सार्वजनिक रूप से दावा किया था कि सम्राट चौधरी बिहार के मुख्यमंत्री बनेंगे। अब मुख्यमंत्री बनने के बाद उनकी वही भविष्यवाणी फिर से राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है। इसी वजह से पुस्तक को लेकर लोगों की दिलचस्पी भी लगातार बढ़ रही है।
शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्र में सक्रिय हैं आचार्य राहुल परमार
आचार्य राहुल परमार कई विश्वविद्यालयों में एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। शिक्षा, भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विषयों पर उनकी गहरी पकड़ मानी जाती है। इसके साथ ही वे भोजपुरी भाषा और संस्कृति के संरक्षण को लेकर भी लंबे समय से सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। विभिन्न मंचों के जरिए उन्होंने भोजपुरी साहित्य को नई पहचान दिलाने की दिशा में काम किया है।
राजनीतिक दस्तावेज के रूप में देखी जा रही पुस्तक
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि “सनातनीय सम्राट का युगारंभ” केवल किसी नेता के व्यक्तित्व पर आधारित पुस्तक नहीं है, बल्कि यह बिहार की सांस्कृतिक और वैचारिक राजनीति को समझने का भी एक महत्वपूर्ण दस्तावेज बन सकती है। यही वजह है कि शिक्षाविदों, सामाजिक संगठनों और बुद्धिजीवियों के बीच इस पुस्तक को लेकर लगातार चर्चा हो रही है।

