By Malay Ojha | Published: 25 August 2026 at 01:05 PM
पटना में मंगलवार को बिहार की प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का बड़ा आंदोलन देखने को मिला। गांधी मैदान के गेट संख्या-10 से मुख्यमंत्री आवास की ओर निकले छात्रों के मार्च को पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर रोकने की कोशिश की। प्रदर्शनकारियों के आगे बढ़ने पर कई जगह तनाव की स्थिति बनी और पुलिस ने पानी की बौछार तथा लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया। छात्रों की मुख्य मांग 70वीं बिहार लोक सेवा आयोग परीक्षा रद्द करने और शिक्षक भर्ती परीक्षा की प्रक्रिया में बदलाव की है।
मार्च में शामिल छात्रों का कहना था कि वे अपनी मांगों को मुख्यमंत्री तक पहुंचाने के लिए शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ रहे थे। गांधी मैदान से शुरू हुआ मार्च आगे बढ़ते हुए प्रतिबंधित क्षेत्र की ओर पहुंचा, जहां पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बैरिकेडिंग की थी। कुछ स्थानों पर छात्रों ने बैरिकेडिंग पार करने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बनी।
लाठीचार्ज से बढ़ा तनाव
पुलिस की ओर से प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पानी की तेज बौछार की गई। इसके बाद लाठीचार्ज किए जाने की भी खबर सामने आई। कुछ छात्रों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी भी सामने आई है। अलग-अलग समाचार रिपोर्टों में डाक बंगला चौराहे और आसपास के इलाकों में स्थिति तनावपूर्ण होने की बात कही गई है।
70वीं BPSC परीक्षा रद्द करने की मांग
आंदोलन कर रहे छात्रों की प्रमुख मांग 70वीं बिहार लोक सेवा आयोग परीक्षा को रद्द करने की है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि परीक्षा प्रक्रिया को लेकर लंबे समय से सवाल उठ रहे हैं और कथित अनियमितताओं के कारण अभ्यर्थियों का भरोसा प्रभावित हुआ है। इसी वजह से छात्र दोबारा परीक्षा कराने और पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की मांग कर रहे हैं। हालांकि परीक्षा रद्द करने को लेकर सरकार की ओर से फिलहाल कोई अंतिम फैसला सामने नहीं आया है।
शिक्षक भर्ती परीक्षा को लेकर भी नाराजगी
छात्रों के आंदोलन का दूसरा बड़ा मुद्दा शिक्षक भर्ती परीक्षा की प्रक्रिया है। प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि शिक्षक भर्ती के लिए एक ही चरण में परीक्षा आयोजित की जाए। इसके साथ ही परीक्षा व्यवस्था में नकारात्मक अंक देने की व्यवस्था को लेकर भी अभ्यर्थियों की आपत्ति है। शिक्षक भर्ती परीक्षा के स्वरूप को लेकर अभ्यर्थियों के बीच लगातार असंतोष बना हुआ है। दूसरी ओर आयोग ने हाल में स्पष्ट किया है कि परीक्षा के स्वरूप में बदलाव नहीं किया गया है।
भूख हड़ताल कर रहे छात्र नेता भी मार्च में शामिल
मार्च में पिछले दो दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे आइसा नेताओं मनीषा, सोनू फरनाज और आदर्श के भी शामिल होने की बात संगठन की ओर से कही गई। आंदोलनकारियों का कहना है कि परीक्षा और भर्ती व्यवस्था में बार-बार सामने आने वाली समस्याओं ने युवाओं के बीच गहरी नाराजगी पैदा की है। उनका कहना है कि प्रतियोगी परीक्षा केवल एक परीक्षा नहीं होती, बल्कि हजारों परिवारों के भविष्य और वर्षों की मेहनत से जुड़ी होती है।
कई छात्र संगठनों ने मिलकर निकाला मार्च
इस प्रदर्शन में आइसा के साथ छात्र राजद, युवा संगठनों और एसएफआई सहित कई छात्र संगठनों के कार्यकर्ता शामिल हुए। मार्च का नेतृत्व आइसा बिहार के राज्य अध्यक्ष धनंजय, राज्य सचिव दीपांकर, राज्य उपाध्यक्ष सबा आफरीन, छात्र राजद के प्रधान महासचिव अकरम खान, युवा संगठन के राज्य अध्यक्ष शम्भुदेवा, डीवाईएफआई के केंद्रीय समिति सदस्य मनोज कुमार चंद्रवंशी सहित अन्य नेताओं ने किया। प्रदर्शन में आसिफ अली, उमेश शर्मा, अमरेन्द्र चौबे, कांति कुमारी, देवदत्त कुमार और जय प्रकाश समेत कई कार्यकर्ताओं की मौजूदगी रही।
आंदोलन में बड़ी संख्या में छात्र पहुंचे
आयोजकों के अनुसार मार्च में बड़ी संख्या में छात्र और प्रतियोगी परीक्षा के अभ्यर्थी शामिल हुए। आइसा के नीतीश, साहिल, वर्षा, छोटी, नीतू, आशीष, राहुल, विवेक आनंद सुंदर, आजाद और रजनीश के साथ युवा संगठन के नेता अखिलेश भी मार्च में मौजूद रहे। छात्रों का कहना था कि अलग-अलग परीक्षाओं को लेकर सामने आ रही शिकायतों को केवल आश्वासन से खत्म नहीं किया जा सकता। उनके मुताबिक भर्ती प्रक्रिया में स्पष्ट नियम और समयबद्ध व्यवस्था जरूरी है।
परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग
छात्र संगठनों ने सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में नियमितता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग उठाई। उनका कहना है कि परीक्षा की तारीख, परीक्षा केंद्र, परिणाम और भर्ती की पूरी प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थियों को पहले से स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए। छात्रों की मांग है कि लंबित परीक्षाओं का समयबद्ध कार्यक्रम जारी किया जाए और किसी भी स्तर पर गड़बड़ी सामने आने पर जिम्मेदारी तय की जाए।
सरकार के सामने छात्रों की नाराजगी बड़ी चुनौती
पिछले कुछ समय से बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं और सरकारी भर्तियों को लेकर छात्रों का असंतोष लगातार सामने आता रहा है। 70वीं बिहार लोक सेवा आयोग परीक्षा से जुड़े विवाद के साथ शिक्षक भर्ती परीक्षा की प्रक्रिया को लेकर भी अभ्यर्थी आंदोलन कर रहे हैं। मंगलवार को पटना की सड़कों पर बड़ी संख्या में छात्रों के उतरने और पुलिस कार्रवाई के बाद यह मुद्दा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है।
आइसा ने आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया
आइसा ने कहा है कि छात्रों की मांगों पर ठोस कार्रवाई होने तक आंदोलन जारी रहेगा। संगठन का कहना है कि छात्रों की मांग किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि परीक्षा व्यवस्था में भरोसा बहाल करने से जुड़ी है। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से बातचीत के जरिए समाधान निकालने और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों पर स्पष्ट निर्णय लेने की मांग की है। फिलहाल पटना में हुए इस प्रदर्शन के बाद सरकार और छात्रों के बीच आगे की बातचीत पर सबकी नजर है। 
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