National

spot_img

Durga Ashtami 2026: दुर्गा अष्टमी पर हलवा-पूरी और काले चने का भोग क्यों लगता है? जानें धार्मिक महत्व

By Malay Ojha | Published: 14 October 2026 at 12:56 PM

शारदीय नवरात्रि में दुर्गा अष्टमी का दिन मां दुर्गा की पूजा और कन्या पूजन के लिए बेहद खास माना जाता है। इस दिन घरों और मंदिरों में मां को सूजी के हलवे, पूरी और काले चने का भोग लगाया जाता है। इसके बाद कन्याओं को भोजन कराकर उनका आशीर्वाद लिया जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अष्टमी की पूजा में इसी खास प्रसाद को इतनी अहमियत क्यों दी जाती है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हलवा, पूरी और काले चने का भोग मां दुर्गा को समर्पित करने से भक्तों को सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। नवरात्रि के दौरान व्रत रखने वाले श्रद्धालु अष्टमी या नवमी के दिन पूजा के बाद कन्या पूजन करते हैं। इस दौरान छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनके पैर धोए जाते हैं, तिलक लगाया जाता है और श्रद्धापूर्वक भोजन कराया जाता है। हलवा, पूरी और चने इसी परंपरा का प्रमुख हिस्सा हैं।

कन्या पूजन में भी प्रसाद का विशेष महत्व
नवरात्रि में कन्या पूजन को शक्ति की उपासना का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। मान्यता है कि कन्याओं को भोजन कराने और उन्हें उपहार देने से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं। इसी वजह से कई घरों में अष्टमी के दिन सुबह से ही हलवा, पूरी और काले चने बनाने की तैयारी शुरू हो जाती है। पहले देवी को भोग लगाया जाता है, फिर कन्याओं को भोजन कराया जाता है और अंत में परिवार के लोग प्रसाद ग्रहण करते हैं।

हलवा, पूरी और चने के पीछे क्या है पोषण का तर्क?
इस पारंपरिक भोजन का महत्व केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है। काले चने प्रोटीन, फाइबर और कई जरूरी पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत हैं। सूजी से बने हलवे में कार्बोहाइड्रेट होता है, जो शरीर को ऊर्जा देता है। वहीं पूरी भी शरीर को कैलोरी प्रदान करती है। इस तरह यह भोजन ऊर्जा और पोषण देने में मदद कर सकता है।

हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि हलवा-पूरी और चने हर व्यक्ति के लिए सबसे हल्का या आसानी से पचने वाला भोजन है। लंबे समय तक उपवास के बाद भोजन सीमित मात्रा में करना और पर्याप्त पानी पीना बेहतर रहता है। जिन लोगों को डायबिटीज या पाचन संबंधी परेशानी है, उन्हें अपनी सेहत के अनुसार भोजन चुनना चाहिए।

अष्टमी पर भोग लगाते समय इन बातों का रखें ध्यान
मां दुर्गा को भोग अर्पित करते समय साफ-सफाई और शुद्धता का ध्यान रखा जाता है। घरों में हलवा, पूरी और चने श्रद्धा के साथ तैयार किए जाते हैं। इसके बाद पूजा करके प्रसाद बांटा जाता है। धार्मिक मान्यताओं में इस परंपरा को भक्ति, सेवा और कन्याओं के सम्मान से जोड़कर देखा जाता है।

दुर्गा अष्टमी पर हलवा-पूरी और काले चने का भोग लगाने की परंपरा इसी आस्था और सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है। भक्तों के लिए यह मां दुर्गा की आराधना के साथ परिवार और समाज में सुख-समृद्धि की कामना करने का भी अवसर है।

📢 बड़ी खबर आते ही सबसे पहले जानना चाहते हैं?
Aryavarta Live के WhatsApp Channel से जुड़ें और हर महत्वपूर्ण अपडेट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।

WhatsApp चैनल जॉइन करें
Breaking Hindi News और ताज़ा अपडेट्स पाएं सबसे पहले Aryavarta Live पर। यहां आपको भारत, पाकिस्तान, अमेरिका समेत दुनिया भर की महत्वपूर्ण खबरें मिलेंगी। खेल, मनोरंजन, व्यापार, टेक्नोलॉजी, क्राइम, उत्तर प्रदेश और बिहार की हर बड़ी खबर पढ़ने के लिए जुड़े रहें Aryavarta Live के साथ।

International

spot_img

Durga Ashtami 2026: दुर्गा अष्टमी पर हलवा-पूरी और काले चने का भोग क्यों लगता है? जानें धार्मिक महत्व

By Malay Ojha | Published: 14 October 2026 at 12:56 PM

शारदीय नवरात्रि में दुर्गा अष्टमी का दिन मां दुर्गा की पूजा और कन्या पूजन के लिए बेहद खास माना जाता है। इस दिन घरों और मंदिरों में मां को सूजी के हलवे, पूरी और काले चने का भोग लगाया जाता है। इसके बाद कन्याओं को भोजन कराकर उनका आशीर्वाद लिया जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अष्टमी की पूजा में इसी खास प्रसाद को इतनी अहमियत क्यों दी जाती है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हलवा, पूरी और काले चने का भोग मां दुर्गा को समर्पित करने से भक्तों को सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। नवरात्रि के दौरान व्रत रखने वाले श्रद्धालु अष्टमी या नवमी के दिन पूजा के बाद कन्या पूजन करते हैं। इस दौरान छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनके पैर धोए जाते हैं, तिलक लगाया जाता है और श्रद्धापूर्वक भोजन कराया जाता है। हलवा, पूरी और चने इसी परंपरा का प्रमुख हिस्सा हैं।

कन्या पूजन में भी प्रसाद का विशेष महत्व
नवरात्रि में कन्या पूजन को शक्ति की उपासना का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। मान्यता है कि कन्याओं को भोजन कराने और उन्हें उपहार देने से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं। इसी वजह से कई घरों में अष्टमी के दिन सुबह से ही हलवा, पूरी और काले चने बनाने की तैयारी शुरू हो जाती है। पहले देवी को भोग लगाया जाता है, फिर कन्याओं को भोजन कराया जाता है और अंत में परिवार के लोग प्रसाद ग्रहण करते हैं।

हलवा, पूरी और चने के पीछे क्या है पोषण का तर्क?
इस पारंपरिक भोजन का महत्व केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है। काले चने प्रोटीन, फाइबर और कई जरूरी पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत हैं। सूजी से बने हलवे में कार्बोहाइड्रेट होता है, जो शरीर को ऊर्जा देता है। वहीं पूरी भी शरीर को कैलोरी प्रदान करती है। इस तरह यह भोजन ऊर्जा और पोषण देने में मदद कर सकता है।

हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि हलवा-पूरी और चने हर व्यक्ति के लिए सबसे हल्का या आसानी से पचने वाला भोजन है। लंबे समय तक उपवास के बाद भोजन सीमित मात्रा में करना और पर्याप्त पानी पीना बेहतर रहता है। जिन लोगों को डायबिटीज या पाचन संबंधी परेशानी है, उन्हें अपनी सेहत के अनुसार भोजन चुनना चाहिए।

अष्टमी पर भोग लगाते समय इन बातों का रखें ध्यान
मां दुर्गा को भोग अर्पित करते समय साफ-सफाई और शुद्धता का ध्यान रखा जाता है। घरों में हलवा, पूरी और चने श्रद्धा के साथ तैयार किए जाते हैं। इसके बाद पूजा करके प्रसाद बांटा जाता है। धार्मिक मान्यताओं में इस परंपरा को भक्ति, सेवा और कन्याओं के सम्मान से जोड़कर देखा जाता है।

दुर्गा अष्टमी पर हलवा-पूरी और काले चने का भोग लगाने की परंपरा इसी आस्था और सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है। भक्तों के लिए यह मां दुर्गा की आराधना के साथ परिवार और समाज में सुख-समृद्धि की कामना करने का भी अवसर है।

📢 बड़ी खबर आते ही सबसे पहले जानना चाहते हैं?
Aryavarta Live के WhatsApp Channel से जुड़ें और हर महत्वपूर्ण अपडेट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।

WhatsApp चैनल जॉइन करें
Breaking Hindi News और ताज़ा अपडेट्स पाएं सबसे पहले Aryavarta Live पर। यहां आपको भारत, पाकिस्तान, अमेरिका समेत दुनिया भर की महत्वपूर्ण खबरें मिलेंगी। खेल, मनोरंजन, व्यापार, टेक्नोलॉजी, क्राइम, उत्तर प्रदेश और बिहार की हर बड़ी खबर पढ़ने के लिए जुड़े रहें Aryavarta Live के साथ।

National

spot_img

International

spot_img
RELATED ARTICLES