By Malay Ojha | Published: 15 October 2026 at 06:43 PM
पटना। दिल के एक गंभीर रोग में अब मरीजों को ओपन हार्ट सर्जरी से बचाने में आधुनिक तकनीक मदद कर रही है। पटना के फोर्ड हॉस्पिटल में पिछले आठ महीनों के दौरान एओर्टिक वाल्व की गंभीर बीमारी से पीड़ित छह मरीजों का TAVI (ट्रांसकैथेटर एओर्टिक वाल्व इंप्लांटेशन) तकनीक से सफल इलाज किया गया है। खास तौर पर उन मरीजों के लिए यह प्रक्रिया उपयोगी विकल्प बन रही है, जिनके लिए पारंपरिक सर्जरी में जोखिम अधिक होता है।
बिना बड़े चीरे के बदला जाता है खराब वाल्व
TAVI एक आधुनिक और कम इनवेसिव प्रक्रिया है, जिसमें छाती खोलकर ऑपरेशन करने के बजाय कैथेटर की मदद से खराब एओर्टिक वाल्व की जगह कृत्रिम वाल्व लगाया जाता है। आम तौर पर कैथेटर को पैर की धमनी के रास्ते हृदय तक पहुंचाया जाता है। इस तरीके से ओपन हार्ट सर्जरी और बड़े चीरे की जरूरत से बचा जा सकता है।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम कर रही इलाज
फोर्ड हॉस्पिटल में इस प्रक्रिया के जरिए मरीजों का इलाज सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. सुशांत कुमार पाठक, डीएम कार्डियोलॉजी डॉ. सरोज कुमार मिश्रा और तकनीशियन कमल की टीम कर रही है। अस्पताल में पिछले आठ महीनों में छह मरीजों का सफल उपचार इस तकनीक से किया जा चुका है।
इलाज के बाद जल्द सामान्य दिनचर्या में लौटने की उम्मीद
अस्पताल के निदेशक और कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. बीबी भारती के मुताबिक, TAVI के बाद मरीज अपेक्षाकृत कम समय में अपनी सामान्य गतिविधियां शुरू कर सकते हैं। हालांकि, इलाज का परिणाम मरीज की सेहत और बीमारी की गंभीरता पर निर्भर करता है। इस प्रक्रिया से पहले मरीज की विस्तृत जांच की जाती है और सर्जरी से जुड़े जोखिम का आकलन किया जाता है।
मरीज की स्थिति के आधार पर तय होता है इलाज
डॉ. भारती ने बताया कि आधुनिक तकनीक के जरिए हृदय रोगियों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराना अस्पताल की प्राथमिकता है। TAVI हर मरीज के लिए उपयुक्त नहीं होती। विशेषज्ञ डॉक्टर मरीज की स्थिति, वाल्व की बीमारी और इलाज से जुड़े जोखिमों का आकलन करने के बाद तय करते हैं कि उसके लिए यह प्रक्रिया सही है या नहीं।
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