By Malay Ojha | Published: 16 October 2026 at 03:22 PM
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के खिलाफ जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर की कथित टिप्पणी को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री को गोली मारने जैसी भाषा के इस्तेमाल पर आपत्ति जताते हुए इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ बताया गया है। इस मामले में प्रशांत किशोर से अपने शब्दों की जिम्मेदारी लेने और सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की गई है।
इस आपत्ति में कहा गया है कि राजनीति में विरोध और मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन किसी भी नेता के खिलाफ हिंसा की धमकी देने वाली भाषा स्वीकार नहीं की जा सकती। इस तरह की बयानबाजी से राजनीतिक माहौल खराब होने और समाज में तनाव बढ़ने का खतरा रहता है।
बिहार की राजनीतिक परंपरा का दिया हवाला
प्रशांत किशोर की कथित टिप्पणी पर सवाल उठाते हुए बिहार की संस्कृति, सहिष्णुता और लोकतांत्रिक परंपराओं का हवाला दिया गया है। कहा गया है कि प्रदेश की राजनीति में असहमति के बावजूद संवाद और संयम बनाए रखना जरूरी है। नेताओं से अपेक्षा की जाती है कि वे सार्वजनिक मंचों पर अपनी बात जिम्मेदारी के साथ रखें।
जंगलराज के दौर का भी किया जिक्र
बिहार की राजनीति में कानून-व्यवस्था का मुद्दा उठाते हुए पूर्व के जंगलराज के दौर का जिक्र किया गया है। आपत्ति जताने वालों का कहना है कि प्रदेश की जनता शांति, सुशासन और विकास चाहती है। ऐसे में राजनीतिक बयानबाजी ऐसी नहीं होनी चाहिए, जिससे समाज में कटुता और टकराव बढ़े।
राजनीतिक बयानबाजी पर भी उठाया सवाल
बयान में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की राजनीति पर लगते रहे सामाजिक ध्रुवीकरण और जंगलराज के आरोपों का भी उल्लेख किया गया है। साथ ही सवाल उठाया गया है कि क्या प्रशांत किशोर की ऐसी बयानबाजी बिहार की राजनीति को फिर टकराव की दिशा में ले जा सकती है। हालांकि, इन आरोपों और सवालों के संबंध में संबंधित पक्षों का पक्ष सामने आना बाकी है।
सार्वजनिक माफी की मांग
प्रशांत किशोर से कथित टिप्पणी पर सार्वजनिक रूप से माफी मांगने और राजनीतिक संवाद में संयम बरतने की मांग की गई है। आपत्ति जताने वालों का कहना है कि बिहार की राजनीति में हिंसा और धमकी के बजाय भाईचारे, विकास और जनहित के मुद्दों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
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