By Malay Ojha | Published: 16 October 2026 at 03:35 PM
हिमाचल प्रदेश के मंडी स्थित सरदार पटेल विश्वविद्यालय में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए प्रो. शर्मा ने कहा कि शिक्षा का मकसद केवल डिग्री देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को इस काबिल बनाना भी है कि वे अपनी योग्यता और रुचि के मुताबिक रोजगार हासिल कर सकें। इससे युवाओं को आत्मनिर्भर बनने के साथ देश के विकास में योगदान देने का मौका मिलेगा।
आत्मनिर्भर बनने के लिए कौशल जरूरी
प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि आजीविका का अर्थ केवल पैसा कमाना नहीं है। इससे व्यक्ति का आत्मविश्वास और आत्मसम्मान भी जुड़ा है। युवाओं को रोजगार के लिए तैयार करने में आजीविका परामर्श, व्यावहारिक प्रशिक्षण, कौशल विकास और उद्यमिता की अहम भूमिका है।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को बदलती आर्थिक और सामाजिक जरूरतों के अनुसार विद्यार्थियों को तैयार करना चाहिए। इसके लिए पढ़ाई के साथ व्यावहारिक दक्षता, रचनात्मक सोच और नए काम शुरू करने की क्षमता विकसित करने पर जोर देना होगा।
महिलाओं को रोजगार और कारोबार के अवसर मिलें
महिला सशक्तीकरण पर कुलपति ने कहा कि महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता उनके आत्मविश्वास और फैसले लेने की क्षमता को मजबूत करती है। महिलाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण, रोजगार और उद्यमिता से जोड़ने के लिए ठोस प्रयास किए जाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि जब महिलाओं को आगे बढ़ने के समान अवसर मिलते हैं, तो इसका लाभ केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि समाज और देश के विकास पर भी सकारात्मक असर पड़ता है।
विश्वविद्यालयों को उद्योगों से जोड़ने पर जोर
संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे सरदार पटेल विश्वविद्यालय, मंडी के कुलपति प्रो. ललित कुमार अवस्थी ने कहा कि युवाओं को रोजगार के पारंपरिक विकल्पों के साथ डिजिटल कौशल, नवाचार और उद्यमिता के लिए भी तैयार करना जरूरी है।
उन्होंने महिला सशक्तीकरण के लिए शिक्षा और प्रशिक्षण के साथ वित्तीय संसाधनों तक पहुंच तथा निर्णय लेने की प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने विश्वविद्यालयों में शोध, कौशल विकास और उद्योग-जगत के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत भी बताई।
शिक्षा के साथ सामाजिक जिम्मेदारी भी जरूरी
संगोष्ठी में भारतीय ज्ञान परंपरा, श्रम की गरिमा, स्वावलंबन और लोककल्याण जैसे विषयों पर भी विचार रखे गए। वक्ताओं ने कहा कि विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी केवल ज्ञान देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी है।
राष्ट्रीय संगोष्ठी में आजीविका परामर्श, रोजगार सृजन, कौशल विकास और महिला सशक्तीकरण से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई। इन क्षेत्रों में सरकार, विश्वविद्यालयों, उद्योगों और समाज के साझा प्रयासों को युवाओं और महिलाओं के लिए बेहतर अवसर तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना गया।
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