By Malay Ojha | Published: 18 October 2026 at 09:40 AM
मध्य प्रदेश के ग्वालियर में शीतला माता मंदिर के पास हुए भीषण हादसे में 14 लोगों की मौत हो गई, जबकि करीब 35 लोग घायल हैं। शनिवार और रविवार की दरमियानी रात करीब डेढ़ बजे चीनौर रोड की ढलान पर एक बेकाबू ट्रक श्रद्धालुओं को कुचलते हुए दुकानों से जा टकराया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि मंदिर के प्रवेश द्वार की दीवार ढह गई और कई लोग मलबे में दब गए।
हादसे के बाद मंदिर परिसर और आसपास चीख-पुकार मच गई। लोग अपनों को तलाशते रहे। घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। इनमें दो होमगार्ड जवान भी शामिल हैं। अस्पताल में भर्ती सात घायलों की हालत गंभीर बताई गई है।
16 साल के भाई को खोने का दर्द, फूट-फूटकर रोए आकाश
इस हादसे में आकाश ने अपने छोटे भाई गणेश को खो दिया। 16 वर्षीय गणेश परिवार के साथ माता के दर्शन करने आया था। आकाश के मुताबिक, परिवार के कुछ लोग दर्शन के लिए ऊपर चले गए थे, जबकि गणेश मंदिर के प्रवेश द्वार के पास बैठा था। इसी दौरान तेज रफ्तार ट्रक वहां पहुंचा और लोगों को कुचलता चला गया।
आंखों के सामने तड़पता रहा भाई, कुछ नहीं कर सके
आकाश के लिए यह हादसा जिंदगी भर का दर्द बन गया। जिस भाई के साथ वह मंदिर आया था, उसे अपनी आंखों के सामने तड़पते देखता रहा, लेकिन बचा नहीं सका। घटना को याद करते हुए वह फूट-फूटकर रो पड़ा। आकाश ने ट्रक के ब्रेक फेल होने की आशंका जताई है। हालांकि, हादसे की असली वजह जांच के बाद ही सामने आएगी।
मां का आरोप, बेटे को निजी अस्पताल नहीं ले जाने दिया
हादसे में 19 वर्षीय बेटे को खोने वाली किरण ने पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि जब वह बेटे को अस्पताल लेकर पहुंचीं, तब उसकी सांसें चल रही थीं। किरण के मुताबिक, वह उसे निजी अस्पताल ले जाना चाहती थीं, लेकिन पुलिसकर्मियों ने एंबुलेंस रोक दी और बेटे को वापस ले जाने को कहा।
‘हाथ-पैर जोड़े, फिर भी नहीं ले जाने दिया’
किरण का आरोप है कि उन्होंने पुलिसकर्मियों से कई बार गुहार लगाई, लेकिन उन्हें बेटे को निजी अस्पताल ले जाने की अनुमति नहीं मिली। बेटे की मौत से टूट चुकी मां ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि वह अपने सामने बेटे को इलाज तक नहीं दिला सकीं। हालांकि, पुलिस पर लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
मलबे में मिला दिव्यांश का शव, परिवार करता रहा तलाश
दिव्यांश के परिजन सावित्री ने बताया कि दर्शन के बाद परिवार के लोग मंदिर से बाहर आ गए थे, लेकिन दिव्यांश का कहीं पता नहीं चला। काफी तलाश करने और पुलिस को सूचना देने के बाद मलबे में उसका शव मिला। पहचान होने के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
चंद पलों में सब कुछ खत्म, अस्पताल में जिंदगी की जंग
हादसे में घायल लोगों के परिजन भी उस रात को याद कर सहम जाते हैं। गजेंद्र प्रजापति ने बताया कि उनके साले की मंदिर के पास दुकान है और वह हादसे में घायल होकर अस्पताल में भर्ती हैं। उनके मुताबिक, सब कुछ इतनी तेजी से हुआ कि लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। चारों तरफ धुआं और चीख-पुकार थी।
भारी ट्रक मंदिर के गेट तक कैसे पहुंचा?
अस्पताल पहुंचे लोकेंद्र सिंह तोमर ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि जब सामान्य दिनों में दोपहिया वाहनों की आवाजाही तक रोकी जाती है, तो इतना भारी ट्रक मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार तक कैसे पहुंच गया? ट्रक किस रास्ते से आया और भारी वाहनों को रोकने के इंतजाम क्यों नहीं थे? इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही मिल सकेंगे।
प्रशासन ने शुरू की जांच, घायलों के इलाज पर जोर
कलेक्टर रुचिका चौहान के मुताबिक, प्रशासन की टीमें मौके पर मौजूद रहीं और राहत-बचाव कार्य पूरा कराया गया। पुलिस ने हादसे की जांच शुरू कर दी है। अब जांच में ट्रक के अनियंत्रित होने की वजह और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों पर स्थिति स्पष्ट होना अहम होगा।
शीतला माता मंदिर में दर्शन करने पहुंचे लोग अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना लेकर आए थे, लेकिन हादसे ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। किसी ने अपना भाई खो दिया, किसी की गोद सूनी हो गई और किसी मां की दुनिया उजड़ गई। अब पीड़ित परिवारों के सामने अपनों को खोने का दर्द है और हादसे की वजह को लेकर कई सवाल हैं।
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