By Malay Ojha | Published: 08 October 2026 at 10:03 AM
नाना पाटेकर का नाम हिंदी सिनेमा के उन कलाकारों में लिया जाता है, जिन्होंने अपने अभिनय से पर्दे पर अलग पहचान बनाई। 75 साल की उम्र में उनके निधन की खबर ने फिल्म इंडस्ट्री और उनके चाहने वालों को गम में डुबो दिया है। लेकिन नाना की जिंदगी की कहानी सिर्फ उनकी फिल्मों और किरदारों तक सीमित नहीं थी। पर्दे पर शोहरत हासिल करने से पहले उन्होंने ऐसा दौर भी देखा, जब कमाई महज 35 रुपये महीना थी।
नाना पाटेकर का जन्म 1 जनवरी 1951 को महाराष्ट्र के मुरुड-जंजीरा में हुआ था। परिवार की आर्थिक स्थिति बिगड़ने के बाद कम उम्र में ही उन्हें काम करना पड़ा। 1964 में उनके पिता के बिजनेस पार्टनर ने धोखा दिया और परिवार आर्थिक संकट में फंस गया। उस समय नाना स्कूल में पढ़ रहे थे, लेकिन घर चलाने के लिए उन्होंने फिल्मों के पोस्टर पेंट करने का काम शुरू किया। इसके बदले उन्हें महीने के 35 रुपये और एक वक्त का खाना मिलता था।
स्कूल के बाद पोस्टर पेंट करते थे
नाना ने एक इंटरव्यू में अपने उस दौर को याद करते हुए बताया था कि वह दोपहर तक स्कूल में रहते और उसके बाद काम पर निकल जाते थे। फिल्मों के पोस्टर बनाने का यह काम उनके लिए सिर्फ कमाई का जरिया नहीं था, बल्कि इसी दौर में फिल्मी दुनिया से उनका रिश्ता भी गहरा होता गया। मुश्किल हालात के बावजूद उन्होंने थिएटर से अपना जुड़ाव बनाए रखा और अभिनय की राह नहीं छोड़ी।
थिएटर से फिल्मों तक पहुंचे
नाना पाटेकर ने आगे चलकर थिएटर में अपनी मजबूत पहचान बनाई और फिर फिल्मों का रुख किया। 1978 की फिल्म ‘गमन’ से उनका फिल्मी सफर शुरू हुआ। इसके बाद ‘परिंदा’, ‘अंगार’, ‘तिरंगा’, ‘क्रांतिवीर’ और ‘अग्निसाक्षी’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय ने उन्हें इंडस्ट्री के सबसे दमदार कलाकारों में शामिल कर दिया।
जब कैरेक्टर आर्टिस्ट ने मांगे ₹1 करोड़
नाना की फीस को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा तब हुई, जब उन्होंने एक फिल्म में कैरेक्टर रोल के लिए 1 करोड़ रुपये की फीस मांगी। अभिनेता परेश रावल ने 2025 में The Lallantop को दिए इंटरव्यू में बताया था कि नाना ऐसे पहले कैरेक्टर आर्टिस्ट थे, जिन्होंने एक रोल के लिए 1 करोड़ रुपये मांगे और उन्हें यह रकम मिली भी। उस दौर में इतनी बड़ी रकम की मांग को लेकर फिल्म इंडस्ट्री में काफी चर्चा हुई थी।
नाना का अपना था फीस को लेकर अंदाज
परेश रावल के मुताबिक, नाना पाटेकर के लिए पैसा सबसे बड़ी प्राथमिकता नहीं था। अगर उन्हें कोई किरदार पसंद आ जाता था तो वह कम पैसे में भी काम कर लेते थे, लेकिन अगर किरदार पसंद नहीं आता तो बड़ी रकम भी उन्हें तैयार नहीं कर सकती थी। यही बेबाकी उनके व्यक्तित्व और काम करने के अंदाज की पहचान रही।
संघर्ष से शोहरत तक पहुंचे नाना
एक तरफ ₹35 महीने की कमाई वाला संघर्ष और दूसरी तरफ कैरेक्टर रोल के लिए ₹1 करोड़ की फीस—नाना पाटेकर का यह सफर बताता है कि उन्होंने अपनी पहचान सिर्फ स्टारडम के दम पर नहीं बनाई। थिएटर, फिल्मों और अपने दमदार अभिनय के जरिए उन्होंने ऐसी जगह बनाई, जहां उनका नाम किसी खास तरह के किरदार तक सीमित नहीं रहा। 75 साल की उम्र में उनके निधन के साथ भारतीय सिनेमा ने एक ऐसा कलाकार खो दिया, जिसकी आवाज, संवाद अदायगी और अभिनय का अंदाज लंबे समय तक याद किया जाएगा।
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