By aryavartalive | Published: 15 October 2026 at 06:05 PM
एक मामले में मद्रास हाई कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार के उस आदेश को रद्द कर दिया था, जिसके तहत कुछ लोगों को इस्लाम अपनाने के बाद पिछड़ा मुस्लिम वर्ग का दर्जा देने का प्रावधान था। इस फैसले के बाद धर्म परिवर्तन और आरक्षण के नियमों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
SC, ST, OBC और EWS के नियम अलग
धर्म परिवर्तन का आरक्षण पर क्या असर पड़ेगा, यह व्यक्ति की मौजूदा श्रेणी, संबंधित समुदाय की सरकारी सूची और लागू कानून पर निर्भर करता है। SC के मामले में धर्म संबंधी स्पष्ट शर्त है, जबकि ST के लिए ऐसी सामान्य धर्म आधारित पाबंदी नहीं है। OBC और EWS में भी अपनी-अपनी पात्रता शर्तें लागू होती हैं।
SC आरक्षण: इस्लाम या ईसाई धर्म अपनाने पर क्या होगा?
अनुसूचित जाति यानी SC के आरक्षण के लिए संविधान (अनुसूचित जातियां) आदेश, 1950 के पैरा 3 में धर्म से जुड़ी शर्त तय है। इसके तहत हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म को मानने वाले पात्र लोगों को ही SC का दर्जा मिल सकता है। इस नियम के कारण इस्लाम या ईसाई धर्म अपनाने वाला व्यक्ति SC दर्जे के आधार पर आरक्षण का दावा नहीं कर सकता।
धर्म बदलने पर SC दर्जे के नियम
- हिंदू से मुस्लिम बनने पर SC दर्जे के आधार पर आरक्षण नहीं मिलेगा।
- हिंदू से ईसाई बनने पर भी SC आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा।
- सिख या बौद्ध धर्म अपनाने पर संबंधित शर्तें पूरी होने पर SC दर्जा मिल सकता है।
ST आरक्षण: क्या धर्म बदलने से खत्म हो जाता है दर्जा?
अनुसूचित जनजाति यानी ST के नियम SC से अलग हैं। ST की संवैधानिक सूची में शामिल जनजातियों के लिए धर्म के आधार पर ऐसी सामान्य पाबंदी नहीं है। इसलिए किसी आदिवासी व्यक्ति के मुस्लिम, ईसाई या अन्य धर्म अपनाने भर से उसका ST दर्जा अपने आप खत्म नहीं होता।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि धर्म बदलने वाला कोई भी व्यक्ति ST आरक्षण का दावा कर सकता है। इसके लिए संबंधित अधिसूचित जनजाति का सदस्य होना और लागू नियमों के तहत पात्रता पूरी करना जरूरी है।
OBC आरक्षण: हिंदू से मुस्लिम बनने पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
इस पूरे विवाद की शुरुआत तमिलनाडु सरकार के 9 मार्च 2024 के आदेश से हुई थी। इसमें पिछड़े वर्ग, अति पिछड़े वर्ग, विमुक्त समुदायों और SC समुदायों से इस्लाम अपनाने वाले लोगों को पिछड़ा मुस्लिम वर्ग (BC Muslim) का दर्जा देकर आरक्षण का लाभ देने का प्रावधान किया गया था।
मद्रास हाई कोर्ट ने 25 जून 2026 को इस आदेश को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया। इसके बाद 15 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने भी राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि हिंदू सामाजिक व्यवस्था में पहले की जाति या पिछड़ेपन के आधार पर इस्लाम अपनाने के बाद अपने आप पिछड़ा मुस्लिम वर्ग का दर्जा नहीं मांगा जा सकता।
क्या हर मुस्लिम व्यक्ति को OBC आरक्षण नहीं मिलेगा?
ऐसा समझना गलत होगा। इस फैसले का संबंध धर्म परिवर्तन के बाद पुराने सामाजिक दर्जे के आधार पर पिछड़ा मुस्लिम वर्ग का दर्जा पाने से है। OBC आरक्षण के लिए संबंधित समुदाय का लागू केंद्रीय या राज्य सूची में शामिल होना और दूसरी पात्रता शर्तें पूरी करना जरूरी है। केवल धर्म परिवर्तन से किसी व्यक्ति को OBC आरक्षण अपने आप नहीं मिलता।
EWS आरक्षण: धर्म बदलने पर क्या नियम लागू होंगे?
आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी EWS के लिए केंद्र सरकार की नौकरियों और संबंधित प्रवेश प्रक्रियाओं में 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। इसके तहत पात्रता तय करते समय आय, संपत्ति और दूसरी निर्धारित शर्तें देखी जाती हैं।
जो व्यक्ति SC, ST या OBC आरक्षण के दायरे में नहीं आते, वे तय नियमों के तहत EWS आरक्षण के पात्र हो सकते हैं। धर्म परिवर्तन अपने आप EWS आरक्षण मिलने या खत्म होने का आधार नहीं है। संबंधित व्यक्ति को लागू नियमों के अनुसार पात्रता पूरी करनी होगी।
धर्म परिवर्तन के बाद आरक्षण पर क्या है निष्कर्ष?
धर्म बदलने के बाद आरक्षण मिलेगा या नहीं, इसका फैसला व्यक्ति की श्रेणी और संबंधित कानून के आधार पर होगा। SC के लिए धर्म संबंधी स्पष्ट शर्त है। ST में संबंधित जनजाति की पहचान और लागू नियम अहम हैं। OBC में मान्य सूची और पात्रता देखी जाती है, जबकि EWS में आर्थिक और अन्य निर्धारित शर्तें लागू होती हैं।
इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि धर्म परिवर्तन के बाद सभी का आरक्षण खत्म हो जाता है या हर स्थिति में जारी रहता है। किसी खास मामले में पात्रता तय करने के लिए संबंधित सरकारी सूची, प्रमाणपत्र और लागू नियमों की जांच जरूरी है।
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