By Malay Ojha | Published: 11 June 2026 at 02:27 PM
बिहार विधान परिषद चुनाव के लिए दाखिल किए गए नामांकन पत्र और उससे जुड़े शपथ पत्र ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र और बिहार सरकार में स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार की शैक्षणिक योग्यता को लेकर विपक्ष ने गंभीर सवाल उठाए हैं। चुनावी दस्तावेजों में सामने आई जानकारी के बाद राष्ट्रीय जनता दल ने दावा किया है कि वर्षों से उन्हें इंजीनियर बताए जाने के विपरीत उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी ही नहीं की।
विधान परिषद चुनाव के लिए प्रस्तुत शपथ पत्र में निशांत कुमार ने अपनी शैक्षणिक योग्यता का विवरण दिया है। इसी दस्तावेज को आधार बनाकर राष्ट्रीय जनता दल के नेताओं ने जनता दल यूनाइटेड पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। विपक्ष का आरोप है कि लंबे समय तक यह धारणा बनाई गई कि निशांत कुमार इंजीनियर हैं, जबकि आधिकारिक दस्तावेज कुछ और कहानी बता रहे हैं।
आरजेडी नेता ने सार्वजनिक रूप से उठाए सवाल
राष्ट्रीय जनता दल के विधान परिषद सदस्य सुनील सिंह ने प्रेस के सामने चुनावी शपथ पत्र का हवाला देते हुए कहा कि दस्तावेजों के अनुसार निशांत कुमार ने केवल बारहवीं तक की पढ़ाई पूरी की है। उन्होंने दावा किया कि इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त करने का दावा वास्तविक तथ्यों से मेल नहीं खाता और इस मामले में जनता दल यूनाइटेड को स्पष्टीकरण देना चाहिए।
इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम बीच में छोड़ने का दावा
सुनील सिंह के अनुसार, निशांत कुमार ने वर्ष 1998 में पटना साइंस कॉलेज से इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। इसके बाद उन्होंने रांची स्थित बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान, मेसरा में इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम में प्रवेश लिया। हालांकि, आरोप है कि डिग्री प्राप्त करने के लिए आवश्यक सभी सेमेस्टर पूरे नहीं किए गए और पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी गई। विपक्ष का कहना है कि यही तथ्य चुनावी दस्तावेजों में भी दर्ज हैं।
जनता दल यूनाइटेड से मांगा गया जवाब
आरजेडी नेताओं का कहना है कि यदि निशांत कुमार ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी नहीं की, तो वर्षों तक उन्हें इंजीनियर बताने का आधार क्या था। विपक्ष ने सवाल उठाया कि क्या जनता के बीच उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि को लेकर गलत धारणा बनने दी गई। इस मुद्दे पर जनता दल यूनाइटेड से स्पष्ट जवाब मांगा जा रहा है।
तेजस्वी यादव का भी किया गया जिक्र
विवाद के दौरान विपक्ष ने पुराने राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी याद दिलाए। आरजेडी नेताओं ने कहा कि अतीत में तेजस्वी यादव की शैक्षणिक योग्यता को लेकर लगातार सवाल उठाए जाते रहे हैं। अब जब निशांत कुमार की शिक्षा संबंधी जानकारी सार्वजनिक दस्तावेजों के जरिए सामने आई है, तब वही लोग जवाब देने से बच नहीं सकते।
चुनावी राजनीति में शिक्षा बनी बहस का विषय
बिहार की राजनीति में नेताओं की शैक्षणिक योग्यता समय-समय पर चर्चा का विषय बनती रही है। कई बार चुनावी हलफनामों में दर्ज जानकारियां राजनीतिक बहस को नई दिशा दे देती हैं। निशांत कुमार के मामले में भी यही स्थिति देखने को मिल रही है, जहां विपक्ष इसे पारदर्शिता और जवाबदेही से जोड़कर देख रहा है।
जदयू की प्रतिक्रिया पर टिकी निगाहें
फिलहाल इस पूरे विवाद पर जनता दल यूनाइटेड की ओर से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक गलियारों में अब सभी की नजर इस बात पर है कि पार्टी और स्वयं निशांत Kumar इस मुद्दे पर क्या स्पष्टीकरण देते हैं। चुनावी माहौल के बीच यह विवाद आने वाले दिनों में और अधिक राजनीतिक रंग ले सकता है।
बिहार की राजनीति में बढ़ सकती है सियासी गर्मी
विधान परिषद चुनाव के दौरान उठा यह मुद्दा केवल एक नेता की शैक्षणिक योग्यता तक सीमित नहीं रह गया है। विपक्ष इसे जनता के सामने तथ्यों की पारदर्शिता से जोड़कर देख रहा है, जबकि सत्तारूढ़ दल के लिए यह एक नया राजनीतिक बचाव का विषय बन सकता है। आने वाले दिनों में इस मामले पर बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।

