By Malay Ojha | Published: 27 July 2026 at 04:08 PM
राम मंदिर चंदा चोरी मामले की जांच को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है। अदालत ने साफ कर दिया कि वह इस मामले की जांच की सीधे निगरानी नहीं करेगी। हालांकि, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के लिए विशेष जांच दल यानी एसआईटी में एक फॉरेंसिक ऑडिटर को शामिल करने का निर्देश दिया गया है। एसआईटी को अब जांच की प्रगति की स्थिति रिपोर्ट भी अदालत में दाखिल करनी होगी।
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से जांच की निगरानी सुप्रीम कोर्ट से करने की मांग रखी गई थी। अदालत ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि कोर्ट जांच की निगरानी नहीं करेगा, लेकिन यह जरूर सुनिश्चित किया जाएगा कि पूरी जांच निष्पक्ष, सही और पारदर्शी तरीके से हो।
एसआईटी में शामिल होगा फॉरेंसिक ऑडिटर
अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से सुझाए गए अधिकारियों के नाम के आधार पर नई एसआईटी गठित करने की बात कही है। इस जांच दल का नेतृत्व एस किरण कर रहे हैं। उनके साथ पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी टीम का हिस्सा होंगे। अदालत के आदेश के मुताबिक, जांच को वित्तीय और दस्तावेजी स्तर पर मजबूत बनाने के लिए एक फॉरेंसिक ऑडिटर को भी एसआईटी में सदस्य के तौर पर शामिल किया जाएगा।
दो सप्ताह बाद फिर होगी मामले की सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी को जांच जारी रखते हुए उसकी प्रगति की स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत अब इस रिपोर्ट के आधार पर आगे की स्थिति पर विचार करेगी। मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी। इसका मतलब साफ है कि फिलहाल जांच एसआईटी के स्तर पर आगे बढ़ेगी और अदालत उसकी प्रगति पर दाखिल रिपोर्ट को देखेगी।
यूपी सरकार ने सुझाए थे एसआईटी के लिए अधिकारियों के नाम
इस मामले की पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से नई एसआईटी के गठन के लिए अधिकारियों के नाम सुझाने को कहा था। सरकार की ओर से अब अधिकारियों के नाम अदालत के सामने रखे गए हैं। इन्हीं नामों के आधार पर एसआईटी के गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। सरकार की ओर से अदालत को यह भी बताया गया कि एसआईटी के गठन से जुड़ा काम उसकी तरफ से पूरा किया जा चुका है और अब आगे की प्रक्रिया अदालत के निर्देश के मुताबिक होगी।
याचिकाकर्ता ने उठाया चंदे की रकम का मुद्दा
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने चंदे की रकम को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने अदालत को बताया कि देश के अलग-अलग हिस्सों से लोगों ने राम मंदिर के लिए 100 और 500 रुपये समेत अपनी क्षमता के अनुसार चंदा दिया था। इन लोगों को रकम जमा करने की रसीदें भी दी गई थीं। आरोप यह है कि चंदे के रूप में जुटाई गई पूरी रकम संबंधित ट्रस्ट तक नहीं पहुंची।
ट्रस्ट की रसीदें वेबसाइट पर डालने की मांग
याचिकाकर्ता की ओर से सुनवाई के दौरान यह मांग भी रखी गई कि चंदा देने वालों को जारी की गई ट्रस्ट की रसीदों को वेबसाइट पर सार्वजनिक किया जाना चाहिए। इससे चंदे के रूप में जमा हुई रकम और उसके ट्रस्ट तक पहुंचने की स्थिति को लेकर पारदर्शिता बढ़ सकती है। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि फिलहाल एसआईटी को अपनी जांच पूरी कर रिपोर्ट देने का मौका दिया जाना चाहिए।
सीजेआई बोले- पारदर्शिता के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे
मुख्य न्यायाधीश ने सुनवाई के दौरान कहा कि मामले में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले की गहन जांच की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट का रुख यह संकेत देता है कि वह जांच को अपने स्तर से नियंत्रित नहीं करेगा, लेकिन जांच की प्रक्रिया में निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर कोई समझौता भी नहीं होने देगा।
जांच में अब वित्तीय पहलू भी अहम होगा
एसआईटी में फॉरेंसिक ऑडिटर को शामिल करने का फैसला इस मामले में खास महत्व रखता है। चूंकि विवाद चंदे के रूप में जमा रकम, रसीदों और उसके ट्रस्ट तक पहुंचने से जुड़े आरोपों से संबंधित है, इसलिए जांच में वित्तीय रिकॉर्ड और लेनदेन की पड़ताल महत्वपूर्ण हो सकती है। फॉरेंसिक ऑडिट के जरिए रकम के स्रोत, संग्रह और उसके इस्तेमाल से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा सकती है। हालांकि, जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
पहले की एसआईटी ने भी अदालत में दी थी प्रगति रिपोर्ट
इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पहले गठित एसआईटी अदालत के सामने जांच की प्रगति रिपोर्ट पेश कर चुकी है। अब सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद नई एसआईटी की जांच और उसकी स्थिति रिपोर्ट पर नजर रहेगी। अदालत ने स्पष्ट किया है कि जांच की दिशा और उसकी निष्पक्षता को लेकर जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
20 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने दिया था अहम निर्देश
इससे पहले 20 जुलाई को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से कहा था कि वह चल रही पुलिस जांच को उसी तीन सदस्यीय एसआईटी की निगरानी में रखने पर विचार करे, जिसने कथित धोखाधड़ी के शुरुआती सबूत सामने लाए थे। इसके बाद सरकार की ओर से एसआईटी के गठन को लेकर अधिकारियों के नाम अदालत के सामने रखे गए।
अब एसआईटी की रिपोर्ट पर टिकी अगली कार्रवाई
अब इस पूरे मामले में अगला बड़ा पड़ाव एसआईटी की स्थिति रिपोर्ट होगी। सुप्रीम कोर्ट ने जांच की सीधी निगरानी से इनकार जरूर किया है, लेकिन फॉरेंसिक ऑडिटर को टीम में शामिल करने और स्थिति रिपोर्ट मांगने से यह साफ है कि अदालत मामले की जांच में पारदर्शिता को लेकर गंभीर है। दो सप्ताह बाद होने वाली सुनवाई में एसआईटी की प्रगति रिपोर्ट के आधार पर आगे की तस्वीर साफ हो सकती है।
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