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मोहन भागवत के बयान पर संत समाज की मुहर! रवींद्र पुरी बोले- भारत के मुसलमान हमारे भाई

By Malay Ojha | Published: 30 August 2026 at 07:20 PM

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत के धर्म और मानवता पर दिए बयान को संत समाज का समर्थन मिला है। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने भागवत के विचारों की सराहना करते हुए कहा कि भारत की सनातन परंपरा सभी के सुख और कल्याण की बात करती है। उन्होंने साफ कहा कि भारत में रहने वाले मुसलमान कोई गैर नहीं, बल्कि हमारे ही भाई हैं और उनके साथ भाईचारे का व्यवहार होना चाहिए।

महंत रवींद्र पुरी ने कहा कि अलग-अलग धर्मों और पूजा-पद्धतियों के रास्ते भले अलग हों, लेकिन सभी का अंतिम लक्ष्य ईश्वर तक पहुंचना है। उनके मुताबिक धर्म के नाम पर समाज में नफरत, विवाद और आपसी लड़ाई की कोई जरूरत नहीं है।

‘सभी मुसलमानों को एक नजर से देखना ठीक नहीं’
उन्होंने कहा कि देश के सभी मुसलमानों को एक ही नजर से देखना सही नहीं है। समाज में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जो सनातन परंपरा और हिंदू संस्कृति का सम्मान करते हैं। ऐसे में आम लोगों के बीच दूरी बढ़ाने के बजाय आपसी समझ और भाईचारे को मजबूत करने की जरूरत है।

सनातन विरोधी गतिविधियों पर भी बोले
महंत रवींद्र पुरी ने कहा कि देश में अगर कहीं सनातन विरोधी गतिविधियां होती हैं तो उनका विरोध होना चाहिए, लेकिन इसका असर आम लोगों के बीच रिश्तों पर नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज में शांति और एकता बनाए रखना जरूरी है। भागवत के संदेश को उन्होंने समाज को जोड़ने वाला बताया।

भागवत ने क्या कहा था?
मोहन भागवत ने 29 अगस्त को अमेरिका के न्यूयॉर्क में आयोजित ‘वन वर्ल्ड, वन ह्यूमैनिटी’ कार्यक्रम में धर्म और मानवता पर बात की थी। उन्होंने कहा था कि धर्म और पूजा-पद्धतियां अलग हो सकती हैं, लेकिन मानवता एक है और सत्य एक है। उन्होंने भारत की ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की परंपरा का भी जिक्र किया।

‘भारत में मुसलमान नहीं होने चाहिए’ वाली सोच पर भी टिप्पणी
भागवत ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि अगर कोई हिंदू यह मानता है कि भारत में मुसलमान नहीं होने चाहिए तो वह हिंदू नहीं रह सकता। उन्होंने कहा कि हिंदू परंपरा सभी रास्तों को एक ही लक्ष्य की ओर जाने वाला मानती है और हर इंसान की गरिमा समान है।

विविधता को बचाने की बात
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि अलग-अलग पहचान और विविधता समाज की सच्चाई है, इसलिए इसे स्वीकार और सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अपनी पहचान की रक्षा करने के साथ दूसरों की पहचान का सम्मान करना भी जरूरी है।

संत समाज के समर्थन से बयान की चर्चा बढ़ी
भागवत के बयान के बाद अब महंत रवींद्र पुरी का समर्थन इसे लेकर चर्चा को आगे बढ़ाता है। पुरी ने भी धर्म के अलग-अलग रास्तों के बावजूद इंसानियत और आपसी भाईचारे को सबसे ऊपर रखने की बात कही है। उनका संदेश है कि मतभेदों को लेकर समाज में दूरी बढ़ाने के बजाय एक-दूसरे को समझने और साथ लेकर चलने की जरूरत है।

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मोहन भागवत के बयान पर संत समाज की मुहर! रवींद्र पुरी बोले- भारत के मुसलमान हमारे भाई

By Malay Ojha | Published: 30 August 2026 at 07:20 PM

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत के धर्म और मानवता पर दिए बयान को संत समाज का समर्थन मिला है। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने भागवत के विचारों की सराहना करते हुए कहा कि भारत की सनातन परंपरा सभी के सुख और कल्याण की बात करती है। उन्होंने साफ कहा कि भारत में रहने वाले मुसलमान कोई गैर नहीं, बल्कि हमारे ही भाई हैं और उनके साथ भाईचारे का व्यवहार होना चाहिए।

महंत रवींद्र पुरी ने कहा कि अलग-अलग धर्मों और पूजा-पद्धतियों के रास्ते भले अलग हों, लेकिन सभी का अंतिम लक्ष्य ईश्वर तक पहुंचना है। उनके मुताबिक धर्म के नाम पर समाज में नफरत, विवाद और आपसी लड़ाई की कोई जरूरत नहीं है।

‘सभी मुसलमानों को एक नजर से देखना ठीक नहीं’
उन्होंने कहा कि देश के सभी मुसलमानों को एक ही नजर से देखना सही नहीं है। समाज में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जो सनातन परंपरा और हिंदू संस्कृति का सम्मान करते हैं। ऐसे में आम लोगों के बीच दूरी बढ़ाने के बजाय आपसी समझ और भाईचारे को मजबूत करने की जरूरत है।

सनातन विरोधी गतिविधियों पर भी बोले
महंत रवींद्र पुरी ने कहा कि देश में अगर कहीं सनातन विरोधी गतिविधियां होती हैं तो उनका विरोध होना चाहिए, लेकिन इसका असर आम लोगों के बीच रिश्तों पर नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज में शांति और एकता बनाए रखना जरूरी है। भागवत के संदेश को उन्होंने समाज को जोड़ने वाला बताया।

भागवत ने क्या कहा था?
मोहन भागवत ने 29 अगस्त को अमेरिका के न्यूयॉर्क में आयोजित ‘वन वर्ल्ड, वन ह्यूमैनिटी’ कार्यक्रम में धर्म और मानवता पर बात की थी। उन्होंने कहा था कि धर्म और पूजा-पद्धतियां अलग हो सकती हैं, लेकिन मानवता एक है और सत्य एक है। उन्होंने भारत की ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की परंपरा का भी जिक्र किया।

‘भारत में मुसलमान नहीं होने चाहिए’ वाली सोच पर भी टिप्पणी
भागवत ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि अगर कोई हिंदू यह मानता है कि भारत में मुसलमान नहीं होने चाहिए तो वह हिंदू नहीं रह सकता। उन्होंने कहा कि हिंदू परंपरा सभी रास्तों को एक ही लक्ष्य की ओर जाने वाला मानती है और हर इंसान की गरिमा समान है।

विविधता को बचाने की बात
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि अलग-अलग पहचान और विविधता समाज की सच्चाई है, इसलिए इसे स्वीकार और सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अपनी पहचान की रक्षा करने के साथ दूसरों की पहचान का सम्मान करना भी जरूरी है।

संत समाज के समर्थन से बयान की चर्चा बढ़ी
भागवत के बयान के बाद अब महंत रवींद्र पुरी का समर्थन इसे लेकर चर्चा को आगे बढ़ाता है। पुरी ने भी धर्म के अलग-अलग रास्तों के बावजूद इंसानियत और आपसी भाईचारे को सबसे ऊपर रखने की बात कही है। उनका संदेश है कि मतभेदों को लेकर समाज में दूरी बढ़ाने के बजाय एक-दूसरे को समझने और साथ लेकर चलने की जरूरत है।

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