By Malay Ojha | Published: 14 September 2026 at 08:13 PM
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) के ट्रॉमा सेंटर ने राम जी पासी के इलाज को लेकर मीडिया में आई खबरों पर सफाई दी है। विश्वविद्यालय के सूचना एवं जनसम्पर्क कार्यालय के मुताबिक, 12 सितंबर की रात पुलिस एक अज्ञात व्यक्ति को डाफी के पास से ट्रॉमा सेंटर लेकर पहुंची थी। मरीज नशे की हालत में बेहोश था और मेडिकल ऑफिसर, नर्सिंग व पैरामेडिकल स्टाफ ने पहुंचते ही उसका इलाज शुरू कर दिया था।
विश्वविद्यालय के अनुसार मरीज की पहचान बाद में राम जी पासी के रूप में हुई। डॉक्टरों ने उसकी जांच की और जरूरी उपचार किया। अत्यधिक नशे की वजह से टांके लगाने में मरीज सहयोग नहीं कर रहा था, फिर भी रक्तस्राव रोकने के लिए आवश्यक टांके लगाए गए।
जांच के बाद भर्ती की जरूरत नहीं बताई
ट्रॉमा सेंटर के चिकित्सा अधिकारी की जांच के बाद मरीज की स्थिति सामान्य पाई गई। विश्वविद्यालय का कहना है कि दोपहर करीब 12 बजे तक वह होश में था और चल-फिर रहा था। डॉक्टरों ने उस समय उसे घर ले जाने की सलाह दी थी, क्योंकि तत्काल भर्ती की जरूरत नहीं मानी गई।
छात्रों ने भर्ती करने की मांग की
इसी दौरान कुछ छात्रों ने मरीज को पूरी तरह स्वस्थ नहीं बताते हुए कुछ दिनों तक ट्रॉमा सेंटर में भर्ती रखने और बेड उपलब्ध कराने की मांग की। विश्वविद्यालय के अनुसार बेड की मांग को लेकर कुछ छात्रों ने आपातकालीन विभाग के ट्राएज क्षेत्र के काम में बाधा डालने की कोशिश की।
सुरक्षा कर्मियों को बुलाना पड़ा
स्थिति को देखते हुए मुख्य आरक्षाधिकारी कार्यालय से सुरक्षा अधिकारी और सुरक्षा कर्मियों को बुलाया गया। विश्वविद्यालय का दावा है कि इस दौरान कुछ छात्रों की सुरक्षाकर्मियों से बहस और नोकझोंक भी हुई। बाद में असिस्टेंट सिक्योरिटी ऑफिसर ने ट्रॉमा सेंटर के चिकित्सा अधिकारी से बातचीत की और मरीज को आपातकालीन कक्ष संख्या 1006 में रखने की व्यवस्था की गई।
डॉक्टरों के समय पर पहुंचने पर भी दी सफाई
कुछ छात्रों की ओर से मरीज के इलाज में देरी और संबंधित विभागों के डॉक्टरों के समय पर नहीं पहुंचने के आरोप लगाए गए थे। विश्वविद्यालय ने इन आरोपों से जुड़े घटनाक्रम पर कहा कि न्यूरोसर्जरी विभाग के डॉक्टर ने मरीज की जांच और परामर्श किया था। उनके अनुसार मरीज की स्थिति सामान्य थी और सुबह तक उसके टांके भी लगाए जा चुके थे।
पुलिस से मिली जानकारी के बाद सामने आया छात्र होना
विश्वविद्यालय के अनुसार 13 सितंबर की सुबह करीब 8:45 बजे पुलिस ने मरीज के मित्र बिपुल कुमार के बारे में जानकारी हासिल की और उन्हें ट्रॉमा सेंटर बुलाया गया। बिपुल कुमार के पहुंचने के बाद वहां तैनात सुरक्षा गार्ड को जानकारी मिली कि राम जी पासी BHU के छात्र हैं।
13 सितंबर रात को किया गया डिस्चार्ज
विश्वविद्यालय के मुताबिक संबंधित विभागों के डॉक्टरों ने मरीज की रिपोर्ट देखने और आवश्यक जांच के बाद 13 सितंबर की रात करीब 10:20 बजे राम जी पासी को ट्रॉमा सेंटर से डिस्चार्ज कर दिया। विश्वविद्यालय की ओर से जारी जानकारी में कहा गया है कि मरीज के उपचार और डिस्चार्ज से संबंधित जरूरी चिकित्सकीय प्रक्रिया पूरी की गई थी।
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