National

spot_img

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश: बिना तय योग्यता शिक्षक नहीं बन सकेंगे, सरकारी नौकरी में भी रोक

By Malay Ojha | Published: 08 September 2026 at 02:10 PM

सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर बड़ा अंतरिम आदेश दिया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि RTE, NCTE और UGC के तहत निर्धारित योग्यता पूरी किए बिना किसी शिक्षक या ट्यूटर की स्कूल-कॉलेज में नियुक्ति नहीं की जा सकती और न ही ऐसे लोगों को सरकारी सेवा में समायोजित किया जा सकता है। यह अंतरिम निर्देश असम से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान दिया गया।

चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहन की पीठ ने कहा कि शिक्षकों की नियुक्ति में संबंधित कानून और नियमों में तय शैक्षणिक व पेशेवर योग्यता का पालन जरूरी है। कोर्ट ने इस स्तर पर साफ कर दिया कि केवल किसी व्यक्ति के पहले से किसी संस्थान में काम करने के आधार पर उसे शिक्षक के पद पर नियुक्त या सरकारी सेवा में शामिल करने का रास्ता नहीं बनाया जा सकता।

बच्चों की शिक्षा की गुणवत्ता पर कोई समझौता नहीं
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने शिक्षा की गुणवत्ता के सवाल को भी अहम माना। पीठ ने कहा कि बच्चों को अच्छी गुणवत्ता वाली शिक्षा मिलना संविधान के अनुच्छेद 21A से जुड़ा मौलिक अधिकार है। ऐसे में शिक्षकों की योग्यता से समझौता करने वाली व्यवस्था को हल्के में नहीं लिया जा सकता।

असम की योजना को लेकर उठे सवाल
मामला असम में शिक्षकों और शैक्षणिक संस्थानों के कर्मचारियों की सेवाओं के सरकारीकरण से जुड़ी योजनाओं को चुनौती देने वाली याचिका से सामने आया है। याचिका में आरोप है कि निर्धारित योग्यता पूरी नहीं करने वाले लोगों को भी सरकारी सेवा में शामिल करने का रास्ता दिया जा रहा है। याचिकाकर्ता ने इसे संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत समानता और निष्पक्ष अवसर के अधिकार के खिलाफ बताया है।

‘ट्यूटर’ कहकर नियमों से बचने पर भी सवाल
सुनवाई के दौरान शिक्षकों के एक वर्ग को ‘ट्यूटर’ के रूप में रखने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि जिन लोगों के पास शिक्षक पद के लिए जरूरी योग्यता नहीं है, उन्हें ट्यूटर की श्रेणी में रखकर बाद में सरकारी सेवा में शामिल करने की व्यवस्था का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

असम के कानून में शिक्षक और ट्यूटर का अंतर
असम के संबंधित कानून में शिक्षक पद के लिए RTE, NCTE और UGC समेत निर्धारित नियमों के तहत शैक्षणिक और पेशेवर योग्यता जरूरी रखी गई है। वहीं, जरूरी योग्यता पूरी नहीं करने वाले कुछ कर्मचारियों को अलग श्रेणी में ट्यूटर के रूप में रखने का प्रावधान रहा है। संबंधित प्रावधानों में यह भी कहा गया है कि निर्धारित योग्यता हासिल करने के बाद ही उन्हें शिक्षक के पद पर अपग्रेड किया जा सकता है।

सरकारी नौकरी में सीधे समायोजन पर भी रोक
सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम तौर पर निर्देश दिया है कि निर्धारित वैधानिक योग्यता पूरी नहीं करने वाले शिक्षकों या ट्यूटरों को सरकारी सेवा में नियुक्त या समायोजित न किया जाए। कोर्ट ने यह निर्देश उस याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया है, जिसमें बिना निष्पक्ष और पारदर्शी प्रतियोगी भर्ती प्रक्रिया के सरकारी सेवा में शामिल किए जाने की व्यवस्था पर सवाल उठाए गए हैं।

आगे की सुनवाई में साफ होगी व्यवस्था
यह आदेश फिलहाल अंतरिम प्रकृति का है और असम से जुड़े मामले में आया है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर आगे की सुनवाई का रास्ता खुला रखा है। ऐसे में इस आदेश के अंतिम प्रभाव को अगली सुनवाई और कोर्ट के आगे के आदेशों के आधार पर देखा जाएगा।

📢 बड़ी खबर आते ही सबसे पहले जानना चाहते हैं?
Aryavarta Live के WhatsApp Channel से जुड़ें और हर महत्वपूर्ण अपडेट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।

WhatsApp चैनल जॉइन करें
Breaking Hindi News और ताज़ा अपडेट्स पाएं सबसे पहले Aryavarta Live पर। यहां आपको भारत, पाकिस्तान, अमेरिका समेत दुनिया भर की महत्वपूर्ण खबरें मिलेंगी। खेल, मनोरंजन, व्यापार, टेक्नोलॉजी, क्राइम, उत्तर प्रदेश और बिहार की हर बड़ी खबर पढ़ने के लिए जुड़े रहें Aryavarta Live के साथ।

International

spot_img

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश: बिना तय योग्यता शिक्षक नहीं बन सकेंगे, सरकारी नौकरी में भी रोक

By Malay Ojha | Published: 08 September 2026 at 02:10 PM

सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर बड़ा अंतरिम आदेश दिया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि RTE, NCTE और UGC के तहत निर्धारित योग्यता पूरी किए बिना किसी शिक्षक या ट्यूटर की स्कूल-कॉलेज में नियुक्ति नहीं की जा सकती और न ही ऐसे लोगों को सरकारी सेवा में समायोजित किया जा सकता है। यह अंतरिम निर्देश असम से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान दिया गया।

चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहन की पीठ ने कहा कि शिक्षकों की नियुक्ति में संबंधित कानून और नियमों में तय शैक्षणिक व पेशेवर योग्यता का पालन जरूरी है। कोर्ट ने इस स्तर पर साफ कर दिया कि केवल किसी व्यक्ति के पहले से किसी संस्थान में काम करने के आधार पर उसे शिक्षक के पद पर नियुक्त या सरकारी सेवा में शामिल करने का रास्ता नहीं बनाया जा सकता।

बच्चों की शिक्षा की गुणवत्ता पर कोई समझौता नहीं
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने शिक्षा की गुणवत्ता के सवाल को भी अहम माना। पीठ ने कहा कि बच्चों को अच्छी गुणवत्ता वाली शिक्षा मिलना संविधान के अनुच्छेद 21A से जुड़ा मौलिक अधिकार है। ऐसे में शिक्षकों की योग्यता से समझौता करने वाली व्यवस्था को हल्के में नहीं लिया जा सकता।

असम की योजना को लेकर उठे सवाल
मामला असम में शिक्षकों और शैक्षणिक संस्थानों के कर्मचारियों की सेवाओं के सरकारीकरण से जुड़ी योजनाओं को चुनौती देने वाली याचिका से सामने आया है। याचिका में आरोप है कि निर्धारित योग्यता पूरी नहीं करने वाले लोगों को भी सरकारी सेवा में शामिल करने का रास्ता दिया जा रहा है। याचिकाकर्ता ने इसे संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत समानता और निष्पक्ष अवसर के अधिकार के खिलाफ बताया है।

‘ट्यूटर’ कहकर नियमों से बचने पर भी सवाल
सुनवाई के दौरान शिक्षकों के एक वर्ग को ‘ट्यूटर’ के रूप में रखने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि जिन लोगों के पास शिक्षक पद के लिए जरूरी योग्यता नहीं है, उन्हें ट्यूटर की श्रेणी में रखकर बाद में सरकारी सेवा में शामिल करने की व्यवस्था का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

असम के कानून में शिक्षक और ट्यूटर का अंतर
असम के संबंधित कानून में शिक्षक पद के लिए RTE, NCTE और UGC समेत निर्धारित नियमों के तहत शैक्षणिक और पेशेवर योग्यता जरूरी रखी गई है। वहीं, जरूरी योग्यता पूरी नहीं करने वाले कुछ कर्मचारियों को अलग श्रेणी में ट्यूटर के रूप में रखने का प्रावधान रहा है। संबंधित प्रावधानों में यह भी कहा गया है कि निर्धारित योग्यता हासिल करने के बाद ही उन्हें शिक्षक के पद पर अपग्रेड किया जा सकता है।

सरकारी नौकरी में सीधे समायोजन पर भी रोक
सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम तौर पर निर्देश दिया है कि निर्धारित वैधानिक योग्यता पूरी नहीं करने वाले शिक्षकों या ट्यूटरों को सरकारी सेवा में नियुक्त या समायोजित न किया जाए। कोर्ट ने यह निर्देश उस याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया है, जिसमें बिना निष्पक्ष और पारदर्शी प्रतियोगी भर्ती प्रक्रिया के सरकारी सेवा में शामिल किए जाने की व्यवस्था पर सवाल उठाए गए हैं।

आगे की सुनवाई में साफ होगी व्यवस्था
यह आदेश फिलहाल अंतरिम प्रकृति का है और असम से जुड़े मामले में आया है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर आगे की सुनवाई का रास्ता खुला रखा है। ऐसे में इस आदेश के अंतिम प्रभाव को अगली सुनवाई और कोर्ट के आगे के आदेशों के आधार पर देखा जाएगा।

📢 बड़ी खबर आते ही सबसे पहले जानना चाहते हैं?
Aryavarta Live के WhatsApp Channel से जुड़ें और हर महत्वपूर्ण अपडेट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।

WhatsApp चैनल जॉइन करें
Breaking Hindi News और ताज़ा अपडेट्स पाएं सबसे पहले Aryavarta Live पर। यहां आपको भारत, पाकिस्तान, अमेरिका समेत दुनिया भर की महत्वपूर्ण खबरें मिलेंगी। खेल, मनोरंजन, व्यापार, टेक्नोलॉजी, क्राइम, उत्तर प्रदेश और बिहार की हर बड़ी खबर पढ़ने के लिए जुड़े रहें Aryavarta Live के साथ।

National

spot_img

International

spot_img
RELATED ARTICLES