By Malay Ojha | Published: 31 August 2026 at 07:55 PM
दिल्ली में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR के तहत सोमवार को जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। राजधानी के 1,45,10,299 पुराने पंजीकृत मतदाताओं में से 97,53,577 नाम ही ड्राफ्ट सूची में शामिल किए गए हैं। यानी 47,56,722 नाम इस ड्राफ्ट में नहीं हैं। हालांकि इसे अभी अंतिम तौर पर वोट कटना नहीं माना जा सकता।
जिन मतदाताओं का नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं है, वे 31 अगस्त से 30 सितंबर तक अपना दावा दाखिल कर सकते हैं। चुनाव अधिकारियों के मुताबिक इसके लिए फॉर्म-6 और जरूरी दस्तावेज जमा करने होंगे। दावों की जांच के बाद पात्र पाए जाने वाले मतदाताओं के नाम अंतिम सूची में जोड़े जा सकते हैं। अंतिम SIR वोटर लिस्ट 4 नवंबर को जारी होनी है।
करीब 67 फीसदी मतदाताओं का रिकॉर्ड मिला
दिल्ली में SIR के दौरान करीब डेढ़ महीने तक घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन किया गया। इस प्रक्रिया में 67.2 फीसदी मतदाताओं के एन्यूमरेशन फॉर्म जमा कर उन्हें डिजिटल रिकॉर्ड में शामिल किया गया। यही संख्या ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में भी दिखाई दे रही है। बाकी मतदाताओं के फॉर्म सत्यापन के दौरान जमा नहीं हो सके।
47 लाख नामों का मतलब क्या है?
ड्राफ्ट सूची से बाहर हुए 47,56,722 मतदाताओं को अलग-अलग श्रेणियों में रखा गया है। इनमें ऐसे लोग शामिल हैं जो अपने पते पर नहीं मिले, दूसरी जगह चले गए, मृत पाए गए या जिनकी एक से ज्यादा एंट्री मिली। इस पूरी श्रेणी को ASDDO यानी Absent, Shifted, Dead, Duplicate और Others के तौर पर दर्ज किया गया है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि सभी 47.56 लाख लोगों को मृत या फर्जी घोषित कर दिया गया है।
सबसे ज्यादा मामले पते से जुड़े
चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक 43,32,775 मतदाता या तो अपने पंजीकृत पते पर नहीं मिले या दूसरी जगह जा चुके थे। इसके अलावा 1,41,535 मतदाताओं की एक से ज्यादा जगह एंट्री मिली, जबकि 2,82,412 मतदाताओं को मृत बताया गया है। बाकी मामले अन्य श्रेणियों में रखे गए हैं।
अब असली परीक्षा दावे-आपत्तियों की
SIR का मकसद वोटर लिस्ट को अपडेट करना और उसमें मौजूद गलत, पुरानी या दोहरी प्रविष्टियों को ठीक करना है। लेकिन इतनी बड़ी संख्या में नाम ड्राफ्ट से बाहर होने के बाद अब दावे और आपत्तियों का चरण सबसे अहम हो गया है। खासकर उन लोगों के लिए, जो दिल्ली में रह रहे हैं और वोट देने के पात्र हैं, लेकिन सत्यापन के दौरान उनका रिकॉर्ड ड्राफ्ट सूची में नहीं आया।
अंतिम सूची में तस्वीर बदल सकती है
इस समय 47.56 लाख नामों को स्थायी रूप से वोटर लिस्ट से हटाया गया मानना जल्दबाजी होगी। 30 सितंबर तक आने वाले दावों की जांच और उसके बाद की प्रक्रिया पूरी होने पर तस्वीर साफ होगी। चुनाव आयोग के तय कार्यक्रम के मुताबिक दावों और आपत्तियों के निपटारे के बाद 4 नवंबर को अंतिम SIR वोटर लिस्ट जारी की जाएगी। इसलिए जिन लोगों का नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं है, उनके लिए अभी सबसे जरूरी है कि वे समय रहते अपना नाम चेक करें और जरूरत पड़ने पर दावा दाखिल करें।
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