By Malay Ojha | Published: 19 June 2026 at 06:57 PM
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के बीच जुबानी जंग खुलकर सामने आ गई है। ट्रंप के उस दावे पर मेलोनी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा था कि जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान इटली की प्रधानमंत्री ने उनके साथ तस्वीर खिंचवाने की गुजारिश की थी। मेलोनी ने इस दावे को पूरी तरह झूठ और मनगढ़ंत बताते हुए कहा कि न उन्होंने कभी ऐसी कोई मांग की और न ही इटली किसी के सामने गिड़गिड़ाता है।
शुक्रवार को मीडिया से बातचीत के दौरान मेलोनी ने ट्रंप के बयान को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा कही गई बातें वास्तविकता से बिल्कुल अलग हैं और उन्हें समझ नहीं आता कि एक सहयोगी देश के नेता के बारे में इस तरह की बातें क्यों कही जा रही हैं।
मेलोनी ने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने अपने सहयोगियों के बारे में इस तरह की टिप्पणी की हो। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि न तो उन्होंने कभी तस्वीर के लिए अनुरोध किया और न ही इटली की गरिमा ऐसी है कि वह किसी के सामने विनती करे।
आखिर ट्रंप ने क्या दावा किया था?
विवाद की शुरुआत उस इंटरव्यू से हुई जिसे ट्रंप ने इटली के एक निजी समाचार चैनल को दिया था। बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा था कि जी-7 सम्मेलन में मेलोनी उनसे बातचीत करके काफी खुश थीं और उन्होंने उनके साथ तस्वीर खिंचवाने की इच्छा जताई थी।
ट्रंप ने यह भी कहा था कि वह सामान्य तौर पर तस्वीरें खिंचवाने से बचते हैं, लेकिन उन्होंने मेलोनी के अनुरोध को स्वीकार कर लिया। उनके इसी बयान ने इटली की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया।
पश्चिमी सहयोगियों के प्रति ट्रंप के रवैये पर भी सवाल
मेलोनी ने सिर्फ तस्वीर वाले दावे का ही जवाब नहीं दिया, बल्कि ट्रंप की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह निराशाजनक है कि अमेरिकी राष्ट्रपति कई बार अपने मित्र देशों के नेताओं के प्रति अधिक कठोर दिखाई देते हैं, जबकि पश्चिमी देशों के विरोधियों के प्रति उतनी सख्ती नहीं दिखाते।
उन्होंने कहा कि सहयोगी देशों के बीच सम्मान और विश्वास सबसे महत्वपूर्ण होता है और सार्वजनिक मंचों पर ऐसे बयान रिश्तों को नुकसान पहुंचाते हैं।
रिश्तों में बढ़ती दूरी की नई कड़ी
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद दोनों नेताओं के बीच बढ़ती दूरी का नया संकेत है। कुछ समय पहले तक मेलोनी को यूरोप में ट्रंप के सबसे करीबी नेताओं में गिना जाता था। दोनों नेताओं के बीच कई मुद्दों पर अच्छी समझ भी देखी गई थी।
हालांकि इस वर्ष पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव और उससे जुड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों के दौरान दोनों नेताओं के विचारों में अंतर खुलकर सामने आया। इसके बाद से रिश्तों में ठंडापन बढ़ने की चर्चा लगातार होती रही है।
कभी ट्रंप की करीबी मानी जाती थीं मेलोनी
जॉर्जिया मेलोनी उन चुनिंदा यूरोपीय नेताओं में शामिल थीं जिन्होंने ट्रंप के राजनीतिक अभियान और नेतृत्व की खुलकर सराहना की थी। वह उनके शपथ ग्रहण समारोह में भी शामिल हुई थीं और उस कार्यक्रम में मौजूद प्रमुख यूरोपीय नेताओं में उनका नाम शामिल था।
लेकिन बाद के महीनों में कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर दोनों नेताओं के रुख अलग-अलग दिखाई दिए। इससे पहले भी कुछ मामलों में दोनों के बीच सार्वजनिक मतभेद सामने आ चुके हैं।
इटली सरकार ने भी जताई नाराजगी
ट्रंप के बयान के बाद इटली सरकार के भीतर भी नाराजगी देखने को मिली है। सरकार के वरिष्ठ नेताओं ने इसे केवल प्रधानमंत्री का नहीं बल्कि पूरे इटली का अपमान बताया है।
इसी नाराजगी के बीच इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो तजानी ने अपना प्रस्तावित अमेरिका दौरा रद्द कर दिया है। उन्होंने कहा कि किसी भी सहयोगी देश के नेता के बारे में इस तरह की टिप्पणी स्वीकार नहीं की जा सकती।
क्या दोनों देशों के रिश्तों पर पड़ेगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और इटली के रणनीतिक संबंध इतने मजबूत हैं कि किसी एक बयान से उनमें बड़ा बदलाव नहीं आएगा। लेकिन ट्रंप और मेलोनी के बीच बढ़ती सार्वजनिक तल्खी आने वाले समय में कूटनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।
फिलहाल तस्वीर को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का बड़ा विषय बन चुका है और दोनों देशों के राजनीतिक गलियारों में इसकी गूंज सुनाई दे रही है।
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