By aryavartalive | Published: 30 July 2026 at 04:47 PM
नई दिल्ली: राज्यसभा में गुरुवार को पेपर लीक रोकने वाले विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष और विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे के एक बयान से सदन का माहौल गरमा गया। खरगे ने सरकार पर पेपर लीक मामलों में कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए और इसके बाद शिक्षा व्यवस्था, विश्वविद्यालयों और आरएसएस को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने मनुस्मृति का हवाला देते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में आपत्तिजनक सामग्री शामिल की जा रही है और आरोप लगाया कि विश्वविद्यालयों में आरएसएस से जुड़े लोगों को जगह दी जा रही है। उनके इस बयान पर सत्ता पक्ष ने कड़ा विरोध जताया। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि ऐसे बयान समाज में अशांति पैदा कर सकते हैं, जबकि सभापति ने खरगे से उनके दावों को प्रमाणित करने को कहा और मनुस्मृति से जुड़ी टिप्पणी को रिकॉर्ड से हटाने की बात कही।
राज्यसभा में चर्चा की शुरुआत पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी के मुद्दे से हुई। खरगे ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछले करीब 10 वर्षों में पेपर लीक के 152 मामले सामने आए हैं, लेकिन एक भी दोषी को सजा नहीं मिली। उन्होंने सवाल किया कि जब लगातार परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक हो रहे थे तो सरकार क्या कर रही थी और जांच एजेंसियां क्या कर रही थीं? खरगे ने कहा कि देश के युवाओं ने पढ़ाई और नौकरी की उम्मीद के साथ मेहनत की, लेकिन बार-बार होने वाली परीक्षा संबंधी गड़बड़ियों ने उनकी उम्मीदों को चोट पहुंचाई है। उन्होंने सरकार पर युवाओं की आकांक्षाओं को पूरा करने में विफल रहने का आरोप लगाया।
शिक्षा बजट और निजीकरण पर भी सरकार को घेरा
खरगे ने कहा कि शिक्षा किसी खास वर्ग या कुछ लोगों की जागीर नहीं हो सकती। उनका आरोप था कि देश में शिक्षा पर सकल घरेलू उत्पाद का छह फीसदी खर्च होना चाहिए, लेकिन मौजूदा खर्च इसके मुकाबले काफी कम है। उन्होंने कहा कि पर्याप्त सरकारी निवेश नहीं होने के कारण शिक्षा का क्षेत्र धीरे-धीरे निजी हाथों में जा रहा है, जिसका सबसे ज्यादा असर गरीब और दलित परिवारों के बच्चों पर पड़ रहा है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि शिक्षा के क्षेत्र में समान अवसर की जगह एक ऐसी व्यवस्था बन रही है, जिसमें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए उच्च शिक्षा हासिल करना मुश्किल होता जा रहा है।
‘मनुवादी सोच’ का जिक्र करते ही सदन में बढ़ा हंगामा
खरगे ने सरकार की नीतियों पर हमला बोलते हुए उन्हें कथित तौर पर मनुवादी सोच से जोड़ दिया। उन्होंने कहा कि मौजूदा नीतियां उन्हें मनुस्मृति में बताए गए विचारों की याद दिलाती हैं। इसी दौरान सत्ता पक्ष के सांसदों ने विरोध शुरू कर दिया और सदन में शोर बढ़ गया। हालांकि, सभापति ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि विपक्ष के नेता को पहले अपनी बात पूरी करने दी जाए। इसके बाद खरगे ने मनुस्मृति में शूद्रों के वेद पढ़ने और सुनने को लेकर कथित तौर पर लिखी बातों का हिंदी अनुवाद सदन में पढ़कर सुनाया।
खरगे बोले- ‘ये आरएसएस का सिलेबस है’
खरगे ने कहा कि सरकार भी अच्छे शिक्षक और अच्छे कुलपति विश्वविद्यालयों में लाने की बात करती है, लेकिन दूसरी तरफ पाठ्यक्रमों में ऐसी सामग्री शामिल की जा रही है, जिस पर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने मनुस्मृति से जुड़ी कथित पंक्तियों का हवाला देते हुए कहा कि ऐसी सामग्री को पाठ्यक्रम से हटाया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालयों में आरएसएस से जुड़े लोगों को बड़ी संख्या में जगह दी जा रही है। इसी दौरान खरगे ने कहा, ‘ये आरएसएस का सिलेबस है।’ उन्होंने ऐसे विचारों की निंदा करते हुए कहा कि इस तरह की सामग्री को शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए।
नड्डा ने कहा- खरगे का बयान तथ्यों से परे, प्रमाण पेश करें
खरगे के बयान के बाद सत्ता पक्ष की ओर से जोरदार विरोध हुआ। केंद्रीय मंत्री और सदन के नेता जेपी नड्डा ने कहा कि खरगे ने जो बातें कहीं, वे तथ्यों से परे हैं और उनके बयान से समाज में अशांति पैदा हो सकती है। नड्डा ने कहा कि यदि विपक्ष के नेता मनुस्मृति के किसी मूल पाठ के आधार पर अपनी बात रख रहे हैं तो उन्हें उसका प्रमाण देना चाहिए। उन्होंने खरगे से अपने दावे को प्रमाणित करने के लिए मूल प्रति दिखाने की मांग की।
सभापति ने खरगे से कहा- अपने दावे को प्रमाणित कीजिए
मामला बढ़ने पर सभापति ने भी हस्तक्षेप किया। उन्होंने खरगे से उनके द्वारा सदन में कही गई बातों को प्रमाणित करने के लिए कहा। सभापति ने यह भी संकेत दिया कि मनुस्मृति को लेकर खरगे द्वारा कही गई आपत्तिजनक सामग्री को सदन की कार्यवाही के रिकॉर्ड से हटाया जा सकता है। इस बीच सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक होती रही। कुछ देर के लिए सदन में माहौल काफी गरम हो गया।
सुधांशु त्रिवेदी ने कई पुस्तकों का दिया हवाला
इसके बाद जेपी नड्डा ने भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी को इस मुद्दे पर अपनी बात रखने के लिए कहा। त्रिवेदी ने अपने वक्तव्य में कई पुस्तकों और ऐतिहासिक संदर्भों का हवाला दिया। उन्होंने कलकत्ता हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश विलियम जोंस और डॉ. भीमराव आंबेडकर की पुस्तकों का संदर्भ देते हुए खरगे के दावों को प्रमाणित करने की जरूरत पर जोर दिया। हालांकि, सभापति ने बीच में हस्तक्षेप करते हुए उन्हें टोका। इसी दौरान कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने एक पुस्तक सदन में दिखाते हुए कहा कि यह किताब मौजूदा सरकार के कार्यकाल में प्रकाशित हुई है और बाजार में उपलब्ध है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर इस सामग्री पर आपत्ति है तो इसे प्रतिबंधित क्यों नहीं किया गया?
पेपर लीक रोकने वाले विधेयक में क्या है?
जिस विधेयक पर राज्यसभा में चर्चा हो रही है, उसका मकसद सार्वजनिक परीक्षाओं में नकल, पेपर लीक और संगठित गड़बड़ी पर शिकंजा कसना है। प्रस्तावित संशोधन में दोषियों के लिए सजा और जुर्माने को बढ़ाने के साथ जांच और सुनवाई की प्रक्रिया को समयबद्ध करने का प्रावधान है।
विधेयक में व्यक्तिगत स्तर पर अनुचित साधन अपनाने के मामले में अधिकतम जुर्माना 50 लाख रुपये तक करने और सजा की अवधि बढ़ाने का प्रस्ताव है। परीक्षा से जुड़े सेवा प्रदाताओं पर भी ज्यादा कड़ी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा जांच के लिए विशेष कार्यबल और मामलों की जल्द सुनवाई के लिए विशेष त्वरित अदालतों का प्रावधान भी प्रस्तावित है।
Aryavarta Live के WhatsApp Channel से जुड़ें और हर महत्वपूर्ण अपडेट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।
WhatsApp चैनल जॉइन करें

