By Malay Ojha | Published: 20 June 2026 at 10:38 AM
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की तेज रफ्तार ने नौकरी और करियर की दुनिया को पूरी तरह बदलना शुरू कर दिया है। ऐसे में डब्ल्यूपीयू गोवा ने साफ कहा है कि आने वाले समय में सिर्फ एक विषय की पढ़ाई छात्रों के लिए काफी नहीं होगी। विश्वविद्यालय का मानना है कि भविष्य उन्हीं युवाओं का होगा जो लगातार सीखते रहेंगे, अलग-अलग क्षेत्रों की समझ रखेंगे और बदलती परिस्थितियों के मुताबिक खुद को ढाल सकेंगे।
गोवा में आयोजित ओपन हाउस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षाविदों, छात्रों और अभिभावकों ने भविष्य की शिक्षा और रोजगार के बदलते स्वरूप पर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि अब विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी केवल छात्रों को पहली नौकरी दिलाने तक सीमित नहीं रह सकती।
छात्रों को पूरी जिंदगी के करियर बदलावों के लिए करना होगा तैयार
कार्यक्रम में कहा गया कि आज की दुनिया में एक व्यक्ति अपने जीवन में कई बार करियर बदल सकता है। नई तकनीकों के आने से पुराने काम खत्म हो रहे हैं और नए पेशे लगातार सामने आ रहे हैं। ऐसे में छात्रों को सिर्फ एक नौकरी नहीं, बल्कि पूरे पेशेवर जीवन के उतार-चढ़ाव और नए अवसरों के लिए तैयार करना जरूरी हो गया है।
कई विषयों की समझ बनेगी सबसे बड़ी ताकत
चर्चा के दौरान डब्ल्यूपीयू गोवा के ट्रांसडिसिप्लिनरी शिक्षा मॉडल पर विशेष जोर दिया गया। इस मॉडल का उद्देश्य छात्रों को किसी एक विषय तक सीमित रखने के बजाय अलग-अलग क्षेत्रों की समझ देना है, ताकि वे जटिल समस्याओं का समाधान निकाल सकें और नई परिस्थितियों में बेहतर फैसले ले सकें।
‘सीखते रहना ही भविष्य की सबसे बड़ी जरूरत’
विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर प्रोफेसर वाल्टर लील ने कहा कि आज के समय में शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबों तक सीमित नहीं रह सकता। छात्रों को व्यावहारिक अनुभव, उद्योग जगत से जुड़ाव और वैश्विक सोच के साथ तैयार करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जो छात्र लगातार सीखते रहेंगे और बदलाव को अपनाएंगे, वही आने वाले समय में नेतृत्व की भूमिका निभाएंगे।
पहली नौकरी से आगे की सोच जरूरी
प्रो-वाइस चांसलर डॉ. आशीष भारद्वाज ने कहा कि विश्वविद्यालयों को अब यह सोच बदलनी होगी कि डिग्री मिलते ही छात्रों का भविष्य सुरक्षित हो जाता है। असली चुनौती यह है कि छात्रों को उन अवसरों और बदलावों के लिए तैयार किया जाए जिनकी आज कल्पना भी नहीं की जा सकती।
तकनीक जितनी जरूरी, उतना ही जरूरी लचीलापन
कार्यक्रम में इस बात पर भी चर्चा हुई कि तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ जिज्ञासा, नई चीजें सीखने की इच्छा और परिस्थितियों के अनुसार खुद को बदलने की क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो गई है। आने वाले वर्षों में वही लोग सबसे ज्यादा सफल होंगे जो अलग-अलग क्षेत्रों की जानकारी को एक साथ जोड़कर काम कर सकेंगे।
नए दौर में उभर रहे हैं नए पेशे
विशेषज्ञों ने कहा कि उद्योग जगत जिस तेजी से बदल रहा है, उसके मुकाबले पारंपरिक शिक्षा व्यवस्था पीछे छूटती दिखाई दे रही है। कई ऐसे रोजगार सामने आ रहे हैं जिनके बारे में कुछ साल पहले तक किसी ने सोचा भी नहीं था। यही वजह है कि छात्रों को बहुआयामी शिक्षा देने की जरूरत पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है।
इन पाठ्यक्रमों में दाखिले का मौका
डब्ल्यूपीयू गोवा फिलहाल कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग, प्रबंधन अध्ययन, इंटीग्रेटेड प्रोडक्ट डिजाइन, कम्युनिकेशन डिजाइन और मनोविज्ञान जैसे पाठ्यक्रमों की पढ़ाई करा रहा है। विश्वविद्यालय का दावा है कि इन पाठ्यक्रमों को भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
उच्च शिक्षा के सामने नई चुनौती
कार्यक्रम के अंत में इस बात पर सहमति बनी कि आने वाले वर्षों में उच्च शिक्षा संस्थानों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी छात्रों को सिर्फ रोजगार योग्य बनाना नहीं, बल्कि उन्हें ऐसे नागरिक और पेशेवर के रूप में तैयार करना होगी जो बदलती दुनिया में हर नई चुनौती और अवसर का सामना कर सकें।
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