By Malay Ojha | Published: 26 July 2026 at 09:38 AM
पटना में नीट परीक्षा प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन में शामिल होना तेज प्रताप यादव को भारी पड़ गया। शनिवार को बिहार बंद के दौरान प्रदर्शनकारियों के साथ धरने पर बैठे जनशक्ति जनता दल के प्रमुख तेज प्रताप यादव को पुलिस ने हिरासत में लिया था। देर रात अदालत में पेशी के बाद उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। हिरासत में लिए जाने के दौरान तेज प्रताप ने छात्रों के आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि वह उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं और जरूरत पड़ने पर छात्रों के अधिकारों के लिए जान देने को भी तैयार हैं।
जानकारी के मुताबिक, तेज प्रताप यादव शनिवार को पटना के राम गुलाम चौक पहुंचे थे। यहां नीट प्रश्नपत्र लीक मामले और छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के विरोध में प्रदर्शन चल रहा था। तेज प्रताप भी प्रदर्शनकारियों के बीच पहुंच गए और उनके साथ धरने में शामिल हो गए। उनके प्रदर्शन में शामिल होने के कुछ ही समय बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। इसके बाद पुलिस की गाड़ी से उन्हें अदालत ले जाया गया, जहां देर रात सुनवाई के बाद उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया गया।
पुलिस की गाड़ी से बोले- छात्रों के साथ खड़े हैं
हिरासत में लिए जाने के बाद जब तेज प्रताप यादव को पुलिस की गाड़ी में ले जाया जा रहा था, तब उन्होंने छात्रों के समर्थन में अपना रुख साफ किया। उन्होंने कहा कि वह छात्रों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। तेज प्रताप ने यह भी कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो वह छात्रों के अधिकारों के लिए अपनी जान देने को भी तैयार हैं। उनके इस बयान के बाद छात्र आंदोलन में उनकी भूमिका को लेकर राजनीतिक चर्चा और तेज हो गई है।
तेज प्रताप की गिरफ्तारी से बढ़ी सियासी हलचल
तेज प्रताप यादव की गिरफ्तारी ऐसे समय हुई है, जब नीट प्रश्नपत्र लीक का मुद्दा बिहार की राजनीति में लगातार गर्माया हुआ है। छात्र संगठनों की ओर से परीक्षा व्यवस्था में सुधार और कथित गड़बड़ियों की जांच की मांग की जा रही है। वहीं, प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। ऐसे माहौल में तेज प्रताप का छात्रों के बीच पहुंचना और फिर हिरासत में लिया जाना राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नई पार्टी बनाने के बाद लगातार आक्रामक तेवर
तेज प्रताप यादव पिछले कुछ समय से बिहार की राजनीति में अपने अलग राजनीतिक रास्ते को लेकर चर्चा में हैं। राष्ट्रीय जनता दल से अलग होने के बाद उन्होंने जनशक्ति जनता दल का गठन किया है। नई पार्टी बनाने के बाद से ही वह बिहार सरकार और सत्ताधारी दलों पर लगातार निशाना साधते रहे हैं। छात्र आंदोलन में उनकी सक्रिय भागीदारी को भी इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि से जोड़कर देखा जा रहा है।
अभिजीत दिपके से भी की थी बिहार आने की अपील
तेज प्रताप यादव ने हाल ही में कॉकरोच जनता पार्टी के नेता अभिजीत दिपके से बिहार आने की अपील की थी। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए उनसे बिहार की राजनीतिक परिस्थितियों में हस्तक्षेप करने और सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के खिलाफ राजनीतिक संघर्ष में सहयोग करने की अपील की थी। तेज प्रताप की यह अपील उस समय सामने आई थी, जब कॉकरोच जनता पार्टी ने नीट प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर दिल्ली में चल रहा अपना प्रदर्शन समाप्त किया था।
आंदोलन से जुड़ी राजनीति में तेज प्रताप की एंट्री
तेज प्रताप की ओर से अभिजीत दिपके को बिहार आने का न्योता और इसके बाद छात्र आंदोलन में सीधे शामिल होना, दोनों घटनाओं को राजनीतिक नजरिए से भी देखा जा रहा है। एक तरफ वह छात्रों की मांगों के समर्थन में सड़क पर उतर रहे हैं, तो दूसरी ओर विपक्षी और सरकार विरोधी समूहों को एकजुट करने की कोशिश करते दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में उनकी गिरफ्तारी ने बिहार की राजनीति में इस पूरे घटनाक्रम को और ज्यादा चर्चा में ला दिया है।
अब 14 दिन की न्यायिक हिरासत में रहेंगे
फिलहाल अदालत के आदेश के बाद तेज प्रताप यादव को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। उनकी गिरफ्तारी और जेल भेजे जाने के बाद जनशक्ति जनता दल की ओर से आगे की रणनीति क्या होगी, इस पर भी सबकी नजर है। वहीं, छात्र आंदोलन से जुड़े संगठनों की ओर से भी इस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया आने की संभावना है। नीट मामले को लेकर पहले से जारी राजनीतिक और छात्र आंदोलन के बीच तेज प्रताप की गिरफ्तारी ने बिहार में इस मुद्दे को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।
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