By Malay Ojha | Published: 26 July 2026 at 12:15 PM
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 20 जुलाई को दिल्ली में हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित बल प्रयोग को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा है। राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज और पैलेट गन के कथित इस्तेमाल पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि अगर छात्रों के खिलाफ ऐसे बल प्रयोग की अनुमति गृह मंत्री ने नहीं दी थी, तो फिर इसका आदेश किसने दिया। उन्होंने प्रदर्शन के दौरान सादे कपड़ों में नजर आए लोगों की भूमिका पर भी गृह मंत्री से जवाब मांगा है।
राहुल गांधी ने अपनी चिट्ठी में कहा है कि शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ जिस तरह की कार्रवाई की गई, उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने मीडिया और सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो का हवाला देते हुए कहा कि इन तस्वीरों और वीडियो से प्रदर्शनकारियों के गंभीर रूप से घायल होने की बात सामने आती है। राहुल गांधी ने खास तौर पर कथित पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर स्पष्टीकरण मांगा है। हालांकि, सुरक्षा बलों की ओर से पैलेट गन चलाए जाने के आरोप से इनकार किए जाने की खबरें भी सामने आई हैं और पूरे मामले को लेकर जांच की बात कही गई है।
19 साल के साहिल लोछाब का भी किया जिक्र
राहुल गांधी ने अपनी चिट्ठी में 19 वर्षीय छात्र साहिल लोछाब का जिक्र किया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, साहिल 20 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान घायल हुए थे और उनकी दाईं आंख की रोशनी को लेकर गंभीर चिंता जताई गई है। रिपोर्टों में उनके चेहरे और आंख के आसपास पैलेट जैसे घावों का भी उल्लेख किया गया है। राहुल गांधी ने इस मामले को उठाते हुए कहा है कि एक युवा छात्र को ऐसी गंभीर चोट लगना बेहद चिंताजनक है और इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
घायल पत्रकार का भी पत्र में उल्लेख
राहुल गांधी ने गृह मंत्री को लिखे पत्र में प्रदर्शन के दौरान घायल हुए एक पत्रकार का भी जिक्र किया है। उन्होंने कहा कि घटना से जुड़े वीडियो और सामने आई जानकारियां इस पूरे घटनाक्रम पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। विपक्ष के नेता के तौर पर राहुल गांधी ने सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा बलों ने किस स्तर तक बल प्रयोग किया और क्या इसके लिए पहले से कोई निर्देश जारी किए गए थे।
राहुल गांधी ने अमित शाह से पूछे ये दो सवाल
राहुल गांधी ने गृह मंत्री अमित शाह से दो मुख्य सवालों का जवाब मांगा है। पहला सवाल पैलेट गन समेत घातक या गंभीर चोट पहुंचाने वाले बल के कथित इस्तेमाल को लेकर है। उन्होंने पूछा कि क्या छात्रों के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई की अनुमति गृह मंत्री ने दी थी? अगर नहीं, तो फिर इसकी अनुमति किस अधिकारी या किस स्तर से दी गई?
सादे कपड़ों में दिखे लोगों की भूमिका पर भी सवाल
राहुल गांधी का दूसरा सवाल प्रदर्शन के दौरान सादे कपड़ों में नजर आए लोगों को लेकर है। उन्होंने पूछा कि वीडियो में छात्रों पर लाठियां बरसाते दिख रहे ये लोग कौन थे? क्या वे पुलिसकर्मी थे या किसी तरह के स्वयंसेवक? अगर वे पुलिस या सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा थे, तो उन्हें सादे कपड़ों में तैनात करने का आदेश किसने दिया था? राहुल गांधी ने इस पूरे मामले में जवाबदेही तय करने की मांग की है।
मामले की जांच को लेकर भी सामने आई जानकारी
20 जुलाई के प्रदर्शन में कथित तौर पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग और पैलेट गन के इस्तेमाल के आरोपों के बाद मामला लगातार चर्चा में है। रिपोर्टों के अनुसार, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के मुख्यालय ने प्रदर्शन के दौरान तैनात त्वरित कार्रवाई बल की भूमिका को लेकर घटना की रिपोर्ट मांगी है। जांच में कथित पैलेट गन के इस्तेमाल के दावे की सच्चाई और किन परिस्थितियों में बल प्रयोग किया गया, इसकी पड़ताल की जा रही है। ऐसे में राहुल गांधी की ओर से गृह मंत्री को लिखी गई चिट्ठी ने इस विवाद को राजनीतिक स्तर पर और बड़ा मुद्दा बना दिया है।
शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार का उठाया मुद्दा
राहुल गांधी ने पत्र के अंत में लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार का मुद्दा उठाया। उनका कहना है कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करने वाले लोगों की बात सुनी जानी चाहिए। सरकार की जिम्मेदारी है कि वह प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करे और उनकी शिकायतों का समाधान बातचीत के जरिए निकाले।
सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग
राहुल गांधी ने कहा कि अगर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाने वाले छात्रों पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग हुआ है, तो इसके लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान होनी चाहिए। उनका कहना है कि लोकतंत्र में असहमति को दबाने के बजाय बातचीत के रास्ते का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। उन्होंने इस तरह की कथित हिंसा को लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताते हुए कहा कि देश के युवा अब जवाब और जवाबदेही मांग रहे हैं।
छात्र प्रदर्शन अब राजनीतिक बहस के केंद्र में
दिल्ली में 20 जुलाई को हुए छात्र प्रदर्शन के बाद यह मामला अब केवल सड़क पर हुए विरोध तक सीमित नहीं रहा है। छात्रों पर कथित लाठीचार्ज, गंभीर चोटों और पैलेट गन के इस्तेमाल के आरोपों ने राजनीतिक बहस को भी तेज कर दिया है। एक तरफ विपक्ष सरकार और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठा रहा है, वहीं दूसरी तरफ पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर आधिकारिक पक्ष और प्रदर्शनकारियों के दावों के बीच अंतर दिखाई दे रहा है। इसी वजह से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग लगातार तेज हो रही है।
अब सबकी नजर गृह मंत्रालय के जवाब पर
राहुल गांधी की चिट्ठी के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि गृह मंत्रालय इन आरोपों पर क्या जवाब देता है। क्या 20 जुलाई की कार्रवाई के दौरान पैलेट गन का इस्तेमाल हुआ था? अगर हुआ, तो उसका आदेश किसने दिया? प्रदर्शन के दौरान सादे कपड़ों में मौजूद लोगों की पहचान क्या थी और उन्हें किसके निर्देश पर तैनात किया गया था? इन सवालों के जवाब सामने आने के बाद ही इस पूरे विवाद की तस्वीर और साफ हो सकेगी।
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