By Malay Ojha | Published: 26 July 2026 at 01:04 PM
काठमांडू: नेपाल सरकार के एक रुपये के नए सिक्के को लेकर लिया गया फैसला भारत और नेपाल के बीच पुराने सीमा विवाद को एक बार फिर चर्चा में ले आया है। रिपोर्टों के मुताबिक, नए सिक्के के डिजाइन में नेपाल का वही राजनीतिक नक्शा बनाए रखने की तैयारी है, जिसमें लिंपियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी को नेपाल का हिस्सा दिखाया गया है। हालांकि, नेपाल राष्ट्र बैंक को सिक्के का अंतिम डिजाइन अभी आधिकारिक तौर पर नहीं मिला है। ऐसे में नए सिक्के पर नक्शे की अंतिम मौजूदगी की औपचारिक पुष्टि डिजाइन मिलने के बाद ही होगी।
नेपाल राष्ट्र बैंक के प्रवक्ता गुरु प्रसाद पौडेल के मुताबिक, नए एक रुपये के सिक्के को लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि सिक्के का अंतिम डिजाइन अभी बैंक के पास नहीं आया है, लेकिन मौजूदा जानकारी के आधार पर माना जा रहा है कि इसमें नेपाल का वही नक्शा रखा जाएगा, जिसमें भारत के साथ विवादित लिंपियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी को नेपाल की सीमा के भीतर दिखाया गया है।
इस पूरे मामले में सबसे दिलचस्प मोड़ कुछ दिन पहले आया था। नेपाल सरकार ने पहले नए एक रुपये के सिक्के से राजनीतिक नक्शे को हटाकर उसकी जगह एक बौद्ध मठ की तस्वीर लगाने का फैसला किया था। इस खबर के सामने आने के बाद नेपाल में राजनीतिक दलों और आम लोगों की ओर से विरोध शुरू हो गया। विरोध करने वालों का तर्क था कि सिक्के से नक्शा हटाने का फैसला देश के क्षेत्रीय दावे को कमजोर करने वाला संदेश दे सकता है।
विरोध बढ़ने के बाद सरकार को अपने फैसले पर फिर विचार करना पड़ा। इसके बाद नए सिक्के पर नेपाल का नक्शा बनाए रखने की दिशा में फैसला किया गया। यही बदलाव अब भारत-नेपाल संबंधों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि नक्शे में शामिल तीनों इलाके लंबे समय से दोनों देशों के बीच सीमा विवाद का विषय रहे हैं।
नया सिक्का पहले वाले से कितना अलग होगा?
नेपाल राष्ट्र बैंक के अनुसार, प्रस्तावित नया एक रुपये का सिक्का पुराने सिक्के से आकार और वजन में अलग हो सकता है। नया सिक्का पहले की तुलना में छोटा और हल्का बनाए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, सिक्के के अंतिम डिजाइन और उस पर बने चित्र को लेकर आधिकारिक रूप से अंतिम जानकारी सामने आना अभी बाकी है।
सिक्के पर नक्शे को बनाए रखने की खबर इसलिए भी अहम है क्योंकि यह केवल मुद्रा के डिजाइन से जुड़ा मामला नहीं है। नेपाल में किसी आधिकारिक प्रतीक या मुद्रा पर देश का राजनीतिक नक्शा दिखाना उसके क्षेत्रीय दावे से भी जोड़कर देखा जाता है। ऐसे में नए सिक्के का डिजाइन दोनों पड़ोसी देशों के बीच पहले से संवेदनशील सीमा विवाद के संदर्भ में राजनीतिक महत्व रखता है।
लिंपियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी पर क्या है विवाद?
लिंपियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी को लेकर भारत और नेपाल के बीच लंबे समय से मतभेद हैं। नेपाल इन क्षेत्रों को अपने क्षेत्र का हिस्सा मानता है, जबकि भारत का कहना है कि ये इलाके भारतीय क्षेत्र में आते हैं। विवाद की जड़ सीमा निर्धारण और काली नदी के उद्गम से जुड़े अलग-अलग दावों में है।
नेपाल का दावा है कि 1816 की सुगौली संधि के अनुसार काली नदी का उद्गम लिंपियाधुरा से माना जाना चाहिए। इसी आधार पर वह लिंपियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी को अपने क्षेत्र का हिस्सा बताता है। दूसरी ओर, भारत इन दावों को स्वीकार नहीं करता और इन क्षेत्रों को उत्तराखंड का हिस्सा मानता है। दोनों देशों के बीच सीमा का बड़ा हिस्सा तय होने के बावजूद कालापानी क्षेत्र का विवाद अब तक पूरी तरह हल नहीं हो पाया है।
2020 में जारी हुआ था नेपाल का नया नक्शा
सीमा विवाद ने मई 2020 में उस समय नया राजनीतिक मोड़ लिया, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार ने नेपाल का संशोधित राजनीतिक नक्शा जारी किया। इस नक्शे में लिंपियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी को नेपाल की सीमा के भीतर दिखाया गया था। बाद में नेपाल की संसद ने इसे मंजूरी दी और देश के आधिकारिक नक्शे को संवैधानिक मान्यता भी दी गई।
भारत ने उस समय नेपाल के नए नक्शे पर आपत्ति जताई थी। भारत का कहना था कि नेपाल ने एकतरफा तरीके से अपने क्षेत्रीय दावे का विस्तार किया है, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। इसके बाद दोनों देशों के बीच इस मुद्दे को लेकर राजनयिक तनाव भी देखने को मिला।
भारत का क्या कहना है?
भारत लगातार यह रुख दोहराता रहा है कि लिंपियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी से जुड़े सीमा विवाद का समाधान दोनों देशों के बीच बातचीत और स्थापित राजनयिक माध्यमों से होना चाहिए। भारत किसी तीसरे पक्ष की भूमिका को भी स्वीकार नहीं करता। जून 2026 में भी भारत ने नेपाल के साथ सीमा विवाद के समाधान के लिए द्विपक्षीय व्यवस्था पर जोर दिया था।
नेपाल की ओर से भी अलग-अलग मौकों पर सीमा विवाद को बातचीत और कूटनीतिक माध्यम से सुलझाने की बात कही जाती रही है। हालांकि, विवादित क्षेत्रों को लेकर दोनों देशों के दावों में अब तक कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है। यही वजह है कि नेपाल की मुद्रा पर विवादित नक्शे को बनाए रखने की खबर सामने आते ही इस पुराने विवाद की चर्चा फिर तेज हो गई है।
सिक्के के बहाने फिर गर्म हुआ सीमा विवाद
फिलहाल नए एक रुपये के सिक्के का अंतिम डिजाइन सामने आने का इंतजार है। नेपाल राष्ट्र बैंक को अंतिम डिजाइन मिलने के बाद ही यह साफ होगा कि सिक्के पर नक्शा किस रूप में दिखाई देगा और उसमें विवादित क्षेत्रों को किस तरह दर्शाया गया है। लेकिन अगर प्रस्तावित डिजाइन के मुताबिक नक्शा सिक्के पर बना रहता है, तो यह मामला भारत और नेपाल के बीच सीमा विवाद के संदर्भ में फिर से राजनीतिक और राजनयिक चर्चा का विषय बन सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम की खास बात यह है कि कुछ ही समय पहले नेपाल सरकार ने सिक्के से राजनीतिक नक्शा हटाकर बौद्ध मठ की तस्वीर लगाने का फैसला किया था। अब विरोध के बाद उसी नक्शे को बनाए रखने की दिशा में बढ़ना यह बताता है कि नेपाल में इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक और जनभावनाएं कितनी संवेदनशील हैं। दूसरी ओर, भारत की स्थिति पहले की तरह स्पष्ट है कि सीमा से जुड़े ऐसे विवादों का समाधान बातचीत के जरिए ही निकाला जाना चाहिए।
अब निगाह इस बात पर है कि नेपाल राष्ट्र बैंक को अंतिम डिजाइन कब मिलता है और नए सिक्के पर वास्तव में कौन-सा चित्र या नक्शा अंकित किया जाता है। यदि विवादित नक्शा ही सिक्के पर जारी होता है, तो भारत-नेपाल सीमा विवाद से जुड़े इस मुद्दे पर दोनों देशों की प्रतिक्रियाएं एक बार फिर महत्वपूर्ण हो सकती हैं।
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