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अखिलेश यादव का केंद्र पर बड़ा हमला, बोले- जो राम मंदिर का चढ़ावा नहीं बचा पाए, वो पेपर लीक कैसे बचाएंगे?

By Malay Ojha | Published: 28 July 2026 at 03:41 PM

लोकसभा में मंगलवार को सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और नकल रोकने से जुड़े संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी का मुद्दा उठाते हुए सरकार पर तंज कसा और कहा, “जो चढ़ावा नहीं बचा पाए, वो पेपर लीक कैसे बचाएंगे।” अखिलेश के इस बयान के बाद सदन की कार्यवाही के दौरान परीक्षा व्यवस्था, युवाओं के भविष्य और सरकार की जवाबदेही को लेकर सियासी बहस तेज हो गई।

अखिलेश यादव ने यह टिप्पणी उस वक्त की, जब लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षा अनुचित साधन निवारण संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा चल रही थी। यह विधेयक सरकारी भर्ती और प्रवेश से जुड़ी सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल और दूसरे अनुचित तरीकों पर लगाम लगाने के लिए कानून को और सख्त करने के उद्देश्य से लाया गया है। अखिलेश ने इसी मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब सरकार राम मंदिर में चढ़ावे की सुरक्षा नहीं कर पाई तो वह पेपर लीक जैसी गंभीर समस्या को कैसे रोक पाएगी।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर भी साधा निशाना
अखिलेश यादव ने पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर भी केंद्र सरकार पर कटाक्ष किया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधान का इस्तीफा लेकर प्रधानमंत्री को बचाने की कोशिश की गई। परीक्षा में गड़बड़ी और पेपर लीक के मुद्दे पर सरकार की जवाबदेही तय करने की मांग लंबे समय से विपक्ष की राजनीति का हिस्सा रही है। मंगलवार को सदन में भी यह मुद्दा एक बार फिर जोरदार तरीके से उठा।

पेपर लीक पर सरकार को घेरने में जुटा विपक्ष
लोकसभा में विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा के मुद्दे को लेकर गंभीर नहीं है और सुधार की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। उन्होंने इस विधेयक को सरकार की विफलता का सबूत बताते हुए कहा कि कानून को सख्त करने के बजाय व्यवस्था में मौजूद कमियों को दूर करने की जरूरत है।

असम की बाढ़ और मौतों का भी उठा मुद्दा
गौरव गोगोई ने सदन में असम में आई बाढ़ का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि बाढ़ के कारण राज्य में करीब 70 लोगों की मौत हुई है। उन्होंने केंद्र सरकार से असम के प्रभावित लोगों के लिए विशेष आर्थिक पैकेज देने की मांग की। इस दौरान उन्होंने कहा कि बाढ़ से जूझ रहे लोगों को तत्काल मदद और राहत की जरूरत है।

सरकार बोली- कानून में सजा और जुर्माना दोनों होंगे सख्त
विधेयक पर सरकार की ओर से जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि संशोधन का मकसद सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों पर प्रभावी रोक लगाना और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई को और कड़ा करना है। उन्होंने कहा कि सरकार परीक्षा व्यवस्था में छात्रों और युवाओं का भरोसा बहाल करना चाहती है। इसके लिए कानून में सजा और जुर्माने के प्रावधानों को बढ़ाने का प्रस्ताव किया गया है।

दोषियों की सजा बढ़ाने का प्रस्ताव
जितेंद्र सिंह के मुताबिक, मौजूदा कानून में अनुचित साधनों में शामिल व्यक्ति के लिए कम से कम तीन से पांच साल तक की सजा और 10 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान था। संशोधन के तहत सजा की अवधि को बढ़ाकर कम से कम पांच से दस साल करने और जुर्माने की अधिकतम सीमा 50 लाख रुपये तक करने का प्रस्ताव है। सरकार का कहना है कि कड़े प्रावधानों से परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के बीच कानून का डर पैदा होगा।

सेवा प्रदाताओं पर भी बढ़ेगी कार्रवाई
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि परीक्षा आयोजित कराने वाली सेवा प्रदाता संस्थाओं की जिम्मेदारी भी तय की जा रही है। मौजूदा कानून में सेवा प्रदाता पर एक करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान था। संशोधन के तहत इसे बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके अलावा ऐसे सेवा प्रदाता को भविष्य में परीक्षा आयोजित करने से रोकने की अवधि भी बढ़ाई जा रही है।

चार साल की रोक अब आठ साल करने की तैयारी
जितेंद्र सिंह ने कहा कि 2024 के कानून में दोषी सेवा प्रदाता को चार साल तक परीक्षा आयोजित करने से रोके जाने का प्रावधान था। अब संशोधन के जरिए इस अवधि को बढ़ाकर आठ साल करने का प्रस्ताव है। सरकार का तर्क है कि परीक्षा व्यवस्था में गंभीर लापरवाही या गड़बड़ी करने वाली संस्थाओं को लंबे समय तक इस प्रक्रिया से बाहर रखना जरूरी है, ताकि परीक्षाओं की निष्पक्षता और विश्वसनीयता बनी रहे।

पेपर लीक माफिया पर भी शिकंजा कसने का दावा
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अगर किसी मामले में संगठित गिरोह या माफिया की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ सजा के प्रावधान भी और कड़े किए जा रहे हैं। ऐसे मामलों में पहले पांच से 10 साल तक की सजा का प्रावधान था, जिसे संशोधन के तहत सात से 10 साल करने का प्रस्ताव है। जुर्माने की राशि भी एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये तक किए जाने की बात कही गई है।

दो महीने में जांच पूरी करने का प्रस्ताव
जितेंद्र सिंह ने कहा कि सिर्फ सख्त सजा से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि दोषियों को जल्द सजा दिलाना भी जरूरी है। इसी उद्देश्य से परीक्षा में अनुचित साधनों से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए विशेष त्वरित अदालतें बनाने का प्रस्ताव है। उन्होंने कहा कि मामलों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करने की समय सीमा तय की जाएगी। जांच केंद्रीय एजेंसी करे या विशेष कार्य बल, तय समय में जांच पूरी करने पर जोर दिया जाएगा।

सरकार ने विधेयक को युवाओं के हित से जोड़ा
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह संशोधन 2024 में बनाए गए सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम संबंधी कानून को और मजबूत करने की दिशा में उठाया गया कदम है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है। उनके मुताबिक, देश के छात्रों और युवाओं के भविष्य के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

प्रधानमंत्री के संकल्प का भी किया जिक्र
जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार का उद्देश्य परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और भरोसा कायम करना है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस संकल्प का भी जिक्र किया, जिसमें युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं होने देने की बात कही गई है। सरकार का दावा है कि संशोधन लागू होने के बाद पेपर लीक, नकल और परीक्षा में अनुचित तरीकों के मामलों पर पहले की तुलना में ज्यादा प्रभावी कार्रवाई की जा सकेगी।

अखिलेश के बयान से गरमाई सियासत
हालांकि, विधेयक पर सरकार की ओर से सजा और जुर्माना बढ़ाने के प्रावधानों को प्रमुखता से रखा गया, लेकिन बहस के दौरान अखिलेश यादव का राम मंदिर के चढ़ावे और पेपर लीक को जोड़ने वाला बयान सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। उनके बयान ने परीक्षा व्यवस्था को लेकर चल रही बहस को सीधे राजनीतिक सवालों से जोड़ दिया। अब देखने वाली बात होगी कि सार्वजनिक परीक्षा संशोधन विधेयक पर संसद की चर्चा के बाद सरकार के प्रस्तावित कड़े प्रावधान किस रूप में कानून का हिस्सा बनते हैं और क्या इससे पेपर लीक जैसी घटनाओं पर वास्तव में प्रभावी रोक लग पाती है।

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अखिलेश यादव का केंद्र पर बड़ा हमला, बोले- जो राम मंदिर का चढ़ावा नहीं बचा पाए, वो पेपर लीक कैसे बचाएंगे?

By Malay Ojha | Published: 28 July 2026 at 03:41 PM

लोकसभा में मंगलवार को सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और नकल रोकने से जुड़े संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी का मुद्दा उठाते हुए सरकार पर तंज कसा और कहा, “जो चढ़ावा नहीं बचा पाए, वो पेपर लीक कैसे बचाएंगे।” अखिलेश के इस बयान के बाद सदन की कार्यवाही के दौरान परीक्षा व्यवस्था, युवाओं के भविष्य और सरकार की जवाबदेही को लेकर सियासी बहस तेज हो गई।

अखिलेश यादव ने यह टिप्पणी उस वक्त की, जब लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षा अनुचित साधन निवारण संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा चल रही थी। यह विधेयक सरकारी भर्ती और प्रवेश से जुड़ी सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल और दूसरे अनुचित तरीकों पर लगाम लगाने के लिए कानून को और सख्त करने के उद्देश्य से लाया गया है। अखिलेश ने इसी मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब सरकार राम मंदिर में चढ़ावे की सुरक्षा नहीं कर पाई तो वह पेपर लीक जैसी गंभीर समस्या को कैसे रोक पाएगी।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर भी साधा निशाना
अखिलेश यादव ने पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर भी केंद्र सरकार पर कटाक्ष किया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधान का इस्तीफा लेकर प्रधानमंत्री को बचाने की कोशिश की गई। परीक्षा में गड़बड़ी और पेपर लीक के मुद्दे पर सरकार की जवाबदेही तय करने की मांग लंबे समय से विपक्ष की राजनीति का हिस्सा रही है। मंगलवार को सदन में भी यह मुद्दा एक बार फिर जोरदार तरीके से उठा।

पेपर लीक पर सरकार को घेरने में जुटा विपक्ष
लोकसभा में विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा के मुद्दे को लेकर गंभीर नहीं है और सुधार की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। उन्होंने इस विधेयक को सरकार की विफलता का सबूत बताते हुए कहा कि कानून को सख्त करने के बजाय व्यवस्था में मौजूद कमियों को दूर करने की जरूरत है।

असम की बाढ़ और मौतों का भी उठा मुद्दा
गौरव गोगोई ने सदन में असम में आई बाढ़ का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि बाढ़ के कारण राज्य में करीब 70 लोगों की मौत हुई है। उन्होंने केंद्र सरकार से असम के प्रभावित लोगों के लिए विशेष आर्थिक पैकेज देने की मांग की। इस दौरान उन्होंने कहा कि बाढ़ से जूझ रहे लोगों को तत्काल मदद और राहत की जरूरत है।

सरकार बोली- कानून में सजा और जुर्माना दोनों होंगे सख्त
विधेयक पर सरकार की ओर से जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि संशोधन का मकसद सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों पर प्रभावी रोक लगाना और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई को और कड़ा करना है। उन्होंने कहा कि सरकार परीक्षा व्यवस्था में छात्रों और युवाओं का भरोसा बहाल करना चाहती है। इसके लिए कानून में सजा और जुर्माने के प्रावधानों को बढ़ाने का प्रस्ताव किया गया है।

दोषियों की सजा बढ़ाने का प्रस्ताव
जितेंद्र सिंह के मुताबिक, मौजूदा कानून में अनुचित साधनों में शामिल व्यक्ति के लिए कम से कम तीन से पांच साल तक की सजा और 10 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान था। संशोधन के तहत सजा की अवधि को बढ़ाकर कम से कम पांच से दस साल करने और जुर्माने की अधिकतम सीमा 50 लाख रुपये तक करने का प्रस्ताव है। सरकार का कहना है कि कड़े प्रावधानों से परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के बीच कानून का डर पैदा होगा।

सेवा प्रदाताओं पर भी बढ़ेगी कार्रवाई
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि परीक्षा आयोजित कराने वाली सेवा प्रदाता संस्थाओं की जिम्मेदारी भी तय की जा रही है। मौजूदा कानून में सेवा प्रदाता पर एक करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान था। संशोधन के तहत इसे बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके अलावा ऐसे सेवा प्रदाता को भविष्य में परीक्षा आयोजित करने से रोकने की अवधि भी बढ़ाई जा रही है।

चार साल की रोक अब आठ साल करने की तैयारी
जितेंद्र सिंह ने कहा कि 2024 के कानून में दोषी सेवा प्रदाता को चार साल तक परीक्षा आयोजित करने से रोके जाने का प्रावधान था। अब संशोधन के जरिए इस अवधि को बढ़ाकर आठ साल करने का प्रस्ताव है। सरकार का तर्क है कि परीक्षा व्यवस्था में गंभीर लापरवाही या गड़बड़ी करने वाली संस्थाओं को लंबे समय तक इस प्रक्रिया से बाहर रखना जरूरी है, ताकि परीक्षाओं की निष्पक्षता और विश्वसनीयता बनी रहे।

पेपर लीक माफिया पर भी शिकंजा कसने का दावा
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अगर किसी मामले में संगठित गिरोह या माफिया की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ सजा के प्रावधान भी और कड़े किए जा रहे हैं। ऐसे मामलों में पहले पांच से 10 साल तक की सजा का प्रावधान था, जिसे संशोधन के तहत सात से 10 साल करने का प्रस्ताव है। जुर्माने की राशि भी एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये तक किए जाने की बात कही गई है।

दो महीने में जांच पूरी करने का प्रस्ताव
जितेंद्र सिंह ने कहा कि सिर्फ सख्त सजा से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि दोषियों को जल्द सजा दिलाना भी जरूरी है। इसी उद्देश्य से परीक्षा में अनुचित साधनों से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए विशेष त्वरित अदालतें बनाने का प्रस्ताव है। उन्होंने कहा कि मामलों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करने की समय सीमा तय की जाएगी। जांच केंद्रीय एजेंसी करे या विशेष कार्य बल, तय समय में जांच पूरी करने पर जोर दिया जाएगा।

सरकार ने विधेयक को युवाओं के हित से जोड़ा
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह संशोधन 2024 में बनाए गए सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम संबंधी कानून को और मजबूत करने की दिशा में उठाया गया कदम है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है। उनके मुताबिक, देश के छात्रों और युवाओं के भविष्य के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

प्रधानमंत्री के संकल्प का भी किया जिक्र
जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार का उद्देश्य परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और भरोसा कायम करना है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस संकल्प का भी जिक्र किया, जिसमें युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं होने देने की बात कही गई है। सरकार का दावा है कि संशोधन लागू होने के बाद पेपर लीक, नकल और परीक्षा में अनुचित तरीकों के मामलों पर पहले की तुलना में ज्यादा प्रभावी कार्रवाई की जा सकेगी।

अखिलेश के बयान से गरमाई सियासत
हालांकि, विधेयक पर सरकार की ओर से सजा और जुर्माना बढ़ाने के प्रावधानों को प्रमुखता से रखा गया, लेकिन बहस के दौरान अखिलेश यादव का राम मंदिर के चढ़ावे और पेपर लीक को जोड़ने वाला बयान सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। उनके बयान ने परीक्षा व्यवस्था को लेकर चल रही बहस को सीधे राजनीतिक सवालों से जोड़ दिया। अब देखने वाली बात होगी कि सार्वजनिक परीक्षा संशोधन विधेयक पर संसद की चर्चा के बाद सरकार के प्रस्तावित कड़े प्रावधान किस रूप में कानून का हिस्सा बनते हैं और क्या इससे पेपर लीक जैसी घटनाओं पर वास्तव में प्रभावी रोक लग पाती है।

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