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बांकीपुर में भाजपा का 30 साल पुराना किला ढहा, प्रशांत किशोर ने अब सम्राट चौधरी को लेकर दे दिया बड़ा संदेश

By Malay Ojha | Published: 03 August 2026 at 05:23 PM

बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर की जीत लगभग तय होने के साथ ही उन्होंने भाजपा के लिए एक बड़ा राजनीतिक संदेश भी दे दिया है। प्रशांत किशोर ने दावा किया कि बांकीपुर की जनता ने केवल विधायक चुनने के लिए वोट नहीं दिया, बल्कि भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को यह बताने के लिए मतदान किया कि बिहार में मुख्यमंत्री के तौर पर किसी योग्य और साफ छवि वाले नेता को आगे लाया जाए। उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को हटाने की मांग भी खुले तौर पर रख दी।

मतगणना के दौरान प्रशांत किशोर लगातार बढ़त बनाए हुए थे। अंतिम दौर की गिनती में भी उन्होंने भाजपा के नीरज कुमार सिन्हा और राष्ट्रीय जनता दल की रेखा गुप्ता को काफी पीछे छोड़ दिया। नतीजे के रुझान साफ होने के बाद पटना के एएन कॉलेज स्थित मतगणना केंद्र पहुंचे प्रशांत किशोर ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान ही साफ कर दिया था कि यह चुनाव केवल विधायक चुनने का चुनाव नहीं है।

उनका कहना था कि बांकीपुर के मतदाताओं ने भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को एक संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि बिहार में ऐसा मुख्यमंत्री होना चाहिए जो रोजगार के अवसर पैदा करे, शिक्षा की हालत सुधारे, भ्रष्टाचार पर रोक लगाए और राज्य से युवाओं का पलायन कम करे।

भाजपा से बोले- सम्राट चौधरी की जगह किसी अच्छे नेता को बनाइए मुख्यमंत्री
प्रशांत किशोर ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को लेकर सीधे तौर पर कहा कि उनकी किसी व्यक्ति से निजी लड़ाई नहीं है। लेकिन उनका दावा है कि जनता अब ऐसे नेतृत्व की उम्मीद कर रही है, जिस पर बिहार के लोग गर्व कर सकें। उन्होंने भाजपा नेतृत्व से कहा कि अगर पार्टी के पास बहुमत है और सरकार बनाने की स्थिति में वही है, तो मुख्यमंत्री भी भाजपा का ही रहेगा, लेकिन मुख्यमंत्री के चेहरे पर उसे दोबारा विचार करना चाहिए।

उन्होंने यहां तक कहा कि अगर भाजपा किसी कुशवाहा नेता को ही मुख्यमंत्री बनाना चाहती है, तो भी उसे किसी ऐसे व्यक्ति को आगे करना चाहिए जिसकी छवि अच्छी हो और जो बिहार के विकास के लिए काम कर सके।

पीके का दावा- भाजपा का 30 साल पुराना गढ़ 30 दिन में ढह गया
प्रशांत किशोर ने बांकीपुर के नतीजे को भाजपा के लिए बड़ा राजनीतिक झटका बताया। उन्होंने कहा कि जिस सीट को भाजपा का करीब तीन दशक पुराना मजबूत गढ़ माना जाता था, वह महज 30 दिनों में ढह गया। उनके मुताबिक यह बदलाव केवल एक विधानसभा सीट का चुनावी परिणाम नहीं है, बल्कि बिहार की राजनीति में बदलती सोच का संकेत भी है।

उन्होंने कहा कि अब बिहार के लोग केवल जाति और धर्म के नाम पर होने वाली राजनीति से आगे बढ़कर अपने बच्चों की पढ़ाई और रोजगार की बात करना चाहते हैं। उनके मुताबिक जनता चाहती है कि केंद्र और राज्य की सरकारें बिहार के युवाओं के भविष्य को लेकर गंभीरता से काम करें।

गली-नाली के मुद्दे से आगे निकला बांकीपुर का चुनाव
प्रशांत किशोर ने कहा कि बांकीपुर का उपचुनाव गली, नाली या स्थानीय स्तर के छोटे मुद्दों तक सीमित नहीं था। उनके अनुसार इस चुनाव में मतदाताओं ने बिहार के नेतृत्व और भविष्य को लेकर अपनी राय रखी है। उन्होंने कहा कि जनता चाहती है कि बिहार में ऐसा माहौल बने, जहां युवाओं को रोजगार के लिए दूसरे राज्यों का रुख न करना पड़े।

उन्होंने यह भी कहा कि वह बांकीपुर को कुछ ही दिनों में किसी बड़े महानगर जैसा बनाने का दावा नहीं कर रहे हैं, लेकिन आने वाले तीन महीनों में क्षेत्र में कुछ बदलाव जरूर दिखाई देंगे। उन्होंने संकेत दिया कि जन सुराज की जीत के बाद बांकीपुर के विकास को लेकर उनकी प्राथमिकताएं जल्द सामने आएंगी।

27 दौर की गिनती में पीके को 16 हजार से ज्यादा वोटों की बढ़त
बांकीपुर उपचुनाव की मतगणना के 31 में से 27 दौर पूरे होने तक प्रशांत किशोर को 55,780 वोट मिल चुके थे। भाजपा के नीरज कुमार सिन्हा 38,893 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर थे, जबकि राष्ट्रीय जनता दल की रेखा गुप्ता 12,461 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर चल रही थीं।

इन आंकड़ों के आधार पर प्रशांत किशोर की बढ़त 16,887 वोटों तक पहुंच गई थी। अंतिम दौर की ओर बढ़ती मतगणना के बीच उनकी जीत लगभग तय मानी जा रही थी। जन सुराज पार्टी के कार्यकर्ताओं में सुबह से ही उत्साह का माहौल था और जैसे-जैसे बढ़त बढ़ती गई, समर्थकों का उत्साह भी तेज होता गया।

तीन दशक से भाजपा के कब्जे में थी बांकीपुर सीट
बांकीपुर विधानसभा सीट लंबे समय से भाजपा के मजबूत इलाकों में गिनी जाती रही है। पिछले करीब 30 वर्षों में यहां भाजपा का दबदबा बना रहा। भाजपा के वरिष्ठ नेता नितिन नवीन लगातार पांच बार इस सीट से विधायक रहे। उनसे पहले उनके पिता नवीन प्रसाद किशोर सिन्हा भी चार बार विधानसभा पहुंचे थे।

परिसीमन से पहले यह इलाका पटना पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के नाम से जाना जाता था। बाद में विधानसभा क्षेत्रों के पुनर्गठन के बाद बांकीपुर सीट अस्तित्व में आई। भाजपा के लगातार मजबूत प्रदर्शन के कारण इसे पार्टी का सुरक्षित गढ़ माना जाता रहा था। ऐसे में प्रशांत किशोर की बढ़त ने इस चुनाव को बिहार की राजनीति में खास बना दिया है।

नितिन नवीन के राज्यसभा जाने के बाद खाली हुई थी सीट
बांकीपुर सीट नितिन नवीन के राज्यसभा जाने के बाद खाली हुई थी। इसके बाद यहां उपचुनाव कराया गया। भाजपा ने इस सीट को बचाने के लिए पूरी ताकत झोंकी, लेकिन मतगणना के रुझानों ने पार्टी के लिए बड़ा झटका दिखाया।

प्रशांत किशोर की बढ़त को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि उन्होंने भाजपा के मजबूत माने जाने वाले शहरी क्षेत्र में सेंध लगाई है। यह परिणाम जन सुराज के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि पार्टी की राजनीति को अब तक बिहार की चुनावी जमीन पर अपने प्रभाव को साबित करने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा था।

प्रधानमंत्री से भी बिहार के विकास पर ध्यान देने की अपील
जीत की ओर बढ़ते प्रशांत किशोर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी बिहार के विकास पर विशेष ध्यान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को बिहार की चिंता भी उसी तरह करनी चाहिए, जिस तरह दूसरे विकसित राज्यों की की जाती है।

उन्होंने बिहार से होने वाले युवाओं के पलायन का मुद्दा उठाते हुए कहा कि राज्य के बच्चों को रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में जाकर 10 से 15 हजार रुपये की नौकरी करने के लिए मजबूर नहीं होना चाहिए। उनका कहना था कि बिहार में ही ऐसे अवसर पैदा किए जाने चाहिए, जिससे युवा अपने परिवार और राज्य में रहकर बेहतर भविष्य बना सकें।

प्रशांत किशोर ने कहा- जाति और धर्म से आगे बढ़े बिहार की राजनीति
प्रशांत किशोर ने कहा कि उनकी राजनीति का उद्देश्य केवल चुनाव जीतना नहीं है। उन्होंने कहा कि बिहार में शिक्षा, रोजगार और विकास को चुनावी बहस का मुख्य मुद्दा बनाया जाना चाहिए। उनके मुताबिक लोगों से सिर्फ जाति और धर्म के नाम पर वोट मांगने की राजनीति अब बदलनी चाहिए।

उन्होंने बांकीपुर के मतदाताओं का आभार जताते हुए कहा कि चुनाव में हार-जीत होती रहती है, लेकिन उनकी प्राथमिकता बिहार को बेहतर बनाना है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में जनता को यह तय करना होगा कि राज्य की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ेगी।

बांकीपुर के नतीजे से बिहार की राजनीति में नई बहस शुरू
बांकीपुर उपचुनाव का नतीजा अगर प्रशांत किशोर की जीत के रूप में सामने आता है, तो यह केवल एक विधानसभा सीट का परिणाम नहीं होगा। भाजपा के लंबे समय से मजबूत रहे गढ़ में जन सुराज की जीत राज्य की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे सकती है।

सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि क्या प्रशांत किशोर की यह जीत केवल बांकीपुर तक सीमित रहेगी या आने वाले चुनावों में जन सुराज बिहार की राजनीति में बड़ा विकल्प बनने की कोशिश करेगा। वहीं, भाजपा के लिए भी यह नतीजा आत्ममंथन का विषय बन सकता है। प्रशांत किशोर ने तो अपना संदेश साफ कर दिया है—अब देखना यह है कि भाजपा नेतृत्व इस राजनीतिक चुनौती का जवाब किस तरह देता है।

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बांकीपुर में भाजपा का 30 साल पुराना किला ढहा, प्रशांत किशोर ने अब सम्राट चौधरी को लेकर दे दिया बड़ा संदेश

By Malay Ojha | Published: 03 August 2026 at 05:23 PM

बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर की जीत लगभग तय होने के साथ ही उन्होंने भाजपा के लिए एक बड़ा राजनीतिक संदेश भी दे दिया है। प्रशांत किशोर ने दावा किया कि बांकीपुर की जनता ने केवल विधायक चुनने के लिए वोट नहीं दिया, बल्कि भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को यह बताने के लिए मतदान किया कि बिहार में मुख्यमंत्री के तौर पर किसी योग्य और साफ छवि वाले नेता को आगे लाया जाए। उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को हटाने की मांग भी खुले तौर पर रख दी।

मतगणना के दौरान प्रशांत किशोर लगातार बढ़त बनाए हुए थे। अंतिम दौर की गिनती में भी उन्होंने भाजपा के नीरज कुमार सिन्हा और राष्ट्रीय जनता दल की रेखा गुप्ता को काफी पीछे छोड़ दिया। नतीजे के रुझान साफ होने के बाद पटना के एएन कॉलेज स्थित मतगणना केंद्र पहुंचे प्रशांत किशोर ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान ही साफ कर दिया था कि यह चुनाव केवल विधायक चुनने का चुनाव नहीं है।

उनका कहना था कि बांकीपुर के मतदाताओं ने भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को एक संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि बिहार में ऐसा मुख्यमंत्री होना चाहिए जो रोजगार के अवसर पैदा करे, शिक्षा की हालत सुधारे, भ्रष्टाचार पर रोक लगाए और राज्य से युवाओं का पलायन कम करे।

भाजपा से बोले- सम्राट चौधरी की जगह किसी अच्छे नेता को बनाइए मुख्यमंत्री
प्रशांत किशोर ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को लेकर सीधे तौर पर कहा कि उनकी किसी व्यक्ति से निजी लड़ाई नहीं है। लेकिन उनका दावा है कि जनता अब ऐसे नेतृत्व की उम्मीद कर रही है, जिस पर बिहार के लोग गर्व कर सकें। उन्होंने भाजपा नेतृत्व से कहा कि अगर पार्टी के पास बहुमत है और सरकार बनाने की स्थिति में वही है, तो मुख्यमंत्री भी भाजपा का ही रहेगा, लेकिन मुख्यमंत्री के चेहरे पर उसे दोबारा विचार करना चाहिए।

उन्होंने यहां तक कहा कि अगर भाजपा किसी कुशवाहा नेता को ही मुख्यमंत्री बनाना चाहती है, तो भी उसे किसी ऐसे व्यक्ति को आगे करना चाहिए जिसकी छवि अच्छी हो और जो बिहार के विकास के लिए काम कर सके।

पीके का दावा- भाजपा का 30 साल पुराना गढ़ 30 दिन में ढह गया
प्रशांत किशोर ने बांकीपुर के नतीजे को भाजपा के लिए बड़ा राजनीतिक झटका बताया। उन्होंने कहा कि जिस सीट को भाजपा का करीब तीन दशक पुराना मजबूत गढ़ माना जाता था, वह महज 30 दिनों में ढह गया। उनके मुताबिक यह बदलाव केवल एक विधानसभा सीट का चुनावी परिणाम नहीं है, बल्कि बिहार की राजनीति में बदलती सोच का संकेत भी है।

उन्होंने कहा कि अब बिहार के लोग केवल जाति और धर्म के नाम पर होने वाली राजनीति से आगे बढ़कर अपने बच्चों की पढ़ाई और रोजगार की बात करना चाहते हैं। उनके मुताबिक जनता चाहती है कि केंद्र और राज्य की सरकारें बिहार के युवाओं के भविष्य को लेकर गंभीरता से काम करें।

गली-नाली के मुद्दे से आगे निकला बांकीपुर का चुनाव
प्रशांत किशोर ने कहा कि बांकीपुर का उपचुनाव गली, नाली या स्थानीय स्तर के छोटे मुद्दों तक सीमित नहीं था। उनके अनुसार इस चुनाव में मतदाताओं ने बिहार के नेतृत्व और भविष्य को लेकर अपनी राय रखी है। उन्होंने कहा कि जनता चाहती है कि बिहार में ऐसा माहौल बने, जहां युवाओं को रोजगार के लिए दूसरे राज्यों का रुख न करना पड़े।

उन्होंने यह भी कहा कि वह बांकीपुर को कुछ ही दिनों में किसी बड़े महानगर जैसा बनाने का दावा नहीं कर रहे हैं, लेकिन आने वाले तीन महीनों में क्षेत्र में कुछ बदलाव जरूर दिखाई देंगे। उन्होंने संकेत दिया कि जन सुराज की जीत के बाद बांकीपुर के विकास को लेकर उनकी प्राथमिकताएं जल्द सामने आएंगी।

27 दौर की गिनती में पीके को 16 हजार से ज्यादा वोटों की बढ़त
बांकीपुर उपचुनाव की मतगणना के 31 में से 27 दौर पूरे होने तक प्रशांत किशोर को 55,780 वोट मिल चुके थे। भाजपा के नीरज कुमार सिन्हा 38,893 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर थे, जबकि राष्ट्रीय जनता दल की रेखा गुप्ता 12,461 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर चल रही थीं।

इन आंकड़ों के आधार पर प्रशांत किशोर की बढ़त 16,887 वोटों तक पहुंच गई थी। अंतिम दौर की ओर बढ़ती मतगणना के बीच उनकी जीत लगभग तय मानी जा रही थी। जन सुराज पार्टी के कार्यकर्ताओं में सुबह से ही उत्साह का माहौल था और जैसे-जैसे बढ़त बढ़ती गई, समर्थकों का उत्साह भी तेज होता गया।

तीन दशक से भाजपा के कब्जे में थी बांकीपुर सीट
बांकीपुर विधानसभा सीट लंबे समय से भाजपा के मजबूत इलाकों में गिनी जाती रही है। पिछले करीब 30 वर्षों में यहां भाजपा का दबदबा बना रहा। भाजपा के वरिष्ठ नेता नितिन नवीन लगातार पांच बार इस सीट से विधायक रहे। उनसे पहले उनके पिता नवीन प्रसाद किशोर सिन्हा भी चार बार विधानसभा पहुंचे थे।

परिसीमन से पहले यह इलाका पटना पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के नाम से जाना जाता था। बाद में विधानसभा क्षेत्रों के पुनर्गठन के बाद बांकीपुर सीट अस्तित्व में आई। भाजपा के लगातार मजबूत प्रदर्शन के कारण इसे पार्टी का सुरक्षित गढ़ माना जाता रहा था। ऐसे में प्रशांत किशोर की बढ़त ने इस चुनाव को बिहार की राजनीति में खास बना दिया है।

नितिन नवीन के राज्यसभा जाने के बाद खाली हुई थी सीट
बांकीपुर सीट नितिन नवीन के राज्यसभा जाने के बाद खाली हुई थी। इसके बाद यहां उपचुनाव कराया गया। भाजपा ने इस सीट को बचाने के लिए पूरी ताकत झोंकी, लेकिन मतगणना के रुझानों ने पार्टी के लिए बड़ा झटका दिखाया।

प्रशांत किशोर की बढ़त को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि उन्होंने भाजपा के मजबूत माने जाने वाले शहरी क्षेत्र में सेंध लगाई है। यह परिणाम जन सुराज के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि पार्टी की राजनीति को अब तक बिहार की चुनावी जमीन पर अपने प्रभाव को साबित करने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा था।

प्रधानमंत्री से भी बिहार के विकास पर ध्यान देने की अपील
जीत की ओर बढ़ते प्रशांत किशोर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी बिहार के विकास पर विशेष ध्यान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को बिहार की चिंता भी उसी तरह करनी चाहिए, जिस तरह दूसरे विकसित राज्यों की की जाती है।

उन्होंने बिहार से होने वाले युवाओं के पलायन का मुद्दा उठाते हुए कहा कि राज्य के बच्चों को रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में जाकर 10 से 15 हजार रुपये की नौकरी करने के लिए मजबूर नहीं होना चाहिए। उनका कहना था कि बिहार में ही ऐसे अवसर पैदा किए जाने चाहिए, जिससे युवा अपने परिवार और राज्य में रहकर बेहतर भविष्य बना सकें।

प्रशांत किशोर ने कहा- जाति और धर्म से आगे बढ़े बिहार की राजनीति
प्रशांत किशोर ने कहा कि उनकी राजनीति का उद्देश्य केवल चुनाव जीतना नहीं है। उन्होंने कहा कि बिहार में शिक्षा, रोजगार और विकास को चुनावी बहस का मुख्य मुद्दा बनाया जाना चाहिए। उनके मुताबिक लोगों से सिर्फ जाति और धर्म के नाम पर वोट मांगने की राजनीति अब बदलनी चाहिए।

उन्होंने बांकीपुर के मतदाताओं का आभार जताते हुए कहा कि चुनाव में हार-जीत होती रहती है, लेकिन उनकी प्राथमिकता बिहार को बेहतर बनाना है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में जनता को यह तय करना होगा कि राज्य की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ेगी।

बांकीपुर के नतीजे से बिहार की राजनीति में नई बहस शुरू
बांकीपुर उपचुनाव का नतीजा अगर प्रशांत किशोर की जीत के रूप में सामने आता है, तो यह केवल एक विधानसभा सीट का परिणाम नहीं होगा। भाजपा के लंबे समय से मजबूत रहे गढ़ में जन सुराज की जीत राज्य की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे सकती है।

सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि क्या प्रशांत किशोर की यह जीत केवल बांकीपुर तक सीमित रहेगी या आने वाले चुनावों में जन सुराज बिहार की राजनीति में बड़ा विकल्प बनने की कोशिश करेगा। वहीं, भाजपा के लिए भी यह नतीजा आत्ममंथन का विषय बन सकता है। प्रशांत किशोर ने तो अपना संदेश साफ कर दिया है—अब देखना यह है कि भाजपा नेतृत्व इस राजनीतिक चुनौती का जवाब किस तरह देता है।

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