By Malay Ojha | Published: 14 September 2026 at 02:01 PM
राजस्थान निकाय चुनाव 2026 के नतीजों में झालावाड़ नगर परिषद ने सबसे चौंकाने वाला नतीजा दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के मजबूत राजनीतिक गढ़ माने जाने वाले झालावाड़ में कांग्रेस ने बीजेपी को बड़ा झटका दिया है। 45 वार्डों वाली नगर परिषद में कांग्रेस ने 29 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है। बीजेपी सिर्फ 13 वार्डों में जीत दर्ज कर सकी।
झालावाड़ नगर परिषद में बहुमत के लिए 23 पार्षदों की जरूरत थी, लेकिन कांग्रेस ने इससे छह सीट ज्यादा जीत लीं। ऐसे में नगर परिषद में कांग्रेस का बोर्ड बनना तय माना जा रहा है। दो वार्डों में निर्दलीय और एक वार्ड में आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार को जीत मिली है।
बीजेपी के लिए इसलिए बड़ा झटका
झालावाड़ को लंबे समय से वसुंधरा राजे का मजबूत राजनीतिक आधार माना जाता है। झालरापाटन विधानसभा सीट से राजे का गहरा राजनीतिक जुड़ाव रहा है, जबकि झालावाड़-बारां लोकसभा सीट उनके बेटे दुष्यंत सिंह के पास है। ऐसे में नगर परिषद में कांग्रेस की यह जीत सिर्फ स्थानीय निकाय का नतीजा नहीं, बल्कि राजे के मजबूत गढ़ में विपक्ष की बड़ी सेंध के तौर पर देखी जा रही है।
टिकट बंटवारे से पहले ही बढ़ गई थी बेचैनी
चुनाव से पहले झालावाड़ में बीजेपी और कांग्रेस दोनों के सामने टिकट वितरण बड़ी चुनौती बना हुआ था। कई वार्डों में दावेदारों की संख्या और बगावत की आशंका के चलते दोनों दलों की उम्मीदवार सूची अंतिम समय तक अटकी रही थी। ऐसे माहौल में कांग्रेस का 29 सीटों तक पहुंचना उसके संगठन और स्थानीय उम्मीदवारों के प्रदर्शन के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
जिले की बाकी निकायों में भी मुकाबला
झालावाड़ जिले की दूसरी निकायों में भी मुकाबला दिलचस्प रहा है। उपलब्ध नतीजों में भवानीमंडी में कांग्रेस ने 40 में से 26 वार्ड जीते हैं, जबकि बीजेपी को 13 और एक सीट निर्दलीय के खाते में गई।
पूरे राजस्थान में तस्वीर अलग
हालांकि झालावाड़ का नतीजा कांग्रेस के लिए बड़ी खबर है, लेकिन इसे पूरे राजस्थान के निकाय चुनाव का रुझान मानना सही नहीं होगा। राज्य की 309 नगरीय निकायों की मतगणना में शुरुआती तस्वीर बीजेपी के मजबूत प्रदर्शन की रही है। बीजेपी कई नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पालिकाओं में बढ़त बनाए हुए है।
2028 से पहले बढ़ी राजनीतिक अहमियत
राजस्थान में अगला विधानसभा चुनाव 2028 में होना है। ऐसे में निकाय चुनाव के नतीजे दोनों प्रमुख दलों के लिए संगठन की ताकत और स्थानीय पकड़ का संकेत माने जा रहे हैं। झालावाड़ में कांग्रेस की यह जीत इसलिए खास है क्योंकि यहां उसने बीजेपी के मजबूत राजनीतिक आधार में सेंध लगाकर नगर परिषद का बोर्ड अपने नाम कर लिया है।
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