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CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ ‘जनता का महाभियोग’, पूर्व अफसरों ने लगाए 6 आरोप; SIR और ECINET पर उठे सवाल

By aryavartalive | Published: 06 October 2026 at 09:55 AM

नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विवाद अब राजनीतिक दलों से आगे बढ़कर पूर्व नौकरशाहों और सामाजिक कार्यकर्ताओं तक पहुंच गया है। सोमवार को एक समूह ने उनके खिलाफ ‘जनता का महाभियोग’ नोटिस जारी कर इस्तीफे की मांग की। नोटिस में चुनाव आयोग के कामकाज, SIR और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों को लेकर छह आरोप लगाए गए हैं।

इस पहल में पूर्व केंद्रीय गृह सचिव जीके पिल्लई, दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग और सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव समेत कई पूर्व अधिकारी और एक्टिविस्ट शामिल हैं। समूह का कहना है कि नोटिस में लगाए गए आरोप चुनाव आयोग की संवैधानिक और कानूनी जिम्मेदारियों से जुड़े हैं।

EC दफ्तर पहुंचने से रोके जाने का दावा
समूह के सदस्यों ने कहा कि वे नोटिस सौंपने के लिए निर्वाचन सदन जाना चाहते थे, लेकिन उन्हें वहां पहुंचने से रोक दिया गया। सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज ने दावा किया कि चुनाव आयोग मुख्यालय की ओर जाने वाली सड़कों पर बैरिकेड लगाए गए थे। हालांकि, यह समूह का आरोप है।

चुनाव आयोग के कामकाज पर सवाल
नोटिस में आरोप लगाया गया है कि आयोग के कुछ महत्वपूर्ण फैसले उचित सामूहिक चर्चा और औपचारिक प्रक्रिया के बिना लिए गए। इसमें SIR से जुड़े फैसलों और आयोग के भीतर निर्णय लेने के तरीके पर भी सवाल उठाए गए हैं।

Form-6 को लेकर भी आरोप
पूर्व अधिकारियों के समूह ने Form-6 में बदलाव को लेकर भी सवाल उठाए हैं। नोटिस में दावा किया गया है कि वैधता को लेकर आपत्तियों के बावजूद बदले हुए फॉर्म का इस्तेमाल किया गया। पहले से मतदाता सूची में शामिल लोगों से दोबारा नाम जुड़वाने जैसी घोषणा लेने की जरूरत पर भी सवाल उठाया गया है।

ECINET और SIR पर भी निशाना
नोटिस में ECINET के जरिए चुनाव पंजीकरण अधिकारियों की भूमिका और अधिकार कमजोर होने का आरोप लगाया गया है। साथ ही SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित होने को लेकर भी गंभीर चिंता जताई गई है। समूह ने इन मुद्दों को चुनाव आयोग की निष्पक्षता और संवैधानिक जिम्मेदारी से जोड़ते हुए CEC से इस्तीफे की मांग की है।

छह आरोपों का दावा, जवाब बाकी
समूह ने इन आरोपों को संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत गंभीर मामला बताया है। हालांकि, नोटिस में लगाए गए आरोप अभी समूह के दावे हैं और अपने आप में किसी तरह की गलती या कदाचार साबित नहीं करते।

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CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ ‘जनता का महाभियोग’, पूर्व अफसरों ने लगाए 6 आरोप; SIR और ECINET पर उठे सवाल

By aryavartalive | Published: 06 October 2026 at 09:55 AM

नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विवाद अब राजनीतिक दलों से आगे बढ़कर पूर्व नौकरशाहों और सामाजिक कार्यकर्ताओं तक पहुंच गया है। सोमवार को एक समूह ने उनके खिलाफ ‘जनता का महाभियोग’ नोटिस जारी कर इस्तीफे की मांग की। नोटिस में चुनाव आयोग के कामकाज, SIR और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों को लेकर छह आरोप लगाए गए हैं।

इस पहल में पूर्व केंद्रीय गृह सचिव जीके पिल्लई, दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग और सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव समेत कई पूर्व अधिकारी और एक्टिविस्ट शामिल हैं। समूह का कहना है कि नोटिस में लगाए गए आरोप चुनाव आयोग की संवैधानिक और कानूनी जिम्मेदारियों से जुड़े हैं।

EC दफ्तर पहुंचने से रोके जाने का दावा
समूह के सदस्यों ने कहा कि वे नोटिस सौंपने के लिए निर्वाचन सदन जाना चाहते थे, लेकिन उन्हें वहां पहुंचने से रोक दिया गया। सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज ने दावा किया कि चुनाव आयोग मुख्यालय की ओर जाने वाली सड़कों पर बैरिकेड लगाए गए थे। हालांकि, यह समूह का आरोप है।

चुनाव आयोग के कामकाज पर सवाल
नोटिस में आरोप लगाया गया है कि आयोग के कुछ महत्वपूर्ण फैसले उचित सामूहिक चर्चा और औपचारिक प्रक्रिया के बिना लिए गए। इसमें SIR से जुड़े फैसलों और आयोग के भीतर निर्णय लेने के तरीके पर भी सवाल उठाए गए हैं।

Form-6 को लेकर भी आरोप
पूर्व अधिकारियों के समूह ने Form-6 में बदलाव को लेकर भी सवाल उठाए हैं। नोटिस में दावा किया गया है कि वैधता को लेकर आपत्तियों के बावजूद बदले हुए फॉर्म का इस्तेमाल किया गया। पहले से मतदाता सूची में शामिल लोगों से दोबारा नाम जुड़वाने जैसी घोषणा लेने की जरूरत पर भी सवाल उठाया गया है।

ECINET और SIR पर भी निशाना
नोटिस में ECINET के जरिए चुनाव पंजीकरण अधिकारियों की भूमिका और अधिकार कमजोर होने का आरोप लगाया गया है। साथ ही SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित होने को लेकर भी गंभीर चिंता जताई गई है। समूह ने इन मुद्दों को चुनाव आयोग की निष्पक्षता और संवैधानिक जिम्मेदारी से जोड़ते हुए CEC से इस्तीफे की मांग की है।

छह आरोपों का दावा, जवाब बाकी
समूह ने इन आरोपों को संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत गंभीर मामला बताया है। हालांकि, नोटिस में लगाए गए आरोप अभी समूह के दावे हैं और अपने आप में किसी तरह की गलती या कदाचार साबित नहीं करते।

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