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दरभंगा BSAP-13 में टियर गैस का असर, 122 जवान बीमार; 117 को इलाज के बाद मिली छुट्टी

By aryavartalive | Published: 08 October 2026 at 10:17 AM

दरभंगा में बिहार स्पेशल आर्म्ड पुलिस-13 (BSAP-13) के कैंप में बुधवार को मॉक ड्रिल के दौरान अचानक अफरा-तफरी मच गई। आंसू गैस यानी टियर गैस के अभ्यास के दौरान उसके धुएं की चपेट में आने से 100 से ज्यादा जवानों की तबीयत बिगड़ गई। बीमार जवानों को आनन-फानन में दरभंगा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (DMCH) की इमरजेंसी में ले जाया गया। रिपोर्ट के मुताबिक करीब 122 जवानों को इलाज की जरूरत पड़ी, जिनमें से 117 को उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई।

बताया गया कि कैंप में सीनियर अधिकारियों के लिए एंटी-रायट और टियर गैस की मॉक ड्रिल चल रही थी। इसी दौरान आसपास मौजूद प्रशिक्षु जवान भी गैस के असर में आ गए। कई जवानों ने चक्कर, जी मिचलाने, उल्टी, बेचैनी और आंखों-त्वचा में जलन व खुजली की शिकायत की। देखते ही देखते कई जवानों को अस्पताल ले जाने की जरूरत पड़ गई।

पेड़ के नीचे बैठे जवान भी गैस की चपेट में आए
दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, कुछ प्रशिक्षु महिला और पुरुष जवान खाना खाने के बाद कैंप परिसर में पेड़ के नीचे बैठे थे और सीनियर अधिकारियों की ड्रिल देख रहे थे। इसी दौरान छोड़ी गई टियर गैस का धुआं उनकी तरफ पहुंच गया। इसके बाद कई जवानों की तबीयत बिगड़ने लगी और उन्हें पहले कैंप में प्राथमिक उपचार दिया गया, फिर DMCH भेजा गया।

कमांडेंट बोले- टियर गैस के असर से बिगड़ी तबीयत
BSAP-13 के कमांडेंट रवीश कुमार ने टियर गैस के धुएं को जवानों की तबीयत बिगड़ने की वजह बताया है। उन्होंने फूड प्वाइजनिंग की आशंका से इनकार करते हुए कहा कि सीनियर जवानों की मॉक ड्रिल के दौरान इस्तेमाल की गई टियर गैस का असर आसपास मौजूद प्रशिक्षु जवानों पर पड़ा। हालांकि, अलग-अलग शुरुआती रिपोर्टों में बीमार जवानों की संख्या अलग बताई गई थी।

पांच जवान निगरानी में, बाकी को मिली छुट्टी
DMCH में डॉक्टरों की टीम ने तुरंत जवानों का इलाज शुरू किया। रिपोर्टों के मुताबिक अधिकांश जवानों की हालत सामान्य होने के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई, जबकि करीब पांच जवानों को निगरानी में रखा गया। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक इलाज करा रहे जवानों की स्थिति खतरे से बाहर बताई गई है। घटना के बाद कैंप परिसर में भी पानी का छिड़काव कराया गया, ताकि टियर गैस के असर को कम किया जा सके।

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दरभंगा BSAP-13 में टियर गैस का असर, 122 जवान बीमार; 117 को इलाज के बाद मिली छुट्टी

By aryavartalive | Published: 08 October 2026 at 10:17 AM

दरभंगा में बिहार स्पेशल आर्म्ड पुलिस-13 (BSAP-13) के कैंप में बुधवार को मॉक ड्रिल के दौरान अचानक अफरा-तफरी मच गई। आंसू गैस यानी टियर गैस के अभ्यास के दौरान उसके धुएं की चपेट में आने से 100 से ज्यादा जवानों की तबीयत बिगड़ गई। बीमार जवानों को आनन-फानन में दरभंगा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (DMCH) की इमरजेंसी में ले जाया गया। रिपोर्ट के मुताबिक करीब 122 जवानों को इलाज की जरूरत पड़ी, जिनमें से 117 को उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई।

बताया गया कि कैंप में सीनियर अधिकारियों के लिए एंटी-रायट और टियर गैस की मॉक ड्रिल चल रही थी। इसी दौरान आसपास मौजूद प्रशिक्षु जवान भी गैस के असर में आ गए। कई जवानों ने चक्कर, जी मिचलाने, उल्टी, बेचैनी और आंखों-त्वचा में जलन व खुजली की शिकायत की। देखते ही देखते कई जवानों को अस्पताल ले जाने की जरूरत पड़ गई।

पेड़ के नीचे बैठे जवान भी गैस की चपेट में आए
दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, कुछ प्रशिक्षु महिला और पुरुष जवान खाना खाने के बाद कैंप परिसर में पेड़ के नीचे बैठे थे और सीनियर अधिकारियों की ड्रिल देख रहे थे। इसी दौरान छोड़ी गई टियर गैस का धुआं उनकी तरफ पहुंच गया। इसके बाद कई जवानों की तबीयत बिगड़ने लगी और उन्हें पहले कैंप में प्राथमिक उपचार दिया गया, फिर DMCH भेजा गया।

कमांडेंट बोले- टियर गैस के असर से बिगड़ी तबीयत
BSAP-13 के कमांडेंट रवीश कुमार ने टियर गैस के धुएं को जवानों की तबीयत बिगड़ने की वजह बताया है। उन्होंने फूड प्वाइजनिंग की आशंका से इनकार करते हुए कहा कि सीनियर जवानों की मॉक ड्रिल के दौरान इस्तेमाल की गई टियर गैस का असर आसपास मौजूद प्रशिक्षु जवानों पर पड़ा। हालांकि, अलग-अलग शुरुआती रिपोर्टों में बीमार जवानों की संख्या अलग बताई गई थी।

पांच जवान निगरानी में, बाकी को मिली छुट्टी
DMCH में डॉक्टरों की टीम ने तुरंत जवानों का इलाज शुरू किया। रिपोर्टों के मुताबिक अधिकांश जवानों की हालत सामान्य होने के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई, जबकि करीब पांच जवानों को निगरानी में रखा गया। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक इलाज करा रहे जवानों की स्थिति खतरे से बाहर बताई गई है। घटना के बाद कैंप परिसर में भी पानी का छिड़काव कराया गया, ताकि टियर गैस के असर को कम किया जा सके।

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