By Malay Ojha | Published: 14 October 2026 at 10:45 AM
बिहार के वैशाली जिले में गंगा नदी में नाव पलटने से 13 बच्चों की मौत के बाद प्रशासन के खिलाफ लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। ग्रामीणों का आरोप है कि जिस नाव से बच्चे भोज खाने के लिए गंगा पार जा रहे थे, वह पहले से जर्जर थी और उसमें दरार भी पड़ी हुई थी। लोगों का दावा है कि नाव बदलने के लिए कई बार शिकायत की गई, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने इस पर ध्यान नहीं दिया।
हादसा राघोपुर थाना क्षेत्र की रामपुर श्यामचंद पंचायत के पास हुआ। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते जर्जर नाव को बदल दिया गया होता तो शायद इतना बड़ा हादसा नहीं होता। हालांकि, शिकायतों और कथित लापरवाही से जुड़े इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
शवों को पोस्टमार्टम के लिए ले जाने से रोका
गंगा नदी से 13 बच्चों के शव निकाले जाने के बाद स्थानीय लोगों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। ग्रामीणों ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए ले जाने से भी रोक दिया। मौके पर पहुंचीं वैशाली की डीएम और एसएसपी को भी लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा। ग्रामीण लगातार जिला प्रशासन के खिलाफ नारे लगाते रहे।
रेस्क्यू में देरी का आरोप, स्थानीय लोगों ने बचाई जान
ग्रामीणों का आरोप है कि हादसे की सूचना देने के बावजूद सरकारी मदद करीब 45 मिनट की देरी से पहुंची। लोगों का कहना है कि नाव से बच्चों को निकालने में स्थानीय लोगों ने अहम भूमिका निभाई। एंबुलेंस पहुंचने में भी देर हुई, जिससे लोगों की नाराजगी और बढ़ गई।
राघोपुर सीओ की बर्खास्तगी की मांग
हादसे के लिए ग्रामीणों ने राघोपुर के अंचल अधिकारी (सीओ) को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने सीओ को बर्खास्त करने और उनके खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि पहले से शिकायत मिलने के बावजूद कार्रवाई नहीं करना गंभीर लापरवाही है। इसी वजह से वे इस घटना को महज हादसा मानने के बजाय जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
NDRF-SDRF ने शुरू किया सर्च ऑपरेशन
सुबह होते ही लापता लोगों की तलाश के लिए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंचीं और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। स्थानीय लोगों के मुताबिक, नाव पर करीब 30 से 35 लोग सवार थे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 13 शव मिलने और सात घायल बच्चों की पुष्टि के साथ कुल 20 लोगों के बारे में जानकारी सामने आई थी। बाकी लोगों की तलाश की जा रही थी।
नाव पर कितने लोग सवार थे, इसकी जानकारी नहीं
हादसे के बाद नाव पर सवार लोगों की सही संख्या को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं थी। स्थानीय लोगों के अनुमान और प्रशासन के पास उपलब्ध जानकारी में अंतर सामने आया। लापता लोगों की तलाश के साथ ही अब ग्रामीणों की मांग है कि हादसे की निष्पक्ष जांच हो और अगर नाव की खराब हालत तथा शिकायतों की अनदेखी की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
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