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वाराणसी में भाग्यलक्ष्मी ऐप से ऑनलाइन जुए का खेल जारी, छापेमारी के बाद भी नहीं थम रहा नेटवर्क

By Malay Ojha | Published: 16 October 2026 at 08:37 AM

वाराणसी में ‘भाग्यलक्ष्मी’ ऐप के जरिए ऑनलाइन जुआ खेलने और खिलाने का मामला लगातार सामने आ रहा है। पुलिस की कार्रवाई में जुआ खेलते लोग पकड़े जा रहे हैं, मोबाइल फोन और नकदी बरामद हो रही है, लेकिन इस खेल के पीछे सक्रिय पूरे नेटवर्क को लेकर सवाल बने हुए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इस ऐप को कौन चला रहा है और इसके जरिए होने वाले लेन-देन का हिसाब कहां रखा जा रहा है?

रवींद्रपुरी से लल्लापुरा तक सामने आ चुके हैं मामले
वाराणसी में इस मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सितंबर 2026 में भेलूपुर पुलिस और एसओजी की कार्रवाई में रवींद्रपुरी के पास से सात लोगों को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस के मुताबिक, आरोपी भाग्यलक्ष्मी ऐप पर ऑनलाइन जुआ खेल रहे थे। मौके से 17 हजार रुपये नकद और छह मोबाइल फोन बरामद किए गए थे। इससे पहले सदर बाजार इलाके में भी इसी तरह के मामले में गिरफ्तारियां हुई थीं।

आखिर क्या है भाग्यलक्ष्मी ऐप का खेल?
भाग्यलक्ष्मी नाम से सामने आ रहे इस खेल में नंबरों के आधार पर पैसे लगाने की बात कही जाती है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, कुछ जगहों पर 12 रुपये लगाकर नंबर चुनने और थोड़े-थोड़े अंतराल पर परिणाम आने का दावा किया जाता है। सही नंबर मिलने पर पैसे देने का लालच दिया जाता है। हालांकि, अलग-अलग जगहों पर इस्तेमाल हो रहे ऐप और वेबसाइट का एक ही नेटवर्क से जुड़ा होना अभी स्पष्ट नहीं है।

छोटी रकम से शुरुआत, नुकसान का खतरा बड़ा
इस तरह के खेल में शुरुआत में छोटी रकम लगाने के कारण लोगों को ज्यादा जोखिम महसूस नहीं होता। कोई व्यक्ति कुछ रुपये लगाकर जीतने की उम्मीद करता है, तो कोई पहले हुए नुकसान की भरपाई के लिए दोबारा पैसे लगाता है। धीरे-धीरे यही सिलसिला बड़ी रकम तक पहुंच सकता है। आमदनी सीमित होने पर इसका असर घर के खर्च, बच्चों की पढ़ाई और दूसरी जरूरी जरूरतों पर पड़ सकता है।

चाय की दुकान से घरों तक चल रहा खेल
पुलिस की कार्रवाई से सामने आया है कि ऑनलाइन जुए के लिए किसी बड़े दफ्तर या खास ठिकाने की जरूरत नहीं पड़ती। स्थानीय स्तर पर लोग मोबाइल फोन के जरिए यह खेल संचालित कर सकते हैं। कुछ मामलों में चाय की दुकानों, घरों और सार्वजनिक स्थानों पर लोगों के जुआ खेलने की जानकारी सामने आई है। व्हाट्सएप ग्रुपों के जरिए लिंक साझा करने और नकद या ऑनलाइन भुगतान लेने की आशंका भी जांच का विषय है।

कौन चला रहा है पूरा नेटवर्क?
इस मामले में सबसे अहम सवाल ऐप या वेबसाइट के पीछे मौजूद लोगों की पहचान का है। स्थानीय स्तर पर जुआ खिलाने वाले लोग पकड़े जाने के बाद भी यह पता लगाना जरूरी है कि उन्हें लिंक कहां से मिलता है, पैसे किस खाते में जमा होते हैं और जीतने की रकम का भुगतान कौन करता है। वेबसाइट का संचालन करने वाले लोगों, डिजिटल भुगतान और अन्य वित्तीय लेन-देन की जांच से नेटवर्क की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकती है।

हालांकि, केवल नाम या ऐप के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि सभी संबंधित वेबसाइटें एक ही गिरोह चला रहा है या हर जगह परिणामों में हेरफेर होता है। इसकी पुष्टि जांच और डिजिटल सबूतों के आधार पर ही हो सकती है।

कानून क्या कहता है?
लॉटरी के संचालन को लेकर लॉटरी (रेगुलेशन) एक्ट, 1998 में प्रावधान हैं। वहीं, पैसे लगाकर ऑनलाइन गेम खेलने और खिलाने से जुड़े मामलों में लागू कानून और अपराध की प्रकृति की जांच जरूरी है। किसी ऐप को सरकारी मान्यता प्राप्त बताने वाले दावे की भी पुष्टि होनी चाहिए। सिर्फ आकर्षक नाम, वेबसाइट या जीत की रकम देखकर किसी प्लेटफॉर्म को वैध नहीं माना जा सकता।

पुलिस को स्थानीय गिरफ्तारी से आगे बढ़ानी होगी जांच
ऑनलाइन जुए पर रोक लगाने के लिए केवल मौके से लोगों को पकड़ना पर्याप्त नहीं है। पुलिस और साइबर जांच टीमों को डिजिटल भुगतान के रिकॉर्ड, मोबाइल फोन, व्हाट्सएप ग्रुप, वेबसाइट से जुड़े तकनीकी विवरण और धन के लेन-देन की कड़ियों की जांच करनी चाहिए। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि स्थानीय स्तर पर खेल चलाने वालों के पीछे कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय है या अलग-अलग समूह काम कर रहे हैं।

किस्मत चमकाने के लालच में न गंवाएं मेहनत की कमाई
भाग्यलक्ष्मी जैसे नाम से चलने वाले ऑनलाइन नंबर गेम में पैसे लगाने से पहले उसकी वैधता और विश्वसनीयता की जांच करना जरूरी है। जीत की गारंटी देने वाले दावों पर भरोसा करने से बचें। यदि किसी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन ठगी हुई है, तो भुगतान का रिकॉर्ड, स्क्रीनशॉट और संबंधित मोबाइल नंबर सुरक्षित रखें तथा साइबर क्राइम पोर्टल या पुलिस में शिकायत करें।

आखिरकार, कुछ मिनटों में पैसे दोगुने करने का लालच किसी परिवार की महीनों की कमाई पर भारी पड़ सकता है। वाराणसी में सामने आ रहे इन मामलों की निष्पक्ष और गहन जांच जरूरी है, ताकि केवल जुआ खेलने वाले ही नहीं, बल्कि इसके पीछे सक्रिय नेटवर्क की भी पहचान हो सके।

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वाराणसी में भाग्यलक्ष्मी ऐप से ऑनलाइन जुए का खेल जारी, छापेमारी के बाद भी नहीं थम रहा नेटवर्क

By Malay Ojha | Published: 16 October 2026 at 08:37 AM

वाराणसी में ‘भाग्यलक्ष्मी’ ऐप के जरिए ऑनलाइन जुआ खेलने और खिलाने का मामला लगातार सामने आ रहा है। पुलिस की कार्रवाई में जुआ खेलते लोग पकड़े जा रहे हैं, मोबाइल फोन और नकदी बरामद हो रही है, लेकिन इस खेल के पीछे सक्रिय पूरे नेटवर्क को लेकर सवाल बने हुए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इस ऐप को कौन चला रहा है और इसके जरिए होने वाले लेन-देन का हिसाब कहां रखा जा रहा है?

रवींद्रपुरी से लल्लापुरा तक सामने आ चुके हैं मामले
वाराणसी में इस मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सितंबर 2026 में भेलूपुर पुलिस और एसओजी की कार्रवाई में रवींद्रपुरी के पास से सात लोगों को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस के मुताबिक, आरोपी भाग्यलक्ष्मी ऐप पर ऑनलाइन जुआ खेल रहे थे। मौके से 17 हजार रुपये नकद और छह मोबाइल फोन बरामद किए गए थे। इससे पहले सदर बाजार इलाके में भी इसी तरह के मामले में गिरफ्तारियां हुई थीं।

आखिर क्या है भाग्यलक्ष्मी ऐप का खेल?
भाग्यलक्ष्मी नाम से सामने आ रहे इस खेल में नंबरों के आधार पर पैसे लगाने की बात कही जाती है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, कुछ जगहों पर 12 रुपये लगाकर नंबर चुनने और थोड़े-थोड़े अंतराल पर परिणाम आने का दावा किया जाता है। सही नंबर मिलने पर पैसे देने का लालच दिया जाता है। हालांकि, अलग-अलग जगहों पर इस्तेमाल हो रहे ऐप और वेबसाइट का एक ही नेटवर्क से जुड़ा होना अभी स्पष्ट नहीं है।

छोटी रकम से शुरुआत, नुकसान का खतरा बड़ा
इस तरह के खेल में शुरुआत में छोटी रकम लगाने के कारण लोगों को ज्यादा जोखिम महसूस नहीं होता। कोई व्यक्ति कुछ रुपये लगाकर जीतने की उम्मीद करता है, तो कोई पहले हुए नुकसान की भरपाई के लिए दोबारा पैसे लगाता है। धीरे-धीरे यही सिलसिला बड़ी रकम तक पहुंच सकता है। आमदनी सीमित होने पर इसका असर घर के खर्च, बच्चों की पढ़ाई और दूसरी जरूरी जरूरतों पर पड़ सकता है।

चाय की दुकान से घरों तक चल रहा खेल
पुलिस की कार्रवाई से सामने आया है कि ऑनलाइन जुए के लिए किसी बड़े दफ्तर या खास ठिकाने की जरूरत नहीं पड़ती। स्थानीय स्तर पर लोग मोबाइल फोन के जरिए यह खेल संचालित कर सकते हैं। कुछ मामलों में चाय की दुकानों, घरों और सार्वजनिक स्थानों पर लोगों के जुआ खेलने की जानकारी सामने आई है। व्हाट्सएप ग्रुपों के जरिए लिंक साझा करने और नकद या ऑनलाइन भुगतान लेने की आशंका भी जांच का विषय है।

कौन चला रहा है पूरा नेटवर्क?
इस मामले में सबसे अहम सवाल ऐप या वेबसाइट के पीछे मौजूद लोगों की पहचान का है। स्थानीय स्तर पर जुआ खिलाने वाले लोग पकड़े जाने के बाद भी यह पता लगाना जरूरी है कि उन्हें लिंक कहां से मिलता है, पैसे किस खाते में जमा होते हैं और जीतने की रकम का भुगतान कौन करता है। वेबसाइट का संचालन करने वाले लोगों, डिजिटल भुगतान और अन्य वित्तीय लेन-देन की जांच से नेटवर्क की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकती है।

हालांकि, केवल नाम या ऐप के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि सभी संबंधित वेबसाइटें एक ही गिरोह चला रहा है या हर जगह परिणामों में हेरफेर होता है। इसकी पुष्टि जांच और डिजिटल सबूतों के आधार पर ही हो सकती है।

कानून क्या कहता है?
लॉटरी के संचालन को लेकर लॉटरी (रेगुलेशन) एक्ट, 1998 में प्रावधान हैं। वहीं, पैसे लगाकर ऑनलाइन गेम खेलने और खिलाने से जुड़े मामलों में लागू कानून और अपराध की प्रकृति की जांच जरूरी है। किसी ऐप को सरकारी मान्यता प्राप्त बताने वाले दावे की भी पुष्टि होनी चाहिए। सिर्फ आकर्षक नाम, वेबसाइट या जीत की रकम देखकर किसी प्लेटफॉर्म को वैध नहीं माना जा सकता।

पुलिस को स्थानीय गिरफ्तारी से आगे बढ़ानी होगी जांच
ऑनलाइन जुए पर रोक लगाने के लिए केवल मौके से लोगों को पकड़ना पर्याप्त नहीं है। पुलिस और साइबर जांच टीमों को डिजिटल भुगतान के रिकॉर्ड, मोबाइल फोन, व्हाट्सएप ग्रुप, वेबसाइट से जुड़े तकनीकी विवरण और धन के लेन-देन की कड़ियों की जांच करनी चाहिए। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि स्थानीय स्तर पर खेल चलाने वालों के पीछे कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय है या अलग-अलग समूह काम कर रहे हैं।

किस्मत चमकाने के लालच में न गंवाएं मेहनत की कमाई
भाग्यलक्ष्मी जैसे नाम से चलने वाले ऑनलाइन नंबर गेम में पैसे लगाने से पहले उसकी वैधता और विश्वसनीयता की जांच करना जरूरी है। जीत की गारंटी देने वाले दावों पर भरोसा करने से बचें। यदि किसी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन ठगी हुई है, तो भुगतान का रिकॉर्ड, स्क्रीनशॉट और संबंधित मोबाइल नंबर सुरक्षित रखें तथा साइबर क्राइम पोर्टल या पुलिस में शिकायत करें।

आखिरकार, कुछ मिनटों में पैसे दोगुने करने का लालच किसी परिवार की महीनों की कमाई पर भारी पड़ सकता है। वाराणसी में सामने आ रहे इन मामलों की निष्पक्ष और गहन जांच जरूरी है, ताकि केवल जुआ खेलने वाले ही नहीं, बल्कि इसके पीछे सक्रिय नेटवर्क की भी पहचान हो सके।

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