By Malay Ojha | Published: 03 October 2026 at 05:39 AM
ईरान के साथ जारी युद्ध के बीच अमेरिका ने मिडिल ईस्ट की ओर तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप रवाना कर दिया है। इसके साथ USS Theodore Roosevelt Carrier Strike Group और USS Makin Island Amphibious Ready Group की तैनाती की जा रही है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, इनकी तैनाती के बाद इलाके में करीब 20 हजार अमेरिकी सैनिक, नाविक और मरीन मौजूद हो सकते हैं।
Theodore Roosevelt के साथ जाने वाले कैरियर स्ट्राइक ग्रुप में कई युद्धपोत शामिल हैं। वहीं Makin Island Amphibious Ready Group में मरीन और नाविकों के साथ तीन जहाज हैं। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यह तैनाती आने वाले हफ्तों में क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी को काफी बढ़ा सकती है।
तीन एयरक्राफ्ट कैरियर एक साथ आने की तैयारी
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक Theodore Roosevelt के पहुंचने के बाद मिडिल ईस्ट में USS George Washington और USS George H.W. Bush के साथ तीन एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में अमेरिकी नौसेना की क्षेत्र में मौजूदगी काफी बढ़ जाएगी।
ट्रंप ने हमले की संभावना से नहीं किया इनकार
इस सैन्य तैनाती के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने TIME को दिए इंटरव्यू में कहा कि नवंबर के मध्यावधि चुनाव के बाद ईरान पर अमेरिकी बमबारी बढ़ाना संभव है। जब उनसे संभावित हमले के ठिकानों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने इस पर जानकारी देने से इनकार किया।
ईरान के साथ बातचीत पर भी बना हुआ है गतिरोध
ट्रंप ने इंटरव्यू में ईरान की ओर से रखे गए हालिया प्रस्ताव को पर्याप्त नहीं बताया। उनके मुताबिक दोनों देशों के बीच समझौते की कोशिशें चल रही हैं, लेकिन अभी शर्तों पर सहमति नहीं बनी है। ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका ने पिछले महीनों में अपने हथियारों के भंडार को फिर से मजबूत किया है।
पहले भी तीन कैरियर की मौजूदगी रही है
अमेरिकी नौसेना के तीन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप का एक साथ मिडिल ईस्ट में होना असामान्य नहीं रहा है। अमेरिकी वायुसेना के अप्रैल 2003 के रिकॉर्ड के मुताबिक उस समय भी क्षेत्र में तीन कैरियर बैटल ग्रुप मौजूद थे। मौजूदा तैनाती इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह ईरान युद्ध के बीच अमेरिकी सैन्य विकल्पों का दायरा बढ़ाती है।
ईरान की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया
अमेरिकी सैन्य तैनाती और ट्रंप के बयानों के बीच ईरान की ओर से भी कड़ा जवाब आया है। ईरानी अधिकारियों ने अमेरिका की सैन्य रणनीति और युद्ध में उसके दावों पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, दोनों पक्षों के बयानों के बीच जमीनी सैन्य स्थिति लगातार बदल रही है।
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