By aryavartalive | Published: 23 September 2026 at 10:52 AM
चुनाव आयोग की Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया को लेकर सियासी बहस के बीच आयोग के अंदर फैसलों पर मतभेद की रिपोर्ट सामने आई है। The Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार कुछ फैसलों और आदेशों पर लिखित आपत्ति दर्ज कराई। दूसरी ओर, चुनाव आयोग के सूत्रों ने रिपोर्ट के दावे को खारिज करते हुए कहा है कि SIR समेत सभी फैसले तीनों आयुक्तों की मंजूरी से और सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार, संधू और जोशी की आपत्तियां नए वोटरों के रजिस्ट्रेशन, मतदाता सूची से नाम हटाने, वोटर डेटाबेस और SIR से जुड़े दूसरे फैसलों को लेकर थीं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दोनों आयुक्तों ने कुछ कदमों पर उन्हें जानकारी दिए बिना निर्णय लिए जाने पर सवाल उठाए।
Form-6 में बदलाव पर भी सवाल
रिपोर्ट के मुताबिक, नए मतदाताओं के लिए इस्तेमाल होने वाले Form-6 में SIR से जुड़ा एक नया सवाल जोड़े जाने पर भी आपत्ति दर्ज की गई। दोनों आयुक्तों ने इस बदलाव को लेकर कानूनी प्रक्रिया और इसकी जरूरत पर सवाल उठाए। Indian Express ने अपनी रिपोर्ट में इसे लेकर उनके लिखित संचार का हवाला दिया है।
वोटर डेटा के कंट्रोल पर चिंता
दोनों चुनाव आयुक्तों ने कथित तौर पर वोटर डेटा के डिजिटल सिस्टम के ज्यादा केंद्रीकृत होने को लेकर भी चिंता जताई। रिपोर्ट के मुताबिक, सवाल यह था कि राज्यों और स्थानीय स्तर पर काम करने वाले अधिकारियों की मतदाता सूची तक पहुंच और उसमें बदलाव करने की प्रक्रिया किस तरह संचालित हो रही है।
गोवा और पश्चिम बंगाल का भी जिक्र
Indian Express की रिपोर्ट में गोवा और पश्चिम बंगाल से जुड़े मामलों का भी उल्लेख है। गोवा में 97 मतदाताओं के दस्तावेजों को स्थानीय Electoral Registration Officers ने सही पाया, लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक सॉफ्टवेयर में उस फैसले को दर्ज करने में दिक्कत आई। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से जुड़े अपील मामलों को लेकर भी सवाल उठाए गए।
आयोग के सूत्रों ने क्या कहा?
इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद चुनाव आयोग के सूत्रों ने कहा कि SIR और आयोग के दूसरे फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी के बाद ही फैसले हुए। इस तरह रिपोर्ट में सामने आए आंतरिक मतभेद के दावों और आयोग की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण के बीच स्पष्ट अंतर है।
SIR को लेकर पहले से जारी है विवाद
SIR के तहत मतदाता सूचियों की दोबारा जांच और अपडेट की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों के बीच पहले से बहस चल रही है। इसी बीच चुनाव आयोग के भीतर कथित आपत्तियों की रिपोर्ट ने विवाद को नया मुद्दा दे दिया है। आयोग की ओर से हालांकि यह स्पष्ट किया गया है कि प्रक्रिया से जुड़े फैसले संस्थागत स्तर पर लिए गए हैं।
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