By Malay Ojha | Published: 07 October 2026 at 12:38 PM
मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून के मामले में सुप्रीम कोर्ट के 23 सितंबर के स्प्लिट फैसले को वापस लेने की मांग बुधवार को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत के सामने उठाई गई। वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायण ने अर्जी का जिक्र करते हुए जल्द सुनवाई की मांग की। CJI सूर्यकांत ने कहा कि कोर्ट मामले की जांच करेगा और इसके बाद फैसला लिया जाएगा।
Recall Plea में जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा के बेटे सिद्धार्थ शर्मा के चुनाव आयोग से पेशेवर जुड़ाव को प्रमुख आधार बनाया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि सिद्धार्थ शर्मा जुलाई 2024 से मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में चुनाव आयोग के स्टैंडिंग काउंसल हैं। इसी आधार पर याचिका में सवाल उठाया गया है कि क्या जस्टिस शर्मा को इस मामले की सुनवाई से अलग नहीं होना चाहिए था। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की वेबसाइट पर भी सिद्धार्थ शर्मा का ECI के लिए स्टैंडिंग काउंसल के तौर पर उल्लेख है।
याचिकाकर्ता ने मांगी दोबारा सुनवाई
याचिका में कहा गया है कि जस्टिस शर्मा को अपने बेटे के ECI से पेशेवर संबंध की जानकारी सुनवाई शुरू होने से पहले पक्षकारों के सामने रखनी चाहिए थी। याचिकाकर्ता का तर्क है कि ऐसा होने पर वे जस्टिस शर्मा से खुद को मामले से अलग करने यानी रिक्यूजल की मांग कर सकते थे। हालांकि, यह याचिकाकर्ता का आरोप और कानूनी तर्क है; अदालत ने अभी इस संबंध में कोई निष्कर्ष नहीं दिया है।
क्यूरेटिव याचिका का भी हुआ जिक्र
वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायण ने CJI को बताया कि इस मामले में क्यूरेटिव याचिका भी दाखिल हो चुकी है। उनका कहना था कि क्यूरेटिव याचिका पर आगे बढ़ने से पहले Recall Plea के पहलू पर विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि पहले अर्जी का जिक्र जस्टिस दीपांकर दत्ता के सामने किया गया था, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर मामला रिलीज होने के बाद इसे CJI के सामने रखा गया।
23 सितंबर को आया था स्प्लिट फैसला
दरअसल, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने 23 सितंबर को CEC और EC की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अलग-अलग राय दी थी। जस्टिस दत्ता ने मामले को संविधान पीठ के पास भेजने की जरूरत से असहमति जताई, जबकि जस्टिस शर्मा ने संवैधानिक सवालों को देखते हुए कम से कम पांच जजों की संविधान पीठ से सुनवाई की जरूरत बताई। दोनों राय के बाद मामला CJI सूर्यकांत के पास भेजा गया।
क्या है 2023 का चुनाव आयुक्त नियुक्ति कानून?
मामला Chief Election Commissioner and Other Election Commissioners (Appointment, Conditions of Service and Term of Office) Act, 2023 की संवैधानिक वैधता से जुड़ा है। इस कानून के तहत चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति वाली चयन समिति में CJI की जगह प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय कैबिनेट मंत्री को शामिल किया गया है। समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय मंत्री शामिल हैं।
अब CJI के फैसले पर नजर
Recall Plea पर जल्द सुनवाई की मांग के बाद अब निगाह CJI सूर्यकांत के अगले कदम पर है। कोर्ट यह तय करेगा कि अर्जी पर आगे सुनवाई की जाए या नहीं। वहीं, 2023 के कानून की संवैधानिक वैधता से जुड़ा मूल विवाद भी आगे की सुनवाई के लिए महत्वपूर्ण बना हुआ है। सुप्रीम कोर्ट की मौजूदा लिस्टिंग में 2026 में CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली अदालत की कार्यवाही और मामलों की सूची उपलब्ध है।
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