By Malay Ojha | Published: 05 October 2026 at 01:41 PM
नई दिल्ली। दिल्ली-NCR में महिलाओं के खिलाफ हाल की रेप और यौन अपराध की घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली पुलिस को सख्त कदम उठाने की जरूरत बताई। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि पुलिस की प्राथमिकता अपराध होने के बाद कार्रवाई करना नहीं, बल्कि उसे होने से रोकना होनी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि अपराधियों और असामाजिक तत्वों में कानून का डर पैदा होना जरूरी है।
महिलाओं को रात में भी सुरक्षित महसूस होना चाहिए
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली-NCR में हर महिला को रात में भी सुरक्षित महसूस होना चाहिए। चाहे वह सड़क पर पैदल चल रही हो या मेट्रो से सफर कर रही हो, सुरक्षा का भरोसा होना जरूरी है। कोर्ट ने पुलिस से पूछा कि CCTV कैमरे लगाए जाने के बाद उनकी लगातार निगरानी कैसे होती है और क्या इसके लिए किसी ‘वार रूम’ जैसी व्यवस्था है।
CCTV लगाने के साथ निगरानी भी जरूरी
पीठ ने साफ किया कि केवल CCTV कैमरे लगा देना पर्याप्त नहीं है। संवेदनशील इलाकों की लगातार निगरानी, पर्याप्त रोशनी और पुलिस की सक्रिय मौजूदगी जरूरी है। कोर्ट ने असुरक्षित जगहों पर बीट पेट्रोलिंग मजबूत करने और पेट्रोलिंग वाहनों की प्रभावी तैनाती पर भी जोर दिया।
अवैध गतिविधियों पर भी कार्रवाई के निर्देश
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दिल्ली में अवैध गतिविधियों और ऐसे स्थानों पर भी ध्यान देने को कहा जहां असामाजिक तत्वों का जमावड़ा होता है। पीठ ने पुलिस से कहा कि ऐसे इलाकों की पहचान कर वहां निगरानी और पेट्रोलिंग बढ़ाई जाए। कोर्ट का जोर इस बात पर रहा कि पुलिस को अपराध की आशंका वाले स्थानों पर पहले से सक्रिय रहना होगा।
16 नवंबर को होगी अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह मामले में आदेश पारित करेगा और पुलिस-प्रशासन की ओर से उठाए गए सुरक्षा उपायों को भी देखेगा। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जवाब दाखिल होने तक नए अपराध होने का इंतजार नहीं किया जा सकता। दिल्ली-NCR में हाल की रेप घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर को स्वत: संज्ञान लिया था। अगली सुनवाई 16 नवंबर को होगी।
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