By Malay Ojha | Published: 17 June 2026 at 12:05 PM
एनईईटी री-एग्जाम 2026 से पहले टेलीग्राम पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध का मामला अब अदालत तक पहुंच गया है। मैसेजिंग प्लेटफॉर्म ने इस फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। दूसरी ओर सरकार अपने फैसले पर कायम है और उसका कहना है कि पेपर लीक से जुड़े फर्जी दावों और ठगी के नेटवर्क में टेलीग्राम के कुछ फीचर्स का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हुआ था।
केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की सिफारिश पर सूचना प्रौद्योगिकी कानून की धारा 69ए के तहत कार्रवाई करते हुए टेलीग्राम को 22 जून तक अस्थायी रूप से ब्लॉक करने का आदेश जारी किया है। यह फैसला ऐसे समय लिया गया है जब 21 जून को एनईईटी री-एग्जाम होना है और परीक्षा की गोपनीयता को लेकर सरकार अतिरिक्त सतर्कता बरत रही है।
हाईकोर्ट में पहुंचा मामला
प्रतिबंध के बाद टेलीग्राम ने कानूनी लड़ाई शुरू कर दी है। कंपनी का तर्क है कि पूरे प्लेटफॉर्म पर रोक लगाना उचित नहीं है। वहीं सरकार का कहना है कि जांच में सामने आए तथ्यों और संभावित जोखिमों को देखते हुए यह कदम जरूरी था ताकि परीक्षा से पहले किसी भी तरह की अफवाह, फर्जी पेपर या ठगी को रोका जा सके।
जांच में सामने आया बड़ा खुलासा
जांच एजेंसियों के अनुसार, कुछ ठग गिरोह मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों को निशाना बना रहे थे। ये लोग दावा करते थे कि उनके पास असली प्रश्नपत्र मौजूद है। छात्रों का भरोसा जीतने के लिए वे ऐसे स्क्रीनशॉट दिखाते थे जिनसे लगता था कि प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले ही साझा कर दिया गया था।
कैसे इस्तेमाल हुआ मैसेज एडिट फीचर
जांच में सबसे ज्यादा चर्चा टेलीग्राम के मैसेज एडिट फीचर को लेकर हुई। अधिकारियों का कहना है कि चैनल संचालक पहले सामान्य संदेश पोस्ट करते थे और बाद में उसी संदेश को एडिट करके कथित प्रश्नपत्र या उससे मिलती-जुलती सामग्री जोड़ देते थे।
खास बात यह थी कि संदेश का मूल समय वही दिखाई देता था। ऐसे में स्क्रीनशॉट देखकर लोगों को लगता था कि सामग्री पहले से उपलब्ध थी। इसी आधार पर कई छात्रों को गुमराह किया गया और उनसे पैसे वसूले गए।
WhatsApp पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई
सरकार के अनुसार, इस मामले में व्हाट्सऐप की भूमिका सामने नहीं आई। जांच में जिन नेटवर्कों की पहचान हुई, वे मुख्य रूप से टेलीग्राम चैनलों और उससे जुड़े समूहों के जरिए संचालित हो रहे थे।
अधिकारियों का कहना है कि व्हाट्सऐप का ढांचा अपेक्षाकृत अलग है। वहां अधिकतर बातचीत मोबाइल नंबर से जुड़े निजी संपर्कों या सीमित समूहों के बीच होती है। इसके विपरीत टेलीग्राम पर बड़े सार्वजनिक चैनल बनाए जा सकते हैं, जिन तक लाखों लोगों की पहुंच संभव होती है।
टेलीग्राम के चैनल सिस्टम पर सवाल
जांच एजेंसियों का मानना है कि सार्वजनिक चैनल, आसान खोज सुविधा और बड़ी संख्या में लोगों तक एक साथ पहुंच बनाने की क्षमता ने कुछ असामाजिक तत्वों को फायदा पहुंचाया। इसी वजह से टेलीग्राम जांच के केंद्र में आया जबकि अन्य मैसेजिंग प्लेटफॉर्म इस मामले में प्रमुख भूमिका में नहीं पाए गए।
छात्रों को लेकर सरकार की चिंता
पिछले कुछ महीनों में पेपर लीक और फर्जी प्रश्नपत्र बेचने वाले कई मामलों ने छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ाई है। सरकार का कहना है कि परीक्षा से पहले किसी भी तरह के भ्रामक प्रचार को रोकना उसकी प्राथमिकता है। इसी कारण एहतियात के तौर पर यह अस्थायी कदम उठाया गया।
अब सबकी नजर हाईकोर्ट पर
टेलीग्राम की याचिका दाखिल होने के बाद अब नजर हाईकोर्ट की सुनवाई पर है। अदालत को यह तय करना होगा कि सरकार द्वारा लगाया गया अस्थायी प्रतिबंध परिस्थितियों के अनुरूप था या नहीं। फिलहाल 21 जून के री-एग्जाम और 22 जून तक लागू रोक को लेकर देशभर के लाखों छात्र स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

