By Malay Ojha | Published: 19 June 2026 at 10:55 AM
RE-NEET UG 2026 परीक्षा से ठीक पहले टेलीग्राम को लेकर बड़ा फैसला सामने आया है। उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें री-नीट परीक्षा के दौरान इस मंच पर अस्थायी रोक लगाने की बात कही गई थी। अदालत के इस फैसले के बाद लाखों अभ्यर्थियों और अभिभावकों के बीच नई बहस शुरू हो गई है।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने अदालत में साफ कहा कि टेलीग्राम अब सिर्फ बातचीत का माध्यम नहीं रह गया है। सरकार के मुताबिक यह मंच पेपर लीक, फर्जी प्रश्नपत्र फैलाने, साइबर ठगी और आतंकी गतिविधियों के लिए सबसे आसान जरिया बन चुका है। यही वजह है कि परीक्षा से पहले इस पर सख्त कदम जरूरी समझा गया।
अदालत में क्या बोला गया?
सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि टेलीग्राम के प्रतिनिधियों को पहले बुलाया गया था और उनका पक्ष भी सुना गया। उनके जवाब और जांच एजेंसियों की रिपोर्ट रिकॉर्ड में दर्ज हैं। सरकार ने यह भी बताया कि पूरे मामले की समीक्षा एक उच्चस्तरीय समिति ने की थी, जिसकी अगुवाई कैबिनेट सचिव स्तर पर हुई।
RE-NEET से जुड़ा बड़ा खतरा
सरकार का कहना है कि RE-NEET जैसी बड़ी परीक्षा में पेपर लीक का खतरा पहले से ज्यादा बढ़ जाता है। ऐसे में टेलीग्राम जैसे मंचों का इस्तेमाल फर्जी प्रश्नपत्र फैलाने और अफवाहें उड़ाने के लिए तेजी से होता है। इससे परीक्षा की निष्पक्षता पर असर पड़ सकता है। इसी खतरे को देखते हुए यह अस्थायी रोक लगाई गई है।
क्यों निशाने पर आया टेलीग्राम?
टेलीग्राम के कई फीचर्स सरकार की चिंता का कारण बने हैं। एक ही समूह में दो लाख तक लोगों को जोड़ने की सुविधा, बड़ी फाइलों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने की व्यवस्था और पहचान छिपाकर खाता बनाने की छूट इसे दूसरे मंचों से अलग बनाती है। यही कारण है कि गलत काम करने वाले लोग इसका ज्यादा इस्तेमाल करते हैं।
व्हाट्सऐप से कितना अलग?
कई लोगों के मन में सवाल है कि जब व्हाट्सऐप भी संदेश भेजने का मंच है तो फिर टेलीग्राम पर ही सख्ती क्यों? जानकारों का मानना है कि टेलीग्राम में पहचान छिपाने, बड़े समूह बनाने और सामग्री को लंबे समय तक रखने की सुविधा ज्यादा है। यही वजह है कि इसका दुरुपयोग भी बड़े पैमाने पर होता है।
पहले भी लग चुके हैं आरोप
यह पहली बार नहीं है जब टेलीग्राम विवादों में आया है। इससे पहले भी कई प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और फर्जी प्रश्नपत्र फैलाने के आरोप सामने आ चुके हैं। कई जांच रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि साइबर ठग और धोखेबाज गिरोह इस मंच का इस्तेमाल लोगों को निशाना बनाने के लिए करते रहे हैं।
आगे क्या होगा?
अब सबकी नजर इक्कीस जून को होने वाली री-नीट परीक्षा पर है। अगर परीक्षा शांतिपूर्ण तरीके से होती है तो सरकार इसे अपनी बड़ी कामयाबी बताएगी। लेकिन सवाल यह भी है कि परीक्षा के बाद टेलीग्राम पर लगी रोक हटेगी या सरकार आगे भी सख्त रुख अपनाएगी। फिलहाल इस फैसले ने सोशल मीडिया और परीक्षा व्यवस्था दोनों पर नई बहस छेड़ दी है।
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