Saturday, June 20, 2026

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‘आज ही नया अध्यक्ष चुन लीजिए…’ उद्धव ठाकरे ने अचानक क्यों दे दी पद छोड़ने की पेशकश?

By Malay Ojha | Published: 19 June 2026 at 09:53 PM

महाराष्ट्र की राजनीति में शुक्रवार को उस समय नई चर्चा शुरू हो गई जब शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने पार्टी कार्यकर्ताओं के सामने बड़ा बयान देते हुए कहा कि यदि नेताओं और कार्यकर्ताओं को लगता है कि वह पार्टी अध्यक्ष पद के लिए उपयुक्त नहीं हैं तो वह तुरंत पद छोड़ने को तैयार हैं। हालांकि उन्होंने साफ कर दिया कि चाहे हालात कितने भी कठिन क्यों न हों, वह राजनीतिक संघर्ष से पीछे हटने वाले नहीं हैं।

पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि संगठन में किसी भी योग्य व्यक्ति को नेतृत्व सौंपने में उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा कि उनका मकसद केवल पार्टी को मजबूत रखना है। अगर कार्यकर्ताओं को लगता है कि कोई दूसरा व्यक्ति बेहतर नेतृत्व दे सकता है तो वह अध्यक्ष पद छोड़ने के लिए तैयार हैं।

‘मेरा हौसला टूटने वाला नहीं’
उद्धव ठाकरे ने कहा कि कुछ लोग यह मानकर चल रहे हैं कि पार्टी में हुई टूट और पिछले कुछ वर्षों की राजनीतिक घटनाओं के बाद उनका मनोबल कमजोर हो गया होगा। लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। उन्होंने कहा कि चुनौतियां चाहे जितनी भी बड़ी हों, वह हार मानने वालों में से नहीं हैं और अपनी राजनीतिक लड़ाई जारी रखेंगे।

विरोधियों पर भी साधा निशाना
अपने भाषण में उद्धव ठाकरे ने उन लोगों पर भी हमला बोला जिन्हें उन्होंने पार्टी तोड़ने की राजनीति करने वाला बताया। उन्होंने कहा कि शिवसेना के संस्थापक बालासाहेब ठाकरे ने हमेशा पार्टी के साथ विश्वासघात करने वालों को राजनीतिक जवाब देने की बात कही थी। उसी विचारधारा के साथ वह आगे बढ़ रहे हैं।

चुनावी नतीजों से तय होती है राजनीतिक ताकत
उद्धव ठाकरे ने कहा कि किसी भी दल की असली ताकत का आकलन चुनावी प्रदर्शन से होता है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि बालासाहेब ठाकरे सत्ता के मोह में विश्वास नहीं रखते थे। उनके लिए विचार और संगठन ज्यादा महत्वपूर्ण थे। इसी सोच को आगे बढ़ाने का प्रयास आज भी किया जा रहा है।

कांग्रेस के साथ रिश्तों पर दिया जवाब
कांग्रेस के साथ गठबंधन को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि तीन दशक तक भारतीय जनता पार्टी के साथ रहने के बावजूद शिवसेना कभी उसमें शामिल नहीं हुई। ऐसे में कांग्रेस में विलय की बातें पूरी तरह निराधार हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक सहयोग और पार्टी की पहचान दो अलग-अलग बातें हैं।

‘कांग्रेस ने कभी मातोश्री का अपमान नहीं किया’
उद्धव ठाकरे ने कहा कि अतीत में कांग्रेस और शिवसेना के बीच कई मुद्दों पर मतभेद रहे हैं, लेकिन कांग्रेस ने कभी उनके परिवार या मातोश्री का अपमान नहीं किया। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस ने गठबंधन के दौरान किए गए वादों को निभाया है।

भाजपा पर भी किया हमला
अपने संबोधन में उद्धव ठाकरे ने भारतीय जनता पार्टी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि शिवसेना का समर्थन न मिला होता तो भाजपा का राजनीतिक सफर इतना लंबा नहीं चलता। साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि महाराष्ट्र में भाजपा खुद अपने सहयोगी गुटों को लेकर कई तरह की परेशानियों का सामना कर रही है।

फिर दोहराया पद छोड़ने वाला बयान
भाषण के अंत में उद्धव ठाकरे ने एक बार फिर कहा कि यदि पार्टी कार्यकर्ताओं को लगता है कि वह अध्यक्ष पद के लिए उपयुक्त नहीं हैं तो वह जिम्मेदारी छोड़ देंगे। लेकिन उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि राजनीतिक संघर्ष जारी रहेगा और वह अपने सिद्धांतों से पीछे नहीं हटेंगे।

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‘आज ही नया अध्यक्ष चुन लीजिए…’ उद्धव ठाकरे ने अचानक क्यों दे दी पद छोड़ने की पेशकश?

By Malay Ojha | Published: 19 June 2026 at 09:53 PM

महाराष्ट्र की राजनीति में शुक्रवार को उस समय नई चर्चा शुरू हो गई जब शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने पार्टी कार्यकर्ताओं के सामने बड़ा बयान देते हुए कहा कि यदि नेताओं और कार्यकर्ताओं को लगता है कि वह पार्टी अध्यक्ष पद के लिए उपयुक्त नहीं हैं तो वह तुरंत पद छोड़ने को तैयार हैं। हालांकि उन्होंने साफ कर दिया कि चाहे हालात कितने भी कठिन क्यों न हों, वह राजनीतिक संघर्ष से पीछे हटने वाले नहीं हैं।

पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि संगठन में किसी भी योग्य व्यक्ति को नेतृत्व सौंपने में उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा कि उनका मकसद केवल पार्टी को मजबूत रखना है। अगर कार्यकर्ताओं को लगता है कि कोई दूसरा व्यक्ति बेहतर नेतृत्व दे सकता है तो वह अध्यक्ष पद छोड़ने के लिए तैयार हैं।

‘मेरा हौसला टूटने वाला नहीं’
उद्धव ठाकरे ने कहा कि कुछ लोग यह मानकर चल रहे हैं कि पार्टी में हुई टूट और पिछले कुछ वर्षों की राजनीतिक घटनाओं के बाद उनका मनोबल कमजोर हो गया होगा। लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। उन्होंने कहा कि चुनौतियां चाहे जितनी भी बड़ी हों, वह हार मानने वालों में से नहीं हैं और अपनी राजनीतिक लड़ाई जारी रखेंगे।

विरोधियों पर भी साधा निशाना
अपने भाषण में उद्धव ठाकरे ने उन लोगों पर भी हमला बोला जिन्हें उन्होंने पार्टी तोड़ने की राजनीति करने वाला बताया। उन्होंने कहा कि शिवसेना के संस्थापक बालासाहेब ठाकरे ने हमेशा पार्टी के साथ विश्वासघात करने वालों को राजनीतिक जवाब देने की बात कही थी। उसी विचारधारा के साथ वह आगे बढ़ रहे हैं।

चुनावी नतीजों से तय होती है राजनीतिक ताकत
उद्धव ठाकरे ने कहा कि किसी भी दल की असली ताकत का आकलन चुनावी प्रदर्शन से होता है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि बालासाहेब ठाकरे सत्ता के मोह में विश्वास नहीं रखते थे। उनके लिए विचार और संगठन ज्यादा महत्वपूर्ण थे। इसी सोच को आगे बढ़ाने का प्रयास आज भी किया जा रहा है।

कांग्रेस के साथ रिश्तों पर दिया जवाब
कांग्रेस के साथ गठबंधन को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि तीन दशक तक भारतीय जनता पार्टी के साथ रहने के बावजूद शिवसेना कभी उसमें शामिल नहीं हुई। ऐसे में कांग्रेस में विलय की बातें पूरी तरह निराधार हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक सहयोग और पार्टी की पहचान दो अलग-अलग बातें हैं।

‘कांग्रेस ने कभी मातोश्री का अपमान नहीं किया’
उद्धव ठाकरे ने कहा कि अतीत में कांग्रेस और शिवसेना के बीच कई मुद्दों पर मतभेद रहे हैं, लेकिन कांग्रेस ने कभी उनके परिवार या मातोश्री का अपमान नहीं किया। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस ने गठबंधन के दौरान किए गए वादों को निभाया है।

भाजपा पर भी किया हमला
अपने संबोधन में उद्धव ठाकरे ने भारतीय जनता पार्टी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि शिवसेना का समर्थन न मिला होता तो भाजपा का राजनीतिक सफर इतना लंबा नहीं चलता। साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि महाराष्ट्र में भाजपा खुद अपने सहयोगी गुटों को लेकर कई तरह की परेशानियों का सामना कर रही है।

फिर दोहराया पद छोड़ने वाला बयान
भाषण के अंत में उद्धव ठाकरे ने एक बार फिर कहा कि यदि पार्टी कार्यकर्ताओं को लगता है कि वह अध्यक्ष पद के लिए उपयुक्त नहीं हैं तो वह जिम्मेदारी छोड़ देंगे। लेकिन उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि राजनीतिक संघर्ष जारी रहेगा और वह अपने सिद्धांतों से पीछे नहीं हटेंगे।

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