By Malay Ojha | Published: 29 July 2026 at 04:23 PM
लोकसभा में परीक्षा संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान बुधवार को उस वक्त सियासी पारा चढ़ गया, जब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने छात्रों के प्रदर्शन के दौरान कथित गोली चलाने के आदेश को लेकर गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांगा। राहुल गांधी के इस आरोप पर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था की स्थिति में गोली चलाने या बल प्रयोग का आदेश किसी मंत्री का नहीं, बल्कि संबंधित क्षेत्र के मजिस्ट्रेट का अधिकार होता है।
राहुल के आरोप पर सरकार का सीधा जवाब
जितेंद्र सिंह ने सदन में राहुल गांधी के बयान पर आपत्ति जताते हुए कहा कि विपक्ष को महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा के दौरान सार्थक सुझाव देने चाहिए थे, लेकिन इसके बजाय मामले को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। उन्होंने राहुल गांधी की भाषा और उनके संसदीय आचरण पर भी सवाल खड़े किए।
‘क्या राहुल गांधी को संसदीय मर्यादा की जानकारी है?’
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सदन में विपक्ष के नेता की ओर से जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया गया, वह बेहद हैरान करने वाली है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या राहुल गांधी को बुनियादी संसदीय नियमों और मर्यादाओं की जानकारी है।
जितेंद्र सिंह ने युवाओं के लिए इस्तेमाल किए गए कथित ‘इडियट’ जैसे शब्दों पर भी कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि देश के युवा भारत का भविष्य हैं और उनके लिए इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
‘गोली नहीं चली, सिर्फ आंसू गैस का इस्तेमाल हुआ’
राहुल गांधी के आरोपों का जवाब देते हुए जितेंद्र सिंह ने प्रदर्शन के दौरान हुई कार्रवाई को लेकर सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि घटनास्थल पर गोलीबारी नहीं हुई थी। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले इस्तेमाल किए थे।
मंत्री ने कहा कि जब गोली चली ही नहीं, तो गोली चलाने के आदेश की बात भी नहीं उठती। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन की ओर से तय प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जाती है।
जितेंद्र सिंह ने राहुल गांधी के आरोप पर प्रशासनिक व्यवस्था का हवाला देते हुए कहा कि कानून-व्यवस्था से जुड़ी किसी स्थिति में गोली चलाने या बल प्रयोग का फैसला संबंधित क्षेत्र के मजिस्ट्रेट के अधिकार क्षेत्र में आता है। उन्होंने कहा कि किसी मंत्री के पास इस तरह का आदेश देने का अधिकार नहीं होता।
राहुल गांधी बोले- दो ही स्थितियां हो सकती हैं
लोकसभा की कार्यवाही समाप्त होने के बाद राहुल गांधी ने संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत में अपने बयान का बचाव किया। उन्होंने कहा कि उनके अनुसार इस मामले में दो ही संभावनाएं हैं। पहली यह कि गृह मंत्री अमित शाह ने गोली चलाने का आदेश दिया हो और दूसरी यह कि उन्हें इस बात की जानकारी ही न हो कि गोली चलाई जा रही है।
राहुल गांधी ने कहा कि अगर गृह मंत्री ने आदेश दिया था तो वह जिम्मेदार हैं और अगर उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी तो यह उनकी अक्षमता को दिखाता है। उन्होंने कहा कि उनके मुताबिक इन दोनों के अलावा कोई तीसरी स्थिति नहीं हो सकती।
‘अगर आदेश नहीं दिया तो सफाई दें’
कांग्रेस नेता ने कहा कि अगर गृह मंत्री ने कोई आदेश नहीं दिया है, तो उन्हें सदन में आकर इस बारे में सफाई देनी चाहिए। राहुल गांधी ने गृह मंत्री की सदन में मौजूदगी को लेकर भी सवाल उठाया और तंज कसते हुए कहा कि देश के ‘बहादुर’ गृह मंत्री सदन में नहीं आए।
राहुल गांधी ने यह भी कहा कि नेता प्रतिपक्ष के तौर पर सदन में अपनी बात रखना उनका अधिकार है और उन्हें यह अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों पर कार्रवाई के मामले में सरकार को जवाब देना चाहिए।
अब इस पूरे विवाद का केंद्र राहुल गांधी का वह सवाल बन गया है, जिसमें उन्होंने गृह मंत्री से कथित गोली चलाने के आदेश पर सफाई मांगी है। वहीं सरकार की ओर से साफ कहा गया है कि ऐसी स्थिति में आदेश देने का अधिकार मंत्री का नहीं, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर संबंधित मजिस्ट्रेट का होता है। इस मुद्दे को लेकर सदन के भीतर और बाहर राजनीतिक बयानबाजी तेज होने के आसार हैं।
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