National

spot_img

आपको शर्म नहीं आती है? अवैध हिरासत मामले में UP पुलिस को हाई कोर्ट की फटकार, ACP कमलकांत से सवाल

By Malay Ojha | Published: 07 October 2026 at 07:35 PM

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अवैध हिरासत के एक मामले में नोएडा पुलिस की कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी जताई है। जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की बेंच ने सुनवाई के दौरान पुलिस अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यूपी पुलिस की हालत बहुत खराब है। कोर्ट ने नोएडा के एसीपी-2 कमलकांत को भी कड़ी फटकार लगाई और पूछा कि आपको शर्म नहीं आती है?

मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने नोएडा निवासी दीपक को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया। दीपक ने हाई कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल कर आरोप लगाया था कि पुलिस ने उसे हिरासत में लिया, लेकिन आधिकारिक रिकॉर्ड में उसकी हिरासत को सही तरीके से दर्ज नहीं किया गया।

23 अगस्त को हिरासत में लेने का आरोप
दीपक की ओर से पेश वकील अर्पित मालवीय और अवधेश कुमार मालवीय ने कोर्ट को बताया कि 23 अगस्त को दो गुटों के बीच विवाद हुआ था। इसी दिन शाम करीब 7.34 बजे दीपक को पुलिस ने हिरासत में लिया। आरोप है कि उस समय वह पुलिस के कब्जे में था, जबकि इसी घटना को लेकर बाद में एफआईआर दर्ज की गई।

FIR में नाम नहीं, फिर भी हिरासत में रखा
याचिकाकर्ता के वकीलों के मुताबिक, जिस एफआईआर का जिक्र पुलिस ने किया, उसमें दीपक का नाम नहीं था। इसके बावजूद उसे हिरासत में रखा गया। अगले दिन उसे धारा 130 के तहत नोटिस दिया गया, जबकि उस वक्त भी वह पुलिस हिरासत में था।

वकील से मिलने के अधिकार की जानकारी नहीं दी
दीपक ने आरोप लगाया कि पूछताछ के दौरान उसे यह तक नहीं बताया गया कि वह अपने वकील से मिल सकता है या कानूनी सलाह ले सकता है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पुलिस की ओर से तैयार किए गए रिकॉर्ड और जमानत बॉन्ड से जुड़ी प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए।

गिरफ्तारी रिकॉर्ड में भी कई सवाल
कोर्ट ने पाया कि पुलिस रिकॉर्ड से यह साफ नहीं था कि दीपक से जमानत बॉन्ड के लिए किसी निश्चित रकम को जमा करने की इच्छा के बारे में पूछा गया था या नहीं। गिरफ्तारी से जुड़े रिकॉर्ड में भी कोई निश्चित राशि दर्ज नहीं थी। कोर्ट ने दस्तावेजों को तैयार करने और पूरी प्रक्रिया को रिकॉर्ड करने के तरीके पर असंतोष जताया।

एसीपी-1 को भी कोर्ट ने किया तलब
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने नोएडा के एसीपी-1 को भी तलब किया है। कोर्ट का कहना है कि मामले की पूरी स्थिति का सही जवाब वही दे सकते हैं। अगली सुनवाई में उन्हें संबंधित दस्तावेजों के साथ कोर्ट में पेश होना होगा और अदालत उनके सामने पूरे मामले को लेकर सवाल-जवाब करेगी।

अवैध हिरासत के मामलों पर लगातार सख्ती
इलाहाबाद हाई कोर्ट हाल के महीनों में अवैध हिरासत के मामलों में पुलिस की कार्रवाई पर लगातार सवाल उठाता रहा है। 7 अक्टूबर को सामने आए एक अन्य मामले में भी कोर्ट ने 24 घंटे से ज्यादा की गैरकानूनी हिरासत पर मुआवजे की व्यवस्था को दोहराया और रवि चौरसिया को 30 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया।

पुलिस रिकॉर्ड को लेकर कोर्ट की चिंता
कोर्ट का मौजूदा रुख इस बात पर केंद्रित है कि किसी व्यक्ति को पुलिस थाने या हिरासत में रखने की पूरी प्रक्रिया रिकॉर्ड में स्पष्ट होनी चाहिए। हालिया मामलों में अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि बाद में की गई औपचारिक गिरफ्तारी पहले की कथित अवैध हिरासत को अपने आप सही नहीं बना देती।

📢 बड़ी खबर आते ही सबसे पहले जानना चाहते हैं?
Aryavarta Live के WhatsApp Channel से जुड़ें और हर महत्वपूर्ण अपडेट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।

WhatsApp चैनल जॉइन करें
Breaking Hindi News और ताज़ा अपडेट्स पाएं सबसे पहले Aryavarta Live पर। यहां आपको भारत, पाकिस्तान, अमेरिका समेत दुनिया भर की महत्वपूर्ण खबरें मिलेंगी। खेल, मनोरंजन, व्यापार, टेक्नोलॉजी, क्राइम, उत्तर प्रदेश और बिहार की हर बड़ी खबर पढ़ने के लिए जुड़े रहें Aryavarta Live के साथ।

International

spot_img

आपको शर्म नहीं आती है? अवैध हिरासत मामले में UP पुलिस को हाई कोर्ट की फटकार, ACP कमलकांत से सवाल

By Malay Ojha | Published: 07 October 2026 at 07:35 PM

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अवैध हिरासत के एक मामले में नोएडा पुलिस की कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी जताई है। जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की बेंच ने सुनवाई के दौरान पुलिस अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यूपी पुलिस की हालत बहुत खराब है। कोर्ट ने नोएडा के एसीपी-2 कमलकांत को भी कड़ी फटकार लगाई और पूछा कि आपको शर्म नहीं आती है?

मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने नोएडा निवासी दीपक को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया। दीपक ने हाई कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल कर आरोप लगाया था कि पुलिस ने उसे हिरासत में लिया, लेकिन आधिकारिक रिकॉर्ड में उसकी हिरासत को सही तरीके से दर्ज नहीं किया गया।

23 अगस्त को हिरासत में लेने का आरोप
दीपक की ओर से पेश वकील अर्पित मालवीय और अवधेश कुमार मालवीय ने कोर्ट को बताया कि 23 अगस्त को दो गुटों के बीच विवाद हुआ था। इसी दिन शाम करीब 7.34 बजे दीपक को पुलिस ने हिरासत में लिया। आरोप है कि उस समय वह पुलिस के कब्जे में था, जबकि इसी घटना को लेकर बाद में एफआईआर दर्ज की गई।

FIR में नाम नहीं, फिर भी हिरासत में रखा
याचिकाकर्ता के वकीलों के मुताबिक, जिस एफआईआर का जिक्र पुलिस ने किया, उसमें दीपक का नाम नहीं था। इसके बावजूद उसे हिरासत में रखा गया। अगले दिन उसे धारा 130 के तहत नोटिस दिया गया, जबकि उस वक्त भी वह पुलिस हिरासत में था।

वकील से मिलने के अधिकार की जानकारी नहीं दी
दीपक ने आरोप लगाया कि पूछताछ के दौरान उसे यह तक नहीं बताया गया कि वह अपने वकील से मिल सकता है या कानूनी सलाह ले सकता है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पुलिस की ओर से तैयार किए गए रिकॉर्ड और जमानत बॉन्ड से जुड़ी प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए।

गिरफ्तारी रिकॉर्ड में भी कई सवाल
कोर्ट ने पाया कि पुलिस रिकॉर्ड से यह साफ नहीं था कि दीपक से जमानत बॉन्ड के लिए किसी निश्चित रकम को जमा करने की इच्छा के बारे में पूछा गया था या नहीं। गिरफ्तारी से जुड़े रिकॉर्ड में भी कोई निश्चित राशि दर्ज नहीं थी। कोर्ट ने दस्तावेजों को तैयार करने और पूरी प्रक्रिया को रिकॉर्ड करने के तरीके पर असंतोष जताया।

एसीपी-1 को भी कोर्ट ने किया तलब
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने नोएडा के एसीपी-1 को भी तलब किया है। कोर्ट का कहना है कि मामले की पूरी स्थिति का सही जवाब वही दे सकते हैं। अगली सुनवाई में उन्हें संबंधित दस्तावेजों के साथ कोर्ट में पेश होना होगा और अदालत उनके सामने पूरे मामले को लेकर सवाल-जवाब करेगी।

अवैध हिरासत के मामलों पर लगातार सख्ती
इलाहाबाद हाई कोर्ट हाल के महीनों में अवैध हिरासत के मामलों में पुलिस की कार्रवाई पर लगातार सवाल उठाता रहा है। 7 अक्टूबर को सामने आए एक अन्य मामले में भी कोर्ट ने 24 घंटे से ज्यादा की गैरकानूनी हिरासत पर मुआवजे की व्यवस्था को दोहराया और रवि चौरसिया को 30 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया।

पुलिस रिकॉर्ड को लेकर कोर्ट की चिंता
कोर्ट का मौजूदा रुख इस बात पर केंद्रित है कि किसी व्यक्ति को पुलिस थाने या हिरासत में रखने की पूरी प्रक्रिया रिकॉर्ड में स्पष्ट होनी चाहिए। हालिया मामलों में अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि बाद में की गई औपचारिक गिरफ्तारी पहले की कथित अवैध हिरासत को अपने आप सही नहीं बना देती।

📢 बड़ी खबर आते ही सबसे पहले जानना चाहते हैं?
Aryavarta Live के WhatsApp Channel से जुड़ें और हर महत्वपूर्ण अपडेट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।

WhatsApp चैनल जॉइन करें
Breaking Hindi News और ताज़ा अपडेट्स पाएं सबसे पहले Aryavarta Live पर। यहां आपको भारत, पाकिस्तान, अमेरिका समेत दुनिया भर की महत्वपूर्ण खबरें मिलेंगी। खेल, मनोरंजन, व्यापार, टेक्नोलॉजी, क्राइम, उत्तर प्रदेश और बिहार की हर बड़ी खबर पढ़ने के लिए जुड़े रहें Aryavarta Live के साथ।

National

spot_img

International

spot_img
RELATED ARTICLES