By aryavartalive | Published: 11 June 2026 at 03:21 PM
बिहार के चर्चित टेंडर घोटाला मामले में गुरुवार को जांच एजेंसियों ने बड़ी कार्रवाई करते हुए वित्त विभाग में तैनात संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी समेत तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया। विशेष निगरानी इकाई की इस कार्रवाई के बाद राज्य की नौकरशाही और ठेकेदारी व्यवस्था में हलचल तेज हो गई है। जांचकर्ताओं का दावा है कि गिरफ्तारियां रिशु श्री से पूछताछ में सामने आए अहम तथ्यों के आधार पर की गई हैं।
विशेष निगरानी इकाई ने इस मामले में संयुक्त सचिव मुमुक्षु चौधरी, अभियंता तारिणी दास और अभियंता उमेश कुमार सिंह को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई लंबे समय से चल रही जांच का हिस्सा है, जिसमें सरकारी ठेकों के आवंटन में कथित अनियमितताओं और कमीशनखोरी के आरोपों की पड़ताल की जा रही है।
रिशु श्री से पूछताछ में मिले अहम सुराग
जांच एजेंसियों का मानना है कि ठेकेदार रिशु श्री इस पूरे प्रकरण की महत्वपूर्ण कड़ी है। उसकी गिरफ्तारी के बाद हुई पूछताछ में कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिनके आधार पर अब कार्रवाई का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। सूत्रों के अनुसार सरकारी विभागों में ठेकों के आवंटन और प्रभावशाली लोगों की भूमिका को लेकर भी कई जानकारियां मिली हैं।
फरार अधिकारी की तलाश तेज
इस मामले में नाम आने के बाद से ही चर्चाओं में रहे वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी संजीव हंस की तलाश भी तेज कर दी गई है। जांच एजेंसियां उनकी भूमिका को लेकर अलग-अलग स्तर पर पड़ताल कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि मामले से जुड़े कई दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन की जांच अभी जारी है।
संयुक्त सचिव पर क्या हैं आरोप?
जांच के अनुसार मुमुक्षु चौधरी पर आरोप है कि उन्होंने अलग-अलग नगर निकायों में पदस्थापना के दौरान कथित रूप से कुछ कंपनियों को लाभ पहुंचाने के बदले आर्थिक लाभ लिया। जांच एजेंसियों का दावा है कि रिशु श्री से जुड़ी कंपनियों को कई परियोजनाओं में फायदा पहुंचाने के आरोपों की भी जांच की जा रही है।
मार्च 2025 में प्रवर्तन निदेशालय की छापेमारी के दौरान उनके ठिकानों से बड़ी मात्रा में नकदी बरामद हुई थी। इसके बाद से ही वे जांच एजेंसियों के रडार पर थे। फिलहाल भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच जारी है।
तारिणी दास भी जांच के घेरे में
पूर्व मुख्य अभियंता तारिणी दास का नाम भी जांच में सामने आया है। जांच एजेंसियों के अनुसार उनके ठिकानों पर हुई कार्रवाई में बड़ी मात्रा में नकदी बरामद की गई थी। अधिकारियों का कहना है कि अब उनके वित्तीय लेनदेन, संपत्तियों और सरकारी परियोजनाओं से जुड़े दस्तावेजों की भी गहन जांच की जा रही है।
काले धन के नेटवर्क की भी पड़ताल
जांच के दौरान एजेंसियों को ऐसे संकेत मिले हैं कि रिशु श्री से जुड़ी एक अतिरिक्त कंपनी के माध्यम से कथित रूप से धन को इधर-उधर करने का नेटवर्क संचालित किया जा रहा था। इसी आधार पर अब मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय लेनदेन की परतें भी खंगाली जा रही हैं।
सूत्रों का कहना है कि जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस कथित नेटवर्क के जरिए किन अधिकारियों, ठेकेदारों और प्रभावशाली लोगों को लाभ पहुंचाया गया। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा
विशेष निगरानी इकाई, केंद्रीय जांच एजेंसी और प्रवर्तन निदेशालय अलग-अलग स्तर पर मामले की जांच कर रहे हैं। अब तक कई अधिकारियों और संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू हो चुकी है। ताजा गिरफ्तारियों के बाद माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह मामला और भी बड़ा रूप ले सकता है।
बिहार की प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े इस बहुचर्चित प्रकरण पर पूरे प्रदेश की नजर बनी हुई है। जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर अब सबकी निगाहें टिकी हैं।

