By Malay Ojha | Published: 18 June 2026 at 01:22 PM
रोहतक में एक फुटवियर कंपनी को ग्राहक से कैरी बैग के 10 रुपये वसूलना महंगा पड़ गया। करीब तीन साल तक चली कानूनी लड़ाई के बाद जिला उपभोक्ता विवाद आयोग ने ग्राहक के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कंपनी को न सिर्फ 10 रुपये लौटाने बल्कि कुल 8 हजार रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है। आयोग ने माना कि कैरी बैग के लिए अलग से पैसा लेना उपभोक्ता के साथ अनुचित व्यवहार है।
यह मामला वर्ष 2023 का है। रोहतक निवासी एक युवक ने कंपनी के शोरूम से करीब 2 हजार रुपये से अधिक कीमत के जूते खरीदे थे। खरीदारी के दौरान बिल में कैरी बैग के लिए अतिरिक्त 10 रुपये जोड़ दिए गए। ग्राहक ने इसका विरोध करते हुए मुफ्त बैग देने की मांग की, लेकिन शोरूम कर्मचारियों ने कंपनी की नीति का हवाला देकर इनकार कर दिया।
ग्राहक पहुंचा उपभोक्ता आयोग
शोरूम से संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर ग्राहक ने उपभोक्ता आयोग का रुख किया। शिकायत में कहा गया कि उत्पाद खरीदने के बाद उसे सामान ले जाने के लिए अलग से भुगतान करने को मजबूर किया गया। इससे उसे मानसिक परेशानी और अनावश्यक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा।
आयोग ने कंपनी की दलीलें खारिज कीं
मामले की सुनवाई के दौरान कंपनी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि कैरी बैग के लिए शुल्क लेना पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक कदम है। कंपनी का तर्क था कि इससे लोग अपने घर से बैग लाने के लिए प्रेरित होते हैं और प्लास्टिक के इस्तेमाल में कमी आती है।
हालांकि आयोग ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। आयोग का मानना था कि जब कोई ग्राहक किसी प्रतिष्ठान से सामान खरीदता है तो उसे सुरक्षित और सुविधाजनक तरीके से उत्पाद उपलब्ध कराना विक्रेता की जिम्मेदारी होती है। ऐसे में कैरी बैग के लिए अलग से शुल्क लेना उचित नहीं माना जा सकता।
आयोग ने क्या कहा?
उपभोक्ता आयोग की पीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि कैरी बैग के लिए अतिरिक्त राशि वसूलना सेवा में कमी और अनुचित व्यापारिक व्यवहार की श्रेणी में आता है। आयोग ने माना कि ग्राहक से ऐसी राशि लेना उपभोक्ता अधिकारों के खिलाफ है और इसे सामान्य व्यापारिक प्रक्रिया का हिस्सा नहीं माना जा सकता।
कंपनी को कितना भुगतान करना होगा?
आयोग ने कंपनी को ग्राहक के 10 रुपये वापस करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा सेवा में कमी के लिए 4 हजार रुपये मुआवजा और 4 हजार रुपये मुकदमे के खर्च के रूप में देने का आदेश भी दिया गया है। यह पूरी राशि 30 दिनों के भीतर अदा करनी होगी।
उपभोक्ताओं के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे यह संदेश जाता है कि उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन छोटी रकम के मामले में भी स्वीकार नहीं किया जाएगा। कई बार ग्राहक कुछ रुपये की अतिरिक्त वसूली को नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह मामला दिखाता है कि यदि किसी उपभोक्ता को लगता है कि उसके साथ गलत हुआ है तो वह कानूनी रास्ता अपनाकर न्याय हासिल कर सकता है।
छोटे शुल्क पर बड़ा संदेश
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला व्यापारिक प्रतिष्ठानों के लिए भी एक संकेत है। कंपनियों को ग्राहकों से किसी भी तरह का अतिरिक्त शुल्क लेने से पहले यह सुनिश्चित करना होगा कि वह नियमों और उपभोक्ता अधिकारों के अनुरूप हो। अन्यथा छोटी रकम भी बड़े कानूनी विवाद का कारण बन सकती है।
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